शेयर बाजार (Stock Market) में बुधवार को जोरदार तेजी के साथ कारोबार हो रहा है, लेकिन इसके बावजूद रेलवे से जुड़ी कंपनी आईआरएफसी का स्टॉक (IRFC Share) खुलने के साथ ही बुरी तरह टूट गया. खबर लिखे जाने तक ये रेलवे स्टॉक 4% से ज्यादा टूटकर 104 रुपये के लेवल पर कारोबार कर रहा था. Railway Stock में ये गिरावट एक खबर के बाद आई हैं, जिसमें बताया जा रहा है कि सरकार कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रही है.
खुलते ही धराशायी हुआ रेलवे स्टॉक
IRFC Share की बुधवार को परफॉर्मेंस देखें, तो कंपनी का स्टॉक अपने पिछले बंद भाव 109.90 रुपये की तुलना में फिसलकर 105.99 रुपये पर खुला था. इसके बाद रेलवे शेयर में गिरावट और बढ़ती चली गई. खबर लिखे जाने तक आईआरएफसी का शेयर 4.75 फीसदी की गिरावट लेकर 104.66 रुपये पर ट्रेड कर रहा था. बता दें, ये आईआरएफसी शेयर का 52 वीक का लो लेवल भी है. इस गिरावट का असर कंपनी के मार्केट कैपिटलाइजेशन पर भी देखने को मिला और IRFC Market Cap टूटकर 1.37 लाख करोड़ रुपये पर आ गया.
क्यों बिखर गया IRFC का शेयर?
आईआरएफसी के शेयर में अचानक आई इस बड़ी गिरावट के पीछे के कारणों के बारे में बात करें, तो सरकार द्वारा रेलवे कंपनी में 2% इक्विटी हिस्सेदारी बेचने की खबर के बाद ये देखने को मिली है. Govt द्वारा ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए हिस्सेदारी बेचने की घोषणा की गई है. इसके अलावा निवेश और सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) की ओर से कहा गया है कि 2 फीसदी की अतिरिक्त हिस्सेदारी बिक्री के लिए ग्रीन शू (Green Shoe) ऑप्शन भी है. बस इस खबर के बाद अचानक शेयर खुलने के साथ ही भरभराकर टूट गया.
OFS के लिए ये रेट तय
ऑफर फॉर सेल के लिए मिनिमम रेट 104 रुपये प्रति शेयर निर्धारित किया गया है. नॉन रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए OFS 25 फरवरी को ओपन होगा, जबकि रिटेल इन्वेस्टर्स 26 फरवरी को बोली लगा सकते हैं. बिजनेस टुडे के मुताबिक, अगर ग्रीन शू विकल्प का पूरी तरह से उपयोग किया जाता है, तो IRFC में सरकार की कुल हिस्सेदारी बिक्री 4% तक जा सकती है.
सरकार के पास कितनी है हिस्सेदारी?
1986 में स्थापित IRFC में वर्तमान में सरकार के पास रेलवे मंत्रालय के तहत IRFC में 86.36% हिस्सेदारी है और योजना के तहत ग्रीन शू ऑप्शन का इस्तेमाल करने के बाद ये घटकर 82.36% तक हो सकती है. बीते 31 दिसंबर 2025 तक करीब 51.25 लाख रिटेल निवेशकों के पास कंपनी में 10.57% हिस्सेदारी थी. इसके अलावा LIC के पास 1.10%, जबकि एफपीआई के पास कंपनी में 1 फीसदी से कम हिस्सेदारी थी. शेयर बाजार में इसकी लिस्टिंग 4633 करोड़ रुपये के आईपीओ के बाद नवंबर 2021 में हुई थी.
(नोट- शेयर बाजार में किसी भी तरह के निवेश से पहले अपने मार्केट एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें.)
आजतक बिजनेस डेस्क