Global Warning: ये तो होना ही था... ईरान-इजरायल ही नहीं, युद्ध के लपेटे में ये 40 बड़े देश, अब क्या होगा?

Energy market crisis: ईरान-इजरायल के बीच युद्ध चल रहा है, कहने को इसमें मुख्यतौर पर तीन देश युद्घ लड़ रहे हैं. लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से दुनिया के करीब 40 देश इस जंग में शामिल हैं. जिनकी अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर पड़ सकता है.

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इजरायल और ईरान में युद्ध से इन 40 बड़े देशों पर गंभीर असर पड़ने वाला है. (Photo: ITG) इजरायल और ईरान में युद्ध से इन 40 बड़े देशों पर गंभीर असर पड़ने वाला है. (Photo: ITG)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 12 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 3:10 PM IST

ईरान और इजरायल के बीच युद्ध रुक नहीं रहा है. भले ही अमेरिका लाख दावा करे लेकिन इस युद्ध से दुनियाभर में चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं. इस युद्ध का असर ईरान, इजरायल और अमेरिका तक सीमित नहीं है. आर्थिक जंग की चपेट में दुनियाभर के तमाम देश आ चुके हैं. 

क्योंकि वैश्विक अर्थव्यवस्था तेल, गैस, समुद्री व्यापार और सप्लाई चेन के जरिए एक-दूसरे से जुड़ी हुई है. अब अगर युद्ध नहीं रुकता है तो इसका सीधा असर ऊर्जा बाजार, शिपिंग रूट, महंगाई और औद्योगिक उत्पादन पर पड़ता है. खासकर Strait of Hormuz जैसे रूट से दुनिया के लगभग एक-तिहाई समुद्री तेल का व्यापार होता है. कई देशों में तेल-गैस की कमी होने लगी है. 

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ऐसी स्थिति से दुनिया के करीब 40 बड़े देशों में आर्थिक संकट गहरा सकता है, जो कि युद्ध का हिस्सा नहीं होते हुए भी उनपर आर्थिक चोट की पहुंचने वाली है, क्योंकि तेल और गैस की कीमतों में तेज उछाल आने की संभावना है. तेल महंगा होने से सबकुछ महंगा होगा, महंगाई से लड़ना एक अलग ही युद्ध है, जिससे कोई नहीं बच सकता. नीचे 40 ऐसे देशों का नाम है, जिसपर संघर्ष का गंभीर आर्थिक प्रभाव पड़ सकता है.

1. United States: अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. भले ही वह खुद भी तेल उत्पादक है, लेकिन वैश्विक तेल कीमतों में बढ़ोतरी से अमेरिकी बाजारों में महंगाई बढ़ जाती है. मिडिल-ईस्ट में युद्ध होने पर तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं, जिससे पेट्रोल, डीजल और औद्योगिक उत्पादन महंगा हो जाता है. इसके अलावा अमेरिका की सैन्य और कूटनीतिक भागीदारी भी आर्थिक दबाव बढ़ा सकती है.

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2. China: चीन दुनिया का सबसे बड़ा एनर्जी आयातक देश है और वह मिडिल ईस्ट से सबसे ज्यादा तेल खरीदता है. अगर हॉर्मुज जलडमरूमध्य या अन्य समुद्री रास्तों में बाधा आती है, तो चीन के उद्योग, परिवहन और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं. इससे वैश्विक सप्लाई चेन भी प्रभावित होगी.

3. India: भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 80% आयात करता है. ईरान-इज़रायल संघर्ष की वजह से तेल कीमतों में उछाल आने पर भारत में पेट्रोल-डीजल महंगे होंगे, जिससे महंगाई और व्यापार घाटा बढ़ सकता है. साथ ही, लाखों भारतीय मिडिल ईस्ट में काम करते हैं, इसलिए वहां अस्थिरता से रेमिटेंस पर भी असर पड़ सकता है. 

4. Pakistan: पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक संकट और विदेशी कर्ज के दबाव से जूझ रहा है. उसकी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित तेल और गैस से पूरा होता है. अगर ईरान-इज़रायल युद्ध के कारण वैश्विक तेल कीमतों में तेज उछाल आता है, तो पाकिस्तान के लिए तेल आयात और महंगा हो जाएगा. इससे बिजली उत्पादन की लागत बढ़ेगी और देश में बिजली संकट गहरा सकता है. 

5. Bangladesh: बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था संकट में है. यह देश ऊर्जा के लिए आयात पर काफी निर्भर है. कपड़ा उद्योग उसके निर्यात का मुख्य आधार है. अगर युद्ध के कारण शिपिंग लागत बढ़ती है या समुद्री मार्गों में बाधा आती है, तो बांग्लादेश के निर्यात पर असर पड़ सकता है. 

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6. Japan: जापान एक बड़ा देश है, आर्थिक तौर पर संपन्न है. लेकिन एनर्जी के लिए लगभग पूरी तरह आयात पर निर्भर है. मध्य-पूर्व से तेल और LNG की सप्लाई बाधित होने पर जापान के उद्योग और बिजली उत्पादन प्रभावित हो सकते हैं. 

7. South Korea: दक्षिण कोरिया भी बड़ी मात्रा में तेल और गैस आयात करता है. युद्ध की स्थिति में ऊर्जा लागत बढ़ने से उसके इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल उद्योगों की लागत बढ़ सकती है. 

8. Germany: जर्मनी यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. एनर्जी कीमतों में बढ़ोतरी से उसके औद्योगिक क्षेत्र खासकर केमिकल और मैन्युफैक्चरिंग पर बड़ा असर पड़ सकता है. 

9. United Kingdom: ब्रिटेन वैश्विक वित्तीय बाजारों का बड़ा केंद्र है. युद्ध के कारण ऊर्जा और शिपिंग लागत बढ़ने से ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों में अस्थिरता आ सकती है.

10. France: फ्रांस के ऊर्जा और रक्षा उद्योग पर असर पड़ सकता है. इसके अलावा मिडिल-ईस्ट में उसके व्यापारिक हित भी प्रभावित हो सकते हैं.

11. Italy: इटली की अर्थव्यवस्था ऊर्जा आयात पर काफी निर्भर है. तेल और गैस की कीमत बढ़ने से उसके औद्योगिक और परिवहन क्षेत्र प्रभावित हो सकते हैं.

12. Spain: स्पेन को भी ऊर्जा कीमतों में उछाल से महंगाई और व्यापार घाटे का सामना करना पड़ सकता है. 

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13. Saudi Arabia: ईरान-इजरायल में युद्ध से सउदी अरब आर्थिक तौर पर बड़ा नुकसान होने वाला है. ये देश तेल का बड़ा उत्पादक है, युद्ध क्षेत्र के करीब होने से शिपिंग और तेल निर्यात जोखिम में आ सकते हैं. 

14. United Arab Emirates: यूएई वैश्विक व्यापार और लॉजिस्टिक्स का केंद्र है। युद्ध से समुद्री व्यापार और निवेश प्रभावित हो सकता है. 

15. Qatar: कतर दुनिया का बड़ा LNG निर्यातक है. अगर समुद्री मार्ग बाधित होते हैं तो गैस सप्लाई प्रभावित हो सकती है.

16. Kuwait: तेल निर्यात पर निर्भर अर्थव्यवस्था होने के कारण क्षेत्रीय अस्थिरता से इसके निर्यात और राजस्व पर असर पड़ सकता है. 

17. Oman: ओमान हॉर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित है. किसी भी सैन्य टकराव से उसके समुद्री व्यापार और बंदरगाहों पर दबाव बढ़ सकता है. 

18. Bahrain: बहरीन वित्तीय सेवाओं का केंद्र है. युद्ध की स्थिति में निवेश और बैंकिंग क्षेत्र प्रभावित हो सकते हैं. 

19. Netherlands: रॉटरडैम जैसे बड़े बंदरगाह वैश्विक ऊर्जा व्यापार के केंद्र हैं। सप्लाई चेन बाधित होने से यूरोप के ऊर्जा वितरण पर असर पड़ सकता है. 

20. Belgium: बेल्जियम के बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क वैश्विक व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. 

21. Poland: ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी से पोलैंड की औद्योगिक लागत बढ़ सकती है. 

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22. Turkey: तुर्की यूरोप और एशिया के बीच ऊर्जा ट्रांजिट हब है. ईरान-इजरायल में युद्ध से उसके व्यापार मार्ग और ऊर्जा परियोजनाएं प्रभावित हो सकती हैं. 

23. Indonesia: तेल आयात और समुद्री व्यापार पर निर्भरता के कारण इडोनेशिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है. 

24. Thailand: पर्यटन और ऊर्जा आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्था को तेल कीमतों में उछाल से नुकसान हो सकता है. 

25. Vietnam: मैन्युफैक्चरिंग हब होने के कारण सप्लाई चेन बाधाओं से इसके निर्यात प्रभावित हो सकते हैं. 

26. Malaysia: ऊर्जा बाजार में अस्थिरता से इसके तेल और गैस सेक्टर में उतार-चढ़ाव आ सकता है. 

27. Singapore: सिंगापुर एशिया का सबसे बड़ा तेल ट्रेडिंग और शिपिंग हब है. युद्ध से शिपिंग लागत और बीमा प्रीमियम बढ़ सकते हैं. 

28. Brazil: ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी से ब्राजील की घरेलू महंगाई और औद्योगिक लागत बढ़ सकती है.

29. Mexico: वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता से मेक्सिको की अर्थव्यवस्था और निर्यात प्रभावित हो सकते हैं. 

30. Canada: कनाडा खुद तेल उत्पादक है, लेकिन वैश्विक बाजार की अस्थिरता से उसके व्यापार और निवेश पर असर पड़ सकता है. 

31. Australia: ऊर्जा आयात और वैश्विक व्यापार पर निर्भरता के कारण इसके उद्योग प्रभावित हो सकते हैं. 

32. South Africa: तेल आयात महंगा होने से दक्षिण अफ्रीका की अर्थव्यवस्था और परिवहन लागत बढ़ सकती है.

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33. Kenya: अफ्रीका के कई देश तेल आयात पर निर्भर हैं और उनकी अर्थव्यवस्था पहले से ही महंगाई और कर्ज के दबाव में है. केन्या पूर्वी अफ्रीका की बड़ी अर्थव्यवस्था है, लेकिन यह लगभग पूरा तेल आयात करता है. तेल की कीमत बढ़ने से परिवहन, खाद्य वितरण और बिजली उत्पादन महंगे होने का डर है. 
34. Ethiopia: इथियोपिया एक तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्था है, लेकिन ऊर्जा आयात पर उसकी निर्भरता ज्यादा है. युद्ध के कारण तेल महंगा होने से सरकार पर सब्सिडी का बोझ बढ़ सकता है. इससे बजट घाटा बढ़ने की आशंका रहती है.

35. Nigeria: नाइजीरिया तेल उत्पादक देश है, लेकिन वहां की रिफाइनिंग क्षमता सीमित है, इसलिए वह पेट्रोलियम उत्पाद आयात करता है. यदि वैश्विक बाजार में तेल कीमतों में अस्थिरता आती है, तो देश में ईंधन संकट और महंगाई बढ़ सकती है. 

36. Egypt: मिस्र की अर्थव्यवस्था पर्यटन, व्यापार और ऊर्जा आयात पर निर्भर है. मध्य-पूर्व में युद्ध होने पर सुएज़ नहर से गुजरने वाले जहाजों की संख्या कम हो सकती है. इससे मिस्र की आय पर असर पड़ेगा और आर्थिक दबाव बढ़ सकता है. 

37. South Africa: दक्षिण अफ्रीका अफ्रीका की सबसे विकसित अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, लेकिन यह भी तेल आयात करता है. ऊर्जा कीमतों में वृद्धि से परिवहन और बिजली उत्पादन महंगा हो जाता है, जिससे औद्योगिक उत्पादन प्रभावित हो सकता है.

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38. Ghana: घाना की अर्थव्यवस्था पहले से ही कर्ज संकट और महंगाई से जूझ रही है. तेल और गैस महंगे होने से सरकार के लिए सब्सिडी देना मुश्किल हो सकता है और महंगाई और बढ़ सकती है. 

39. Tanzania: तंजानिया भी ऊर्जा आयात पर निर्भर है. युद्ध की वजह से तेल कीमत बढ़ने पर परिवहन और कृषि लागत बढ़ जाती है, जिससे खाद्य कीमतों में उछाल आ सकता है. 

40. Morocco: मोरक्को ऊर्जा आयातक देश है और तेल कीमतों में बढ़ोतरी से उसकी आर्थिक वृद्धि प्रभावित हो सकती है. इसके अलावा खाद्य आयात भी महंगे हो सकते हैं. 

बता दें, ईरान-इजरायल के बीच युद्ध या गंभीर सैन्य टकराव की स्थिति में सिर्फ बड़े औद्योगिक देशों ही नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया और अफ्रीका के कई विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर पड़ सकता है. इन देशों की अर्थव्यवस्था अक्सर तेल-गैस आयात, खाद्य सप्लाई, शिपिंग रूट और विदेशी सहायता पर निर्भर होती है.

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