यूरोप में तेल-गैस की राशनिंग की तैयारी, अभी नहीं कम होंगे दाम, EU की वार्निंग

संयुक्त राष्ट्र और यूरोपियन यूनियन ने जंग के प्रभावों को लेकर डराने वाला आकलन किया है. यूरोपियन यूनियन का कहना है कि एनर्जी की कीमतें लंबे समय तक बढ़ी रहेंगी और यूरोप में राशनिंग की नौबत आ सकती है. वही खाने-पीने की चीजों की सप्लाई पर UN ने कहा है कि 40 दिन से युद्ध ज्यादा चला तो इसका असर खेती पर पड़ेगा.

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EU ने कहा है कि यूरोप में एनर्जी राशनिंग की जरूरत पड़ सकती है. (Photo: ITG) EU ने कहा है कि यूरोप में एनर्जी राशनिंग की जरूरत पड़ सकती है. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 03 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 5:11 PM IST

ईरान जंग का असर तेल की कीमचों पर लंबे समय तक पड़ने वाला है. दुनिया में तेल-गैस की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहेंगी. यूरोपियन यूनियन ने कहा है कि EU मध्य-पूर्व युद्ध से होने वाले लंबे समय तक चलने वाले ऊर्जा संकट का सामना करने की तैयारी कर रहा हैऔर इसके लिए वह ईंधन की राशनिंग और आपातकालीन भंडारों से और तेल निकालने जैसे सभी संभावित उपायों. पर विचार कर रहा है. 

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यूरोपियन यूनियन के एनर्जी कमिश्नर डैन जोर्गेनसेन ने फाइनेंशियल टाइम्स को बताया, "यह एक लंबा संकट होगा, ऊर्जा की कीमतें बहुत लंबे समय तक ऊंची बनी रहेंगी." उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि कुछ और "अत्यंत जरूरी" प्रोडक्ट के मामले में आनेवाले हफ्तों में स्थिति और भी खराब हो सकती है. 

हॉर्मुज स्ट्रेट के लगभग बंद हो जाने और खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अफरा-तफरी मचा दी है; इससे कीमतें आसमान छू रही हैं और लंबे समय तक आपूर्ति बाधित रहने की आशंकाएं बढ़ गई हैं. एयरलाइनों ने विशेष रूप से जेट ईंधन की आपूर्ति को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर की हैं. 

जॉर्गेनसेन ने कहा, "हम जिस तरह की भाषा और शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं, वे अब इस संकट की शुरुआत के मुकाबले कहीं ज़्यादा गंभीर हैं." उन्होंने आगे कहा, "हमारा विश्लेषण तो यही कहता है कि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहेगी, इसलिए सभी देशों को यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि उनके पास अपनी जरूरत की सभी चीजें मौजूद हैं."

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उन्होंने कहा कि भले ही EU अभी "सप्लाई सिक्योरिटी संकट में नहीं है," फिर भी हम इस संघर्ष के लंबे समय तक चलने वाले प्रभावों से निपटने की योजना बना रहा है. इसमें सबसे बुरे हालात के लिए तैयार रहना भी शामिल है, भले ही इस समूह को अभी जेट ईंधन या डीजल जैसे जरूरी उत्पादों की राशनिंग लागू करने की ज़रूरत अभी तक न पड़ी हो. जोर्गेनसेन ने आगे कहा, "मेरा मतलब है, बाद में पछताने से बेहतर है कि पहले से तैयार रहा जाए."

EU कमिश्नर ने आगे कहा कि हमें अपने विकल्पों को खुला रखना होगा और अगर यह संकट, जैसा कि मेरा अनुमान है, सचमुच लंबे समय तक चला तो हमें बाद के चरण में भी उन साधनों की जरूरत पड़ेगी. यह काम बिल्कुल सही समय पर किया जाना चाहिए. 

जॉर्गेनसेन ने अपनी इस बात को भी दोहराया कि इस साल रूसी लिक्विफाइड नेचुरल गैस के आयात को खत्म करने के लिए EU के कानूनों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा. 

जंग की वजह से तेल गैस की कीमतों में छलांग

28 फरवरी 2026 से अब तकतेल और गैस की कीमतों में काफी बड़ा बदलाव हुआ है.

28 फरवरी 2026 से पहले ब्रेंट क्रूड लगभग 70-73 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था. मार्च के दौरान ब्रेंट कई बार $100-110 के ऊपर रहा, कभी-कभी $103-112 तक. अप्रैल 2026 की शुरुआत में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 104-110 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था. 

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युद्ध शुरू होने के बाद गैस की कीमतों में  70-75% तक की तेजी आई. एशियाई LNG की कीमतें फरवरी के अंत से अब तक लगभग 140% से ज्यादा बढ़ चुकी हैं, जबकि यूरोप में गैस कीमतें करीब 75% तक चढ़ीं. कुछ क्षेत्रों में औसतन 50–60% तक वृद्धि दर्ज हुई है. इसकी वजह होर्मुज स्ट्रेट में बाधा, कतर के LNG निर्यात में कमी और ऊर्जा इंफ्रा पर हमले हैं, जिससे सप्लाई घट गई और बाजार में अस्थिरता बढ़ी. 

खाने-पाने की चीजों की कीमतें भी बढ़ेंगी

वहीं इस बीच संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन ने शुक्रवार को कहा कि मार्च में दुनिया भर में खाने-पीने की चीज़ों की कीमतें पिछले साल सितंबर के बाद से अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं. अगर मध्य-पूर्व में चल रहा संघर्ष जिसकी वजह से ऊर्जा की कीमतें बढ़ी हैं, जारी रहता है, तो ये कीमतें और भी बढ़ सकती हैं. 

UN के मुख्य अर्थशास्त्री मैक्सिमो टोरेरो ने एक बयान में कहा, "संघर्ष शुरू होने के बाद से कीमतों में जो बढ़ोतरी हुई है, वह मामूली रही है. इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह तेल की ऊंची कीमतें हैं, लेकिन अनाज की वैश्विक आपूर्ति भरपूर होने के कारण कीमतों में बहुत ज़्यादा उछाल नहीं आया है."

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लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि अगर यह संघर्ष 40 दिनों से ज़्यादा चलता है और खेती में लगने वाली चीज़ों की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो किसान इनपुट का इस्तेमाल कम कर सकते हैं, कम बुवाई कर सकते हैं, या फिर ऐसी फसलें उगाना शुरू कर सकते हैं जिनमें कम खाद की ज़रूरत पड़ती हो.

उन्होंने आगे कहा, "किसानों के इन फैसलों का असर भविष्य की पैदावार पर पड़ेगा, और इस साल के बाकी समय और अगले पूरे साल के लिए हमारी खाद्य आपूर्ति और कमोडिटी की कीमतों का रुख इन्हीं फैसलों से तय होगा."

FAO का खाद्य मूल्य सूचकांक जो दुनिया भर में व्यापार की जाने वाली खाने-पीने की चीज़ों की कीमतों में होने वाले बदलावों को मापता है, फरवरी के संशोधित स्तर से 2.4% ऊपर चढ़ गया. यह सूचकांक एक साल पहले के स्तर से 1% ज़्यादा है. 

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