बैंकों पर भड़का अमेरिका, ईरान और चीन को लेकर दे डाली ये धमकी

अमेरिका ने ईरानी तेल खरीद को लेकर चीन के डॉलर में लेनदेन में मदद कर रहे बैंकों को चेतावनी दी है और कहा है कि अब सेकेंड्री सैंक्‍शन लगा सकता है.

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अमेरिका ने ग्‍लोबल बैंकों को दी धमकी! (Photo: File/ITG) अमेरिका ने ग्‍लोबल बैंकों को दी धमकी! (Photo: File/ITG)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्‍ली,
  • 29 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 7:54 PM IST

अमेरिका और ईरान जंग का तनाव कम नहीं होता दिख रहा है. अमेरिका हर तरफ से ईरान पर शिकंजा कसता जा रहा है. अब इसी के मद्देनजर अमेरिका ने चीन को भी लपेटे में ले लिया है. अमेरिका डिपॉर्टमेंट ऑफ ट्रेजरी के तहत काम करने वाली ऑफिर ऑफ फॉरेन असेट कंट्रोल (OFAC) ने ग्‍लोबल बैंकों और वित्तीय संस्थानों को चेतावनी दी है. 

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अमेरिका ने चेतावनी दी है कि अगर कोई ईरानी तेल को रिफाइन करने वाले चीनी कंपनियों से जुड़े ट्रांजैक्‍शन को सेटल करताा है तो उसे कई तरह के प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है. खासतौर पर चीन के शानदोंग प्रांत में मौजूद छोटी स्वतंत्र रिफाइनरियां अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आ सकती हैं. 

OFAC के मुताबिक, ये 'टीपॉट' रिफाइनरियां ईरान से कच्चा तेल आयात करने और उसे रिफाइन करने में बड़ी भूमिका निभा रही हैं. अनुमान है कि चीन, ईरान के कुल तेल आयात का करीब 90 फीसदी खरीद रहा है, और इसमें सबसे बड़ा हिस्सा इन्हीं स्वतंत्र रिफाइनरियों का है. अमेरिका का कहना है कि इस कारोबार से मिलने वाली कमाई सीधे तौर पर ईरानी सरकार, उसके हथियार और सैन्य गतिविधियों को मजबूती दे रही हैं. 

अमेरिकी एजेंसी ने कहा कि कुछ चीनी रिफाइनरियां डॉलर में होने वाले लेनदेन के लिए अमेरिकी फाइनेंशियल सिस्‍टम का इस्तेमाल कर रही हैं.इतना ही नहीं, ये संस्थान अमेरिकी सामान की खरीद में भी शामिल हैं. ऐसे में OFAC ने साफ कर दिया है कि इस तरह की गतिविधियां प्रतिबंधों का उल्लंघन मानी जा सकती हैं और वित्तीय संस्‍था पर कार्रवाई हो सकती है. 

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तीन बड़े कदम उठाने की सलाह 
इस चेतावनी के साथ वित्तीय संस्थानों को तीन अहम कदम उठाने की सलाह दी गई है. पहला, ऐसे रिस्‍क-बेस्‍ड सिस्टम लागू किए जाएं, जिससे प्रतिबंधित 'टीपॉट' रिफाइनरियों या ईरानी तेल से जुड़े लेनदेन को रोका जा सके. दूसरा, चीन स्थित रिफाइनरियों से जुड़े ट्रांजैक्‍शन पर अतिरिक्त जांच की जाए और तीसरा- सभी कॉरस्पॉन्डेंट बैंकों को स्पष्ट रूप से यह बताया जाए कि अमेरिकी प्रतिबंधों का पालन करना अनिवार्य है. 

इन चीजों का भी किया है खुलासा
OFAC ने इस व्यापार में इस्तेमाल होने वाले कई अन्‍य चीजों का भी खुलासा किया है, जिसमें एशिया और संयुक्त अरब अमीरात में बनाई गई फ्रंट कंपनियां, बिचौलिया ब्रोकर्स और शैडो फ्लीट शामिल हैं. ये जहाज अक्सर अपनी पहचान छिपाने के लिए समुद्र में एक जहाज से दूसरे जहाज में तेल ट्रांसफर करते हैं, फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करते हैं और यहां तक कि जहाज की पहचान तक बदल देते हैं. 

अमेरिका ने यह भी बताया कि मार्च 2025 से अब तक कई चीनी 'टीपॉट' रिफाइनरियों को प्रतिबंधित किया जा चुका है, जिन्होंने अरबों डॉलर के ईरानी तेल को प्रोसेस किया है. यह पूरा कारोबार ईरान को आर्थिक रूप से फायदा पहुंचा रहा है, जिसे अमेरिका रोकना चाहता है.

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सेंकेंड्री सैंक्‍शन लागने पर भी विचार 
अमेरिका ने यह भी कहा कि वह अब सेकेंडरी सैक्शंस का इस्तेमाल करने से भी पीछे नहीं हटेगा. इसका मतलब है कि अगर कोई विदेशी बैंक या वित्तीय संस्था ईरान से जुड़े इन लेनदेन को सपोर्ट करती है, तो उस पर भी अमेरिकी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं. यानी यह सिर्फ चीन या ईरान तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि पूरी वैश्विक बैंकिंग प्रणाली के लिए एक बड़ा जोखिम बन सकता है. 

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