दिल्ली से भी कम आबादी वाले एक छुटकू देश ने भारत को पीछे छोड़ दिया है. हम बात कर रहे हैं ताइवान की, जहां का शेयर बाजार अब इंडियन शेयर मार्केट से भी बड़ा हो गया है और इसने विश्व के 5वें सबसे बड़े शेयर बाजार का तमगा हासिल कर लिया है, जो अब तक भारत के पास था.
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट पर गौर करें, तो ताइवानी शेयर बाजार का मार्केट कैपिटलाइजेशन तेज बढ़ोतरी के साथ 4.95 ट्रिलियन डॉलर हो गया है, तो वहीं भारतीय शेयर बाजार की वैल्यू 4.92 ट्रिलियन डॉलर है यानी ये ताइवान से पीछे रह गया है.
ये हैं दुनिया के Top-5 शेयर बाजार
ग्लोबल शेयर मार्केट रैंकिंग में ताइवान से ऊपर अब सिर्फ अमेरिका, चीन, जापान और हांगकांग के शेयर बाजार हैं. अब तक भारत पांचवें पायदान पर काबिज था, लेकिन अब ये एक स्थान नीचे खिसक गया है. सबसे बड़ी बात ये है कि इस घटनाक्रम ने कई लोगों को हैरान किया है. इसकी वजह ये है कि भारतीय शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियों की संख्या अधिक है, इकोनॉमी का साइज भी ताइवान की तुलना में काफी अधिक बड़ा है, देश की आबादी 140 करोड़ से ज्यादा है, तो वहीं रिटेल निवेशकों का आधार दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ रहा है.
इसके बावजूद ताइवान की कुल जनसंख्या करीब 2.3 करोड़ है, जो कि भारत की राजधानी दिल्ली से भी कम है. इसके बाद भी वैश्विक निवेशक ताइवान में तेजी से पैसा लगा रहे हैं, जबकि भारतीय शेयरों से अरबों डॉलर निकाल रहे हैं.
AI, चिप का कमाल, ताइवान का धमाल
ताइवान शेयर बाजार के भारत से आगे निकलने के कारणों की बात करें, तो सबसे बड़ा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI और चिप इंडस्ट्री है. दरअसल, ताइवान की ग्रोथ मुख्य रूप से चिप बिजनेस की दिग्गज कंपनी ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (TSMNC) के शानदार प्रदर्शन से जुड़ा हुआ है, जो दुनिया की सबसे बड़ी सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी है. ये दुनिया में एआई ग्रोथ से सबसे ज्यादा फायदे में रहने वाली कंपनियों में टॉप पर है.
यहां बता दें कि ताइवान के बेंचमार्क स्टॉक इंडेक्स में सिर्फ टीएसएमसी की हिस्सेदारी लगभग 42% है, यानी देश का शेयर बाजार इस कंपनी पर सबसे अधिक केंद्रित है. AI Chips की डिमांड में तगड़े उछाल के चलते कंपनी का शेयर इस साल अब तक 49% चढ़ चुका है. कंपनी के चिप की बड़ी खरीदार कंपनियों में NVIDIA, Apple के अलावा एडवांस्ड माइक्रो डिवाइसेस और क्वालकॉम समेत अन्य हैं.
किस दिशा में जा रहा निवेशकों का पैसा
AI में ग्लोबल निवेश तेजी से बढ़ा है और निवेशक सेमीकंडक्टर और एआई से जुड़े शेयरों में निवेश बढ़ा रहे हैं, जिससे ताइवान ही नहीं, बल्कि साउथ कोरिया जैसे देश फोकस में हैं. इस सेक्टर में निवेश की बाढ़ ने ताइवान शेयर बाजार की वैल्यू को तेजी से बढ़ाया है.
दूसरी ओर भारत की अगर बात करें, तो स्थिति बिल्कुल अलग नजर आ रही है. देश वर्तमान में ऊर्जा की बढ़ती लागत, कंपनियों की धीम इनकम ग्रोथ, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और मार्केट में लिस्टेड एआई सेक्टर की कंपनियों की कमी से जूझ रहा है. भारत में अभी तक ऐसी बड़ी सेमीकंडक्टर या एआई हार्डवेयर कंपनियों की कमी है, जो इस सेक्टर में बड़े अंतरराष्ट्रीय निवेश को आकर्षित करती हों.
Taiwan Stock Market की इस उपलब्धि को लेकर वेल्थमिल्स सिक्योरिटीज में इक्विटी स्ट्रैटेजी की डायरेक्टर क्रांति बाथिनी ने कहा कि बाजार में आया यह बदलाव साफ तस्वीर पेश कर रहा है कि वैश्विक स्तर पर पैसा इस समय किस दिशा में जा रहा है. भारतीय बाजार से एफपीआई बिकवाली को लेकर उन्होंने कहा कि रुपये के लगातार गिरावट ने भी इन निवेशकों के बीच एक तरह की घबराहट पैदा की है.
आजतक बिजनेस डेस्क