SEBI का एक्‍शन... 12 को 5 साल के लिए किया बैन, 90 लाख का जुर्माना, कर रहे थे ये काम

सेबी ने 12 संस्‍थाओं पर बड़ा एक्‍शन लिया है. शेयर बाजार में धोखाधड़ी करने के आरोप में उन्‍हें 5 साल के लिए बैन कर दिया है. साथ ही 90 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. इतना ही नहीं ब्‍याज के साथ अवैध कमाए गए पैसे को भी वापस करने का आदेश दिया है.

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सेबी ने लगाया तगड़ा जुर्माना. (Photo: File/ITG) सेबी ने लगाया तगड़ा जुर्माना. (Photo: File/ITG)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्‍ली,
  • 17 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:07 PM IST

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने एक बड़े फ्रंट-रनिंग गिरोह पर एक्‍शन लेते हुए 12 संस्थाओं को पांच साल के लिए शेयर बाजार से प्रतिबंधित कर दिया है. शुक्रवार को अपने आदेश में कैपिटल मार्केट नियामक ने नोटिस प्राप्‍त करने वालों पर 90 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है और 1.07 करोड़ रुपये से ज्‍यादा के अवैध लाभ को वापस करने का भी आदेश दिया है. 

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यह मामला मंगल केशव फाइनेंशियल सर्विसेज एलएलपी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्‍टर परेश एन भगत नामक एक बड़े कस्‍टमर्स से संबंधित डील में एडवांस पेमेंट लेने से संबंधित है.  एमकेएफएस में कार्यरत और भगत के लिए लेन-देन संभालने वाले डीलर आशीष एस. पारेख और राजेश जोशी थे. सेबी की जांच के अनुसार, इन डीलर्स ने महत्वपूर्ण आगामी ऑर्डरों से संबंधित गैर-सार्वजनिक जानकारी शेयर करके अपने पद का दुरुपयोग किया. 

कैसे पैसा बनाती थीं ये संस्‍थाएं? 
यह गोपनीय जानकारी परिवार के सदस्यों और संबंधित संस्थाओं समेत कुछ लोगों के एक नेटवर्क तक लीक हो गई. सेबी ने पाया कि इस जानकारी की मदद से इन लोगों ने ट्रेडिंग की और अवैध पैसा बनाया. सेबी  ने कहा कि ये संस्‍थाएं समन्वित तरीके से ट्रेड करती थीं. आमतौर पर बॉय और सेल या सेल-सेल-बॉय पैटर्न पर काम करती थीं. वे बड़े ग्राहकों के बड़े सौदों से ठीक पहले अपने ऑर्डर देती थीं और थोक ऑर्डरों के कारण होने वाले प्राइस में उतार-चढ़ाव से लाभ कमाती थीं. 

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धोखाधड़ी का काम 
SEBI के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश सी. वर्शनी ने अपने आदेश में क‍हा कि नोटिस प्राप्तकर्ताओं ने ऐसी जानकारी का उपयोग किया जो आम जनता के पास उपलब्ध नहीं थी, और इसका लाभ उठाकर उन्होंने अवैध रूप से पैसा कमाया. यह काम धोखाधड़ी का है. नियामक ने SEBI अधिनियम की धारा 15HA के तहत कठोर जुर्माना लगाया है. 

कितना का लगा जुर्माना
आशीष एस पारेख और राजेश जोशी नामक प्राथमिक डीलरों पर 15 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है. नागेंद्र एस. दुबे और चिराग अतुल पिथड़िया पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जिन्होंने बिचौलियों और डीलरों के रूप में काम करते हुए अग्रिम लेन-देन को आसान बनाया. 5 लाख रुपये प्रति व्यक्ति का जुर्माना, दीपा आशीष पारेख, कश्मीरा जोशी और इस योजना के लिए उपयोग किए गए विभिन्न हफ़ाइल परिवार खातों समेत आठ अन्य संस्थाओं पर भी लगाया गया है. 

ब्‍याज के साथ पैसा वापस करने का भी आदेश
प्रतिबंध और जुर्माने के अलावा, संस्थाओं को अवैध रूप से कमाए गए पैसे 1,07,61,609 रुपये की राशि, साथ ही लाभ अर्जित होने के समय से गणना किए गए 12% ब्याज को वापस करने का आदेश दिया गया है. नियामक ने इन बकाया राशियों के निपटान के लिए पिछले अंतरिम आदेश के तहत एस्क्रो खातों में पहले से ही जब्त किए गए लगभग 1.25 करोड़ रुपये के उपयोग की अनुमति दी है. 

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5 साल के लिए शेयर बाजार से बैन
इस आदेश के तहत आशीष पारेख और नागेंद्र दुबे समेत दस संस्थाओं को 26 दिसंबर, 2022 के अंतरिम आदेश की तारीख से शुरू होकर पांच साल के लिए बाजार में कारोबार करने से प्रतिबंधित कर दिया गया है. दो अन्य कश्मीरा जोशी और राजेश जोशी पर इस अंतिम आदेश की तारीख से पांच साल का नया प्रतिबंध लगाया गया है. सुषमा नागेंद्र दुबे के खिलाफ कार्यवाही उनकी मृत्यु के बाद समाप्त कर दी गई, हालांकि धन वापसी की देनदारी उनके कानूनी वारिसों को भेजा गया है. 

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