LPG Crisis Impact: ₹10 वाली चाय 20 में, मटर पनीर-गोलगप्पे भी महंगे, LPG संकट का दिखा असर, बढ़ गई महंगाई!

LPG Crisis Imapact In India: अमेरिका-इजरायल और ईरान में छिड़े युद्ध का सीधा असर भारत में एलपीजी संकट के रूप में देखने को मिल रहा है. सिलेंडर की कीमतों में पहले ही बढ़ोतरी की जा चुकी है, जबकि कमर्शियल सिलेंडर के ऑर्डर रुकने से होटल-रेस्टोरेंट से जुड़े छोटे-बड़े कारोबारियों की चिंता चरम पर है.

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एलपीजी संकट का दिखने लगा असर. (File Photo: ITG) एलपीजी संकट का दिखने लगा असर. (File Photo: ITG)

दीपक चतुर्वेदी

  • नई दिल्ली,
  • 11 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 1:29 PM IST

मिडिल ईस्ट में अमेर‍िका-इजरायल और ईरान में छिड़ी जंग के चलते तेल-गैस आयात में रुकावट का असर भारत में भी दिखने लगा है. खासतौर पर संकट LPG (ल‍िक्व‍िड पेट्रोल‍ियम गैस) पर है, जो गहराता जा रहा. गैस कंपनियों ने LPG की कीमतें बढ़ा दी हैं, वहीं कमर्शियल गैस सिलेंडर के ऑर्डर पर रोक से हड़कंप मचा हुआ है. सीधा असर सुबह के चाय-नाश्ते से लेकर रेस्टोरेंट में डिनर तक पर देखने को मिला है. कल तक जो एक कप चाय दुकानों पर 10 रुपये की मिलती थी, एक ही दिन में 15-20 रुपये की हो गई. गैस की किल्लत से पूरी-सब्जी की प्लेट महंगी हुई है तो कई रेस्टोरेंट्स ने अपने मेनू तक बदल दिए हैं. हालात ये है कि स्थानीय दुकानदार गैस सिलेंडर के लिए बोलियां लगाए जाने की बात कह रहे हैं, जो 2000-2500 रुपये या इससे ज्यादा बताई जा रही है.  

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LPG संकट बढ़ने से मचा हड़कंप
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध की वजह से होर्मुज स्ट्रेट में आई रुकावट ने तेल-गैस आयात पर रोक-सी लगा दी है. इससे भारत समेत अन्य Oil-Gas Import पर निर्भर देशों में मुसीबत बढ़ गई है. भारत में सरकार ने LPG संकट को देखते हुए आनन-फानन में तमाम कदम उठाए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति लगातार बिगड़ती हुई नजर आ रही हैं. सरकार की ओर से तेल कंपनियों को घरेलू LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया है, तो वहीं देश में कमर्शियल गैस सिलेंडर (Commercial LPG Cylinder) ऑर्डर पर रोक ने छोटे कारोबारियों से लेकर बड़े रेस्टोरेंट-होटलों तक की चिंता बढ़ा दी है. 

अमेरिका-इजरायल और ईरान में युद्ध भले ही करीब 3000 किलोमीटर दूर चल रहा है, लेकिन इसका असर भारत में घर की रसोई से लेकर होटलों और रेस्तरांओं पर भी दिखा है. इसके पीछे की वजह ये है कि भारत अपनी घरेलू एलपीजी आवश्यकता का 60% से अधिक आयात करता है और इन आयात का लगभग 85-90% होर्मुज स्ट्रेट से होकर आता है, जो युद्ध के चलते बंद है. देश में सालाना लगभग 31 मिलियन टन एलपीजी की खपत है, इसमें से 87% का उपयोग घरों के लिए, जबकि बाकी हिस्सा होटलों और रेस्तरां में जाता है.

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LPG सिलेंडर के लिए लग रही बोली
सरकार ने हालांकि घरेलू उपभोक्ताओं को पर्याप्त LPG मुहैया कराने के लिए तेल कंपनियों को निर्देशित किया है, लेकिन चाय-नाश्ता बेचने वाले छोटे कारोबारियों पर कॉमर्शियल सिलेंडर के ऑर्डर रोकने का बुरा असर दिखा है. द‍िल्ली से सटे नोएडा के सेक्टर 16 स्थ‍ित फिल्मसिटी में अपना कारोबार करने वाले एक दुकानदार ने बताया कि LPG Cylinder के लिए बेहद बुरा हाल हो गया है. सिलेंडर लेने के लिए कतार में घंटों इंतजार करना पड़ रहा है और इसके बावजूद भी तय कीमत पर नहीं मिल पा रहा है. 

नाम न छ‍ापने की शर्त पर उसने बताया कि कमर्शियल सिलेंडर (19 क‍िलो) अब 2500-2800 रुपये तक पहुंच गया है. यही नहीं, सिलेंडर लेने के लिए बोलियां भी लग रही हैं, नतीजतन इससे भी महंगे दाम पर खरीदी-बिक्री हो रही है. 

एक ही दिन में ही महंगी हो गई चाय
LPG सिलेंडर की भारी किल्लत का जिक्र करते हुए रेहड़ी-खोमचे वाले बताते हैं कि हमारे चाय-नाश्ते के कारोबर में गैस सिलेंडर सबसे जरूरी है और इसके न मिल पाने की वजह से कई दुकानदारों को मजबूरी में अपनी दुकान तक बंद करनी पड़ गई है. 

इस बातचीत के दौरान हमारी नजर जब वहां लगी रेट लिस्ट पर गई, तो उसमें बदलाव देखने को मिले. 7 रुपये में मिलने वाली कटिंग चाय अब 10 रुपये की हो चुकी है, जबकि 10 रुपये वाली चाय का रेट 15 रुपये कर दिया गया है. कई अन्य दुकानों पर भी एक फुल कप चाय का रेट 20 रुपये तक कर दिया गया है, जो पहले 15 रुपये की मिलती थी. इसके अलावा नाश्ते के अन्य खाद्य पदार्थों के रेट भी बढ़े हैं.

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पूरी-सब्जी से गोलगप्पे तक सब महंगा
न सिर्फ चाय के दाम में बढ़ोतरी देखने को मिली है, बल्कि नाश्ते से लेकर डिनर तक पर महंगाई की मार पड़ने लगी है. सिलेंडर न मिल पाने या ब्लैक मार्केट में अनाप-शनाप दाम पर खरीइने की मजबूरी के चलते  रेहड़ी-खोमचों पर मिलने वाली पूरी-सब्जी की प्लेट भी महंगी हुई है और ये 25 से बढ़कर 30 रुपये तक कर दी गई है. हमने नोएडा के सेक्टर-44 में एक गोलगप्पे बेचने वाले से बात की तो उसने बताया क‍ि 20 रुपये में 8 गोलगप्पे वाली प्लेट में अब महज 5 गोलगप्पे आ रहे हैं. जब इसका कारण पूछ, तो उसका जबाव सीधा था, 'साहब, सिलेंडर अब 2400 रुपये का मिला है.' यानी जमीनी स्तर पर संकट बड़ा नजर आ रहा है. 

रेस्टोरेंट में मेन्यू बदले, गैस सिलेंडर से तौबा
छोटे दुकानदार ही नहीं, बल्कि बड़े-बड़े होटल-रेस्टोरेंट कारोबारियों की चिंता भी चरम पर पहुंच गई है. कई रेस्टोरेंट्स ने अपने मेनू ही बदल डाले हैं तो ढाबों पर थाली में परोसी जाने वाली चीजों में कटौती दिखी. दाल, रोटी, सीजनल सब्जी के साथ मिलने वाला मटर पनीर गायब कर दिया गया है और जहां पहले की तरह दी जा रही है, तो थाली की कीमत में इजाफा देखने को मिला है. दिल्ली-नोएडा हो या बेंगलुरु शहर-शहर ऐसे ही हालात हैं.

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LPG Crisis के चलते रेस्टोरेंट्स में अब जरूरी खाद्य पदार्थों पर फोकस किया जा रहा है. यही नहीं, वे खाना पकाने के लिए सिलेंडर के बजाय इलेक्ट्रिक तंदूर और इंडक्शन के इस्तेमाल पर जोर दे रहे हैं. रिपोर्ट्स की मानें, तो कमर्शियल सिलेंडर को तमाम जर‍ियों से हासिल करने के लिए प्रति सिलेंडर 500-100 रुपये अतिरिक्त देने पड़ रहे हैं.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट देखें, तो मुंबई होटल एसोसिएशन की ओर से चेतावनी देते हुए कहा गया कि लगभग 20% होटल और रेस्तरां पहले ही बंद हो चुके हैं और एलपीजी आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ तो ये आंकड़ा 50% तक पहुंच सकता है. दादर और अंधेरी जैसे लोकप्रिय इलाकों में भोजनालयों ने पहले ही अपने मेनू को छोटा करना शुरू कर दिया है. होटलों और रेस्तरां को हो रही किल्लत को देखते हुए हालांकि, केंद्र सरकार ने एलपीजी सप्लाई के अनुरोधों की समीक्षा के लिए OMCs के 3 कार्यकारी निदेशकों वाली एक समिति का गठन किया है, लेकिन नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) ने कहा कि जमीनी हकीकत इससे अलग है. 

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