कोटक महिंद्रा बैंक के चेयरमैन उदय कोटक की भविष्यवाणी अब सच साबित हो रही है. उन्होंने अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप को लेकर एक भविष्यवाणी की थी, जिसका असर अब दिखाई देने लगा है. गुरुवार को उदय कोटक ने कहा कि 2024 में उन्होंने चेतावनी दी थी, जो अब सच साबित हो रही है. क्योंकि अमेरिका रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर व्यापक दंडात्मक टैरिफ लगाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.
कोटक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपना मैसेज शेयर करते हुए लिखा कि नवंबर 2024 में अमेरिकी निरंकुश शक्ति पर मेरा ट्वीट, जैसा अनुमान था वैसा ही हो रहा है. उन्होंने अपनी पोस्ट को दोबारा से शेयर किया. नवंबर में लिखे उस लेख में, कोटक ने तर्क दिया था कि संयुक्त राज्य अमेरिका, दुनिया की अग्रणी सैन्य, वित्तीय और तकनीकी शक्ति के रूप में, ट्रंप प्रशासन के तहत अपने प्रभुत्व का और अधिक लाभ उठाएगा.
उदय कोटक ने आगे लिखा कि अमेरिका धरती पर सेना, फाइनेंस और टेक्नोलॉजी के मामले में सर्वोपरि शक्ति है. डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में यह अपना दबदबा कायम करेगा. हर देश को इसे पहचानना और इसके लिए तैयार रहना होगा. फाइनेंस, जियो-पॉलिटिकल, व्यापार और अन्य क्षेत्रों में भी. क्या अमेरिकी राजकोषीय घाटा उसकी कमजोरी है?
रूसी तेल खरीदारों पर 500% टैरिफ
कोटक का यह बयान ट्रंप प्रशासन द्वारा एक ऐसे विधेयक का समर्थन करने के बाद वाशिंगटन द्वारा भारत सहित प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं पर बढ़ते दबाव के बीच आई हैं, जिसके तहत रूसी मूल के तेल और ऊर्जा उत्पादों का आयात करने वाले देशों पर 500% तक का टैरिफ लगाया जा सकता है.
अमेरिका का यह प्रस्ताव 'रूस पर प्रतिबंध लगाने वाला अधिनियम 2025' तब लागू होगा जब रूस या उसकी ओर से कार्य करने वाली संस्थाएं यूक्रेन के साथ शांति वार्ता करने से इनकार करती हैं. शांति समझौते का उल्लंघन करती हैं, यूक्रेन पर फिर से आक्रमण करती हैं या यूक्रेनी सरकार को कमजोर करने का प्रयास करती हैं.
प्रस्ताव में कहा गया है कि राष्ट्रपति को उन सभी वस्तुओं और सेवाओं पर शुल्क की दर को कम से कम 500% तक बढ़ाना होगा, जो उन देशों से संयुक्त राज्य अमेरिका में आयात की जाती हैं. जानबूझकर रूसी मूल के यूरेनियम और पेट्रोलियम उत्पादों के आदान-प्रदान में शामिल हैं.
भारत को झेलना पड़ रहा दबाव
8 जनवरी को भारत को दोहरी मार झेलनी पड़ी, जब राष्ट्रपति ट्रंप ने रूस प्रतिबंध विधेयक का समर्थन करने के साथ-साथ कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों से व्यापक रूप से बाहर निकलने की नीति के तहत भारत के नेतृत्व वाले अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) से अमेरिका की वापसी की घोषणा भी कर दी.
आजतक बिजनेस डेस्क