'अगर पाकिस्‍तान को खुश करते हैं ट्रंप, तो...' पूर्व राजदूत ने US-इंडिया डील और रूसी तेल पर दी ये सलाह

अमेरिका पर दबाव बनाने को लेकर पूर्व राजदूत ने कहा कि ट्रेड डील के बीच में अगर ट्रंप जियो-पॉलिटिकल चीजों को लेकर आते हैं तो भारत को पाकिस्‍तान को लेकर शर्त रखनी चाहिए.

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अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप. (Photo: AP) अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप. (Photo: AP)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्‍ली,
  • 10 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:45 PM IST

भारत के पूर्व राजदूत केसी सिंह ने सोमवार को कहा कि अमेरिकी टैरिफ का इस्‍तेमाल न केवल व्‍यापारिक उपकरण के तौर में कर रहा है, बल्कि जियो-पॉलिटिकल दबाव बनाने के लिए भी कर रहा है और उन्होंने सुझाव दिया कि अगर अमेरिका व्‍यापार को भारत की विदेश नीति से जोड़ता है तो भारत व्‍यापारिक चर्चाओं में पाकिस्‍तान का मुद्दा उठाकर जवाब दे सकता है. 

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दरअसल,  ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने पर नई दिल्ली पर लगाए गए 25% टैरिफ को हटा दिया. उनके कार्यकारी आदेश में यह स्पष्ट कर दिया गया कि अमेरिका भारत के व्यापार पर नजर रखेगा और अगर नई दिल्ली मॉस्को से तेल खरीदना फिर से शुरू करती है, तो 25% टैरिफ दोबारा लगा दिया जाएगा. 

चीन ने बढ़ाई रूसी तेल की खपत
अमेरिका की ओर से कही गई इस बात को लेकर सिंह ने बताया कि भारत द्वारा कम किए गए रूसी तेल की मात्रा को चीन पहले ही एक्‍वॉयर कर चुका है. इंडिया टुडे में एक पैनल चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि  चीन ने रूस से अपना आयात बढ़ा दिया है, वह उस तेल की खरीदारी करने जा रहे हैं, जो भारत पहले ले रहा था. चीन के आयात में 10 लाख बैरल की बढ़ोतरी होगी. 

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अमेरिका पर डाला जा सकता है दबाव 
पूर्व राजदूत ने कहा कि ट्रंप चीन जा रहे हैं और वे उनसे बातचीत करेंगे. ट्रंप इसे G2 सम्‍मेलन कह रहे हैं, वे चीन के साथ बिल्‍कुल अलग तरह से व्‍यवहार कर रहे हैं. चीन पर भारी टैरिफ लगाए गए थे, जब चीन ने रेयर मेटल का हवाला देते हए कहा कि हम आपको दुर्लभ धातुओं की आपूर्ति बंद कर देंगे, तो ट्रंप ने उन्हें वापस ले लिया. इसका मतलब यह है कि ट्रंप से निपटने का तरीका यह है कि आपके पास कुछ ऐसा हो, जिससे आप बातचीत कर सकें और जवाबी दबाव डाल सकें.

रूसी तेल को लेकर क्‍या बोले सिंह? 
उन्‍होंने कहा कि भारत निष्क्रिय रहा और इंतजार करता रहा, फिर अचानक हमने ये डील कर दिया और न तो पूरी डिटेल उपलब्‍ध है और न ही भारत पूरी तरह से यह समझाने को तैयार है. सिंह ने भारत द्वारा तेल की खरीद को यूक्रेन युद्ध समाप्त करने से जोड़ने के तर्क पर सवाल उठाया. 

भारत को तेल आयात रोकने के लिए मजबूर करने का औचित्य यूक्रेन युद्ध को रोकने में मदद करना बताया गया है, लेकिन उन्होंने कहा कि यूक्रेन युद्ध राष्ट्रपति ट्रंप की तुलना में यूरोप को कहीं ज्‍यादा प्रभावित कर रहा है. यूरोपीय देशों ने आकर मुक्त व्यापार समझौता किया. उन्होंने भारत पर रूस से तेल आयात बंद करने की कोई शर्त नहीं रखी. यूक्रेन युद्ध से सबसे ज्यादा प्रभावित तो यूरोप ही है.

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यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने का एकमात्र तरीका यह है कि राष्ट्रपति ट्रंप यूक्रेनियन को सैन्य सहायता प्रदान करें. उन्होंने वह समर्थन वापस ले लिया है. इसलिए, यह सब एक बहुत ही जटिल तर्क है. लेकिन सरल शब्दों में कहें तो, वह जो कर रहे हैं उससे व्यापार समझौते, व्यापार समझौते नहीं रह गए हैं. व्यापार समझौते आमतौर पर व्यापार संतुलन के बारे में होते हैं. वह किसी अन्य देश की भू-राजनीति या कूटनीति को प्रभावित करने और उसे अपने विचारों और नजरिए के अधीन करने के लिए टैरिफ का उपयोग कर रहे हैं. 

अगर पाकिस्‍तान को खूश करने की कोशिश करते हैं, तो...  
 पूर्व राजदूत ने कहा कि भारत को व्यापार समझौते में यह शर्त रखनी चाहिए कि कल अगर ट्रंप पाकिस्‍तान को खुश करने की कोशिश करते हैं और भारत पर कोई आतंकवादी हमला होता है तो हम उन पर टैरिफ लगा देंगे. यह ठीक इसी के बराबर होगा, लेकिन  वहां तो वह उनके सेना प्रमुख को खुश करने की कोशिश कर रहे हैं. उनसे बातचीत कर रहे हैं और उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन अगर आप व्‍यापार में जियो-पॉलिटिकल को लेकर आते हैं तो भारत भी इसपर आपत्ति जता सकता है.  

जब सिंह से पूछा गया कि भारत व्यावहारिक रूप से क्या कर सकता है, तो उन्होंने कहा कि संदेश भले ही सार्वजनिक न हो, लेकिन निजी तौर पर स्पष्ट होना चाहिए.अगर आप पाकिस्तान को उसी तरह से लाड़-प्यार करते रहे, तो मुझे खेद है कि इससे भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा प्रभावित हो रही है और हम व्यापारिक वार्ताओं में भी इस मुद्दे को उठाएंगे. हम व्यापारिक वार्ता कर रहे हैं और वह व्यापक स्तर पर व्यापार और भू-राजनीति पर चर्चा कर रहे हैं. 

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