वेस्ट एशिया में अमेरिका-ईरान युद्ध से तनाव और दुनिया की तेल जरूरतों को पूरा करने के लिए अहम होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से बड़ा तेल-गैस संकट खड़ा हो गया है. इस एनर्जी क्राइसिस का असर दुनियाभर के तमाम देशों पर देखने को मिला है और भारत भी इससे अछूता नहीं है. यहां भी एलपीजी की किल्लत सामने आई, तो वहीं सरकार के उठाए गए बड़े कदमों ने इसका असर कम करने में मदद की.
हाल ही में आई निक्केई एशिया की हड़कंप मचाने वाली एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि LPG का तीसरा सबसे बड़ा कंज्यूमर भारत, रोजाना 4 लाख बैरल की कमी का सामना कर रहा है. अब इस रिपोर्ट पर सरकार का बयान आ गया है और पेट्रोलियम मिनिस्ट्री की ज्वाइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने साफ किया है कि हमारे पास LPG की कोई कमी नहीं है, बल्कि एलपीजी के घरेलू उत्पादन में भी वृद्धि हुई है.
LPG की कमी पर बड़े कदम उठाए
निक्केई एशिया की रिपोर्ट को लेकर पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने एक बयान जारी करते हुए कहा है कि, 'हमारे पास LPG की कोई कमी नहीं है, जबकि एलपीजी के घरेलू उत्पादन (LPG Production) में बढ़ोतरी हुई है. इसे बढ़ाकर लगभग 46,000-47,000 टन कर दिया गया है. LPG कुकिंग गैस की सप्लाई स्थिर है. पिछले तीन दिनों में, 1.32 करोड़ बुकिंग के मुकाबले 1.34 करोड़ घरेलू LPG सिलेंडर डिलीवर किए गए.'
उन्होंने आगे कहा कि भारत अपनी जरूरत के 60 फीसदी LPG का आयात करता था और इसका 90 फीसदी के आसपास हिस्सा सिर्फ होर्मुज स्ट्रेट से ही आता था. इसमें रुकावट से आई कमी के असर को कम करने के लिए सरकार ने लगातार प्रभावी कदम उठाए हैं.
निक्कई एशिया की रिपोर्ट में क्या दावा?
गौरतलब है कि निक्केई एशिया की एक रिपोर्ट में केप्लर के आंकड़ों का हवाला दिया गया है. इसमें बताया गया था कि अप्रैल में भारत का एलपीजी आयात 377,620 बैरल प्रति दिन रहा, जो फरवरी में आयात किए जा रहे 851,870 बैरल प्रति दिन से काफी कम है.
इसमें आगे कहा गया था कि भारत ने LPG की खरीद में विविधता लाने की भी कोशिश की है और ईरान, ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना और चिली से एलपीजी खरीदी है, जिन्होंने अप्रैल में प्रतिदिन 43,000 बैरल एलपीजी की आपूर्ति की, जो फरवरी में शून्य थी. यह आंकड़ा मिडिल ईस्ट के चार आपूर्तिकर्ताओं द्वारा हरदिन भेजे जाने वाले 678,000 बैरल की तुलना में काफी कम है, और दूरी भी एक महत्वपूर्ण कारक है.
इसमें ये भी बताया गया था कि ऑस्ट्रेलिया से भारत को आपूर्ति पहुंचने में लगभग 20 दिन लगते हैं, जबकि अर्जेंटीना और अमेरिका से 35-45 दिन लग सकते हैं. अप्रैल में भारत को यहां से हरदिन 149,000 बैरल का गैस मिली.
सरकार ने उठाए हैं ये कदम
LPG Crisis के बीच सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं की एलपीजी जरूरत पूरा करने के लिए बड़े कदम उठाए हैं, जिससे इसकी कमी के असर को कम करने में मदद मिली है. सबसे पहले सरकार ने एलपीजी के घरेलू प्रोडक्शन को बढ़ाने का आदेश किया, तो वहीं गैस सिलेंडर बुकिंग की टाइमलाइन में भी बदलाव किया. यही नहीं सिर्फ मिडिल ईस्ट के देशों पर निर्भर न रहते हुए सरकार ने अपने प्लान-बी (Modi Govt Plan-B) के तहत आयात डेस्टिनेशंश को बढ़ाया, जिससे बड़ी राहत मिली है.
हालांकि, इस बीच तेल कंपनियों ने LPG Cylinder Price Hike का झटका भी दिया है. मार्च की शुरुआत में 14.2 किलोग्राम के रेगुलर एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी भी की थी. तो वहीं कमर्शियल गैस सिलेंडर में दो बार बढ़ोतरी की गई और बीते 1 मई 2026 को इसकी कीमत सीधे 993 रुपये बढ़ा दी गई थी..
तेल की कमी पर कंपनियों का जबाव
जहां एक ओर सरकार ने देश में एलपीजी की भारी कमी की रिपोर्टों को खारिज किया है, तो वहीं पेट्रोल-डीजल की किल्लत पर तेल कंपनियों ने तस्वीर साफ की है. HPCL ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (अब X) पर पोस्ट में कहा कि तेल सप्लाई में रुकावट की खबरें गुमराह करने वाली हैं. HPCL के रिटेल आउटलेट्स पर सप्लाई नॉर्मल है, बिना रुकावट ऑपरेशन सुनिश्चित किया जा रहा है.
कंपनी ने लोगों से अपील करते हुए कहा है कि,'ग्राहक घबराहट में खरीदारी न करें और सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों, बिना वेरिफिकेशन वाले मैसेज पर ध्यान न दें.'
शिवानी शर्मा