Trump Attack Plan: वीकेंड पर ही क्यों करता है अमेरिका अटैक? जानिए इसके पीछे ट्रंप की असली चाल

Trump Attack Plan: अमेरिकी राष्ट्रपति के हर कदम के पीछे एक खास रणनीति काम करती है. वीकेंड में सैन्य कार्रवाई के पीछे भी ट्रंप का दिमाग बताया जा रहा है. क्योंकि तमाम देशों को तेल आपूर्ति और कूटनीतिक बातचीत के लिए थोड़ा समय मिल जाता है.

Advertisement
ईरान पर हमले के पीछे ट्रंप का ये प्लान. (Photo: ITG) ईरान पर हमले के पीछे ट्रंप का ये प्लान. (Photo: ITG)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 03 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 2:23 PM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लगातार दो बार ऐसे काम किए हैं. जो केवल संयोग है, या फिर इसके पीछे ट्रंप का कोई खास प्रयोग है.  दरअसल, पहले वेनेजुएला और अब ईरान पर सैन्य कार्रवाई के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump वीकेंड ही क्यों चुने? दोनों जगहों पर हमले शनिवार और रविवार के दौरान हुए, और इसे भारत के नजरिये से कैसे देखें?

Advertisement

दरअसल, पिछले हफ्ते शुक्रवार की रात अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कदम उठाए, और यह कार्रवाई भी सप्ताहांत में हुई. इससे यह सवाल उठा कि आखिर ऐसा क्यों किया जाता है? 

जानकार बताते हैं कि इसके पीछे एक वैश्विक शेयर बाजार और तेल बाजार का खेल है. सप्ताहांत में दुनिया के ज्यादातर स्टॉक मार्केट (Stock Market) बंद रहते हैं. अगर हमला या सैन्य कार्रवाई किसी वर्किंग डे में हो, तो बाजार तुरंत घबराहट में आ सकते हैं. एक्सपर्ट्स की मानें तो वीकेंड के दौरान सैन्य कार्रवाई करना ट्रंप का एक रणनीतिक फैसला हो सकता है, जिससे बाजार में घबराहट कम हो.

वीकेंड पर अटैक प्लान 

आम दिन में एक्शन से शेयर और तेल की कीमतों में तेज उछाल या गिरावट आ सकती है. लेकिन जब कार्रवाई शनिवार या रविवार को होती है, तो सरकारों और निवेशकों को स्थिति समझने का समय मिल जाता है. सोमवार आते-आते नुकसान का आकलन भी हो जाता है, इससे निवेशकों में अचानक घबराहट कम हो जाती है. 

Advertisement

दूसरी बड़ी वजह तेल है, मिडिल-ईस्ट में तनाव बढ़ते ही कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं, अगर वर्किंग डे के दौरान हमले होते, और बाजार भी खुले रहते तो कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकती थी. वीकेंड में कार्रवाई होने से देशों को आपूर्ति और कूटनीतिक बातचीत के लिए थोड़ा समय मिल जाता है, कई बार OPEC जैसे संगठन भी बाजार को स्थिर रखने के लिए कदम उठा सकते हैं.  

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सैन्य फैसले केवल बाजार को ध्यान में रखकर नहीं लिए जाते. इसके पीछे सुरक्षा, रणनीति और राजनीतिक कारण भी होते हैं. लेकिन समय का चुनाव सोच-समझकर किया जाता है, ताकि वैश्विक असर को संभाला जा सके. 

भारत के लिए क्यों संकट का समय?

अब अगर भारत के नजरिये से देखें तो देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा तेल मध्य-पूर्व से आयात करता है. अधिकतर तेल Strait of Hormuz के रास्ते से आता है, अगर इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है या फिर रूट बाधित होता है, तो भारत को तेल महंगा मिल सकता हैं. 

तेल महंगा होने से भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं. महंगाई बढ़ने का भी खतरा बढ़ जाएगा. ट्रांसपोर्ट महंगा होगा तो रोजमर्रा की चीजें भी महंगी हो सकती हैं. साथ ही, ज्यादा पैसा तेल खरीदने में जाएगा, जिससे देश का आयात बिल बढ़ेगा और चालू खाता घाटा भी बढ़ सकता है.

Advertisement

हालांकि फिलहाल कोई बड़ा आपूर्ति संकट सामने नहीं है. लेकिन तनाव बना रहना भी कीमतों को ऊंचा रखने के लिए काफी है. यही वजह है कि इस तरह की सैन्य कार्रवाई भारत जैसे तेल आयात पर निर्भर देश के लिए चिंता का कारण बनती है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement