अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की पूर्व उप-प्रबंध निदेशक गीता गोपीनाथ ने ट्रंप टैरिफ और इंडियन इकोनॉमी पर इसके असर के बारे में खुलकर बात की. वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम दावोस-2026 में उन्होंने बड़ी चेतावनी (Gita Gopinath Warning) कहा कि अमेरिकी टैरिफ भारत की ग्रोथ रेट (India's Growth Rate) में 0.7 फीसदी तक की गिरावट ला सकता है. टैरिफ के असर को कम करने के लिए भारत समेत तमाम देशों द्वारा अपने एक्सपोर्ट डेस्टिनेशंस में विविधता लाने पर भी उन्होंने बड़ी बात कही है.
IMF पूर्वानुमानों पर ये बोलीं गोपीनाथ
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम दावोस में राजदीप सरदेसाई के साथ बातचीत करते हुए गीता गोपीनाथ ने ग्लोबल आउटलुक को लेकर छाई अनिश्चितता का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि वैश्विक विकास अनुमान एक उपयोगी मार्गदर्शक बने हुए हैं, लेकिन दुनिया में तेजी से अस्थिर होते व्यापारिक माहौल में इन्हें सावधानी से देखना जरूरी है. Global Economy में आईएमएफ के ग्रोथ को लेकर जाहिर किए जाने वाले पूर्वानुमानों पर गोपीनाथ ने कहा कि, 'यह एक अच्छा और उपयोगी संकेतक है. मुझे कहना होगा कि 2025 तक दुनिया के लिए जो अनुमान लगाया गया था, लगभग वैसा ही हुआ. 3.2% की ग्रोथ रेट का अनुमान और यह 3.3 रही, जो थोड़ा बेहतर है, लेकिन अनुमान लगभग सही था.'
इंडियन इकोनॉमी को लेकर ये अलर्ट
Trump Tariff पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि हम इन दिनों काफी हद तक जोखिम भरा खेल खेल रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि वैश्विक अर्थव्यवस्था स्थिर बनी रहेगी. जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत की सबसे तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था (India Fastest Growing Economy) और मजबूत घरेलू डिमांड वैश्विक चुनौतियों से उसे बचा सकती है? तो इस के जबाव में गोपीनाथ ने सतर्कता भरा रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि अमेरिकी टैरिफ के भारत पर पड़ने वाले प्रभाव के अनुमान के अनुसार, इससे आने वाले दो सालों में देश की विकास दर में लगभग 0.7% की कमी आ सकती है.
निर्यात में विविधता कितनी कारगर?
Gita Gopinath के मुताबिक, टैरिफ टेंशन के बीच व्यापार में बदलाव भी देखने को मिला है. उन्होंने कहा कि, 'आपने देखा है कि भारत से होने वाले कई निर्यात, जो पहले अमेरिका जाते थे, उन्हें मिडिल ईस्ट समेत अन्य देशों और बाजारों की ओर मोड़ा गया है. दिग्गज अर्थशास्त्री ने आगे कहा कि इसी तरह के तरीके अन्य देशों ने भी अपनाए हैं. चीन ने अमेरिका जाने वाले कई ट्रेड फ्लो एशिया और यूरोप के अन्य देशों की ओर मोड़े, हालांकि उनमें से कुछ वापस अमेरिका भी आ गए हैं.
हालांकि, गोपीनाथ ने चेतावनी देते हुए कहा कि ग्लोबल ट्रेड में इस तरह के बदलाव टैरिफ के प्रभाव को पूरी तरह से कम नहीं कर सकते हैं. यह स्थिति टिकाऊ नहीं है. उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि हम सभी इतनी आसानी से अमेरिका से अपना कारोबार समेटकर दूसरे बाजारों में बेचना शुरू कर देंगे और इसलिए हमें इसके परिणामों के बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं है.
कैसे सुलझेगा टैरिफ का मामला?
गोपीनाथ के मुताबिक, ग्लोबल व्यापार में अमेरिकी बाजार (US Market) का बहुत महत्व है और अमेरिका दुनिया के लिए एक बड़ा बाजार है. अगर अमेरिका के साथ हाई टैरिफ लागू होते हैं, तो इसका असर पड़ता ही है. भारतीय मूल की अर्थशास्त्री ने कहा कि इस मुद्दे को सुलझाने के लिए अंततः उच्चतम स्तर पर राजनीतिक भागीदारी की जरूरत नजर आती है. इसका समाधान दोनों राष्ट्राध्यक्षों, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के बीच होने वाली बात पर निर्भर करेगा.
आजतक बिजनेस डेस्क