West Asia War Impact: जंग से संकट में US की ये फर्म... तगड़ा नुकसान, डूब गए 8357Cr रुपये!

वेस्‍ट एशिया में संकट के कारण अमेरिका के एक बाजार पर तगड़ा असर हुआ है, जिस कारण उसने तिमाही नतीजों में भारी नुकसान देखा है. कंपनी को 900 मिलियन डॉलर का नुकसान दिख रहा है.

Advertisement
अमेरिकी एनर्जी फर्म को तगड़ा नुकसान. (Photo: File/ITG) अमेरिकी एनर्जी फर्म को तगड़ा नुकसान. (Photo: File/ITG)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्‍ली,
  • 08 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 11:37 AM IST

अमेरिकी रिफाइन कंपनी Phillips 66 को भारी नुकसान हुआ है. कंपनी ने कहा कि वेस्‍ट एशिया में जियो-पॉलिटिकल टेंशन के कारण ग्‍लोबल एनर्जी मार्केट में अस्थिरता से पहली तिमाही (जनवरी-मार्च) में उसके फाइनेंशियल परफॉर्मेंश पर काफी असर पड़ा है. 

सोमवार को अमेरिकी सिक्‍योरिटी एंड एक्‍सचेंज कमीशन के सामने पेश एक रिपोर्ट में कंपनी ने मुख्‍य तौर पर कमोडिटी की कीमतों में तेज उछाल के कारण टैक्‍स बीफोर मार्क टू मार्केट घाटे के तौर पर करीब 900 मिलियन डॉलर की जानकारी दी है यानी कंपनी को तीन महीने के दौरान 900 मिलियन डॉलर (8,357 करोड़ रुपये) का घाटा हुआ है. 

Advertisement

 रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी के अंत में ईरान पर अमेरिका-इजरायल युद्ध शुरू होने के बाद ऊर्जा बाजारों में कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला. ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद कर देने से आपूर्ति संबंधी उम्‍मीदें बाधित हुईं और कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं. 

मौजूदा संघर्ष के चलते हाल के वर्षों में तेल की कीमतों में सबसे जोरदार मंथली तेजी देखने को मिली है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने एलएसईजी के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि मार्च में ब्रेंट फ्यूचर में 64 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि अमेरिकी बेंचमार्क WTI Crude Oil में लगभग 52 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो मई 2020 के बाद से इसकी सबसे तेज बढ़ोतरी है. 

कंपनी ने क्‍या कहा? 
US फर्म फिलिप्स 66 ने कहा कि नुकसान मुख्य रूप से कच्चे तेल, रिफाइन पेट्रोलियम उत्पादों, नेचुरल गैस और नवीकरणीय फीडस्टॉक से जुड़े डेरिवेटिव कॉन्‍ट्रैक्‍ट में उसकी नेट शॉर्ट पोजीशन से संबंधित था. कीमतों में ज्‍यादा से ज्‍यादा बढ़ोतरी होने पर शॉर्ट पोजीशन से आमतौर पर नुकसान होता है. 

Advertisement

अमेरिकी कंपनी ने बताया कि वस्‍तुओं की कीमतों में भारी वृद्धि के कारण कंपनी के पहली तिमाही के वित्तीय परिणामों पर टैक्‍स बीफोर मार्क-टू-मार्केट घाटे के रूप में लगभग 900 मिलियन डॉलर का प्रभाव पड़ा. हालांकि,  भंडार के मौजूदा मार्केट प्राइस में संबंधित ग्रोथ बुक वैल्यू में टारगेटेड नहीं होती है. 31 मार्च, 2026 तक कच्चे तेल और उससे संबंधित उत्पादों के डेरिवेटिव कॉन्‍ट्रैक्‍ट में नेट शॉर्ट पोजीशन लगभग 50 मिलियन बैरल थी.

कई सेक्‍टर में नुकसान होने की आशंका

इन नुकसानों का असर कई व्यावसायिक क्षेत्रों में फैलने की आशंका है. रिफाइनिंग डिवीजन को 350 मिलियन डॉलर से 450 मिलियन डॉलर तक का नुकसान हो सकता है, जबकि मार्केटिंग और स्पेशलिटी सेगमेंट में 300 मिलियन डॉलर से 400 मिलियन डॉलर तक का घाटा हो सकता है. रिन्‍यूवेबल एनर्जी बिजनेस में 100 मिलियन डॉलर से 200 मिलियन डॉलर के बीच घाटा होने का अनुमान है.

फिलिप्स 66 ने बताया कि उसने अभी तक पहली तिमाही के लिए अपनी वित्तीय प्रक्रिया पूरी नहीं की है, और वास्तविक परिणाम प्रारंभिक अनुमानों से अलग हो सकते हैं. ह्यूस्टन, टेक्सास स्थित यह रिफाइनर इस महीने के अंत में अपनी पहली तिमाही की आय रिपोर्ट जारी करने वाली है. बात दें भारत के अप्रैल-मार्च के वित्तीय चक्र के विपरीत, अधिकांश अमेरिकी कंपनियां जनवरी-दिसंबर के वित्तीय वर्ष का पालन करती हैं, जिसके कारण फिलिप्स 66 जैसी फर्मों के लिए जनवरी-मार्च पहली तिमाही (Q1) होती है. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement