ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सभी कमर्शियल जहाजों के लिए खुला है, लेकिन साथ ही एक शर्त है. सभी शिप को हमारी नौसेना के साथ सहयोग करना होगा. यह बयान ऐसे वक्त में आया है, जब ट्रंप चीन दौरे पर हैं और खाड़ी में जियो-पॉलिटिकल तनाव और ऊर्जा आपूर्ति मार्गों को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ी हुई है.
गौर करने वाली बात है कि पिछले कुछ समय से खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ गई हैं और जहाजों को जब्त किए जाने और ईरानी नौसेना द्वारा निगरानी बढ़ाए जाने की खबरें आ रही थीं. हालांंकि, अब ईरान ने कमर्शियल जहाजों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलने की जानकारी दी है.
दुनिया के कुल तेल निर्यात और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का एक बहुत बड़ा हिस्सा होर्मुज के रास्ते से होकर ही गुजरता है. खासकर खाड़ी देश सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और इराक से निकलने वाला कच्चा तेल इसी रास्ते से एशिया और यूरोप तक पहुंचता है. होर्मुज में तनाव की वजह से दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आई है.
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का करीब 85 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है, जो कि अधिकतर होर्मुज रास्ते से होकर ही पहुंचता है. कच्चा तेल महंगा होने से भारत का आयात बिल काफी बढ़ गया है, जिससे इकोनॉमी पर बुरा असर पड़ रहा है.
इस बयान का क्या है मतलब?
इस बयान से यह साफ हो चुका है कि ईरान तनाव को कम करने की ओर बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ ही वह होर्मुज पर अपना पूरा कंट्रोल रखना चाहता है. ईरान ने अपने बयान में यह भी कहा है कि उसने कमर्शिलय जहाजों के लिए होर्मुज तो खोला हुआ है, लेकिन अमेरिका की नाकेबंदी जारी है.
वहीं अरघची द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्दों से जहाजरानी कंपनियों और सरकारों के बीच चिंताएं बढ़ने की संभावना है, क्योंकि इससे यह साफ संकेत मिल रहा है कि अब कंपनियों को उस रास्ते तेल और गैस लाने के लिए ईरान के परमिशन की जरूरत होगी. समुद्री ऑपरेटरों को कई सवालों का सामना करना पड़ सकता है.
अब तेल कंपनियां क्या करेंगी?
आजतक बिजनेस डेस्क