बदला नियम... अब भारत में चीन कर सकेगा ये काम, अन्‍य पड़ोसी देशों को भी मौका!

केंद्रीय कैबिनेट ने डायरेक्‍ट विदेशी निवेश को लेकर नियमों में बदलाव किया है, जिससे अब चीन समेत कई पड़ोसी मुल्‍क भारत में अपना निवेश बढ़ा सकते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्‍यक्षता में ये फैसला लिया गया है.

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चीन और पड़ोसी देशों के लिए नियमों में बदलाव. (File photo: ITG) चीन और पड़ोसी देशों के लिए नियमों में बदलाव. (File photo: ITG)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्‍ली,
  • 10 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 8:00 PM IST

भारत सरकार ने चीन समेत सभी पड़ोसी देशों के लिए डायरेक्‍ट विदेशी निवेश (FDI) नियमों में ढील दी है, जिससे निवेश के नए अवसर खुल सकते हैं. यह ऐलान 10 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्‍यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक के बाद की गई. 

बदले गए नियम के अनुसार, इन देशों के शेयरधारकों वाली विदेशी कंपनियों को भारत में अलग-अलग सेक्‍टर्स में निवेश करने के लिए अब सरकार की अनिवार्य मंजूरी की आवश्यकता नहीं होगी. इस बदलाव से प्रभावित होने वाले देशों में चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, भूटान, नेपाल, म्यांमार और अफगानिस्तान शामिल हैं.

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डायरेक्‍ट निवेश (FDI) अप्रूवल प्रक्रिया में बदलाव 
पहले, इन देशों की कंपनियों को भारत में किसी भी प्रकार का निवेश करने के लिए सरकार से पूर्व अनुमति लेनी पड़ती थी. हालांकि, अपडेट गाइडलाइन के साथ, इन प्रतिबंधों को हटा दिया गया है, जिससे सुगम व्यावसायिक लेनदेन और विदेशी निवेश में संभावित बढ़ोतरी का मार्ग तय हुआ है. 

FDI में चीन की सीमित हिस्सेदारी
इस बदलाव के बावजूद, भारत में कुल डायरेक्‍ट विदेशी निवेश (FDI) में चीन का हिस्‍सा अभी भी बहुत कम है. दिसंबर 2025 तक चीन का हिस्सा सिर्फ 0.32 फीसदी है, जो अप्रैल 2000 से अबतक आए 2.51 अरब अमेरिकी डॉलर के डायरेक्‍ट विदेशी निवेश के बराबर है. 

गौरतलब है कि जून 2020 में गलवा घाटी संघर्ष के बाद से चीन के साथ राजनयिक संबंधों में आए तनाव ने भारत में डायरेक्‍ट निवेश पर चीन के प्रभाव को सीमित कर दिया है. तबसे, तनाव बढ़ने के कारण भारत ने टिकटॉक और वीचैट समेत कई चीनी ऐप्‍स पर बैन लगा दिया है. 

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द्विपक्षीय व्यापार में बढ़ोतरी
भारत में डायरेक्‍ट विदेशी निवेश में चीन का योगदान बहुत कम होने के बावजूद, दोनों देशों के बीच व्‍यापार में उल्‍लेखनीय ग्रोथ हुई है. भू-राजनीतिक मुद्दों के बावजूद, चीन भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना हुआ है. साल 2024-25 में, भारत का चीन को निर्यात 14.5% गिरकर 14.25 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया, जो पिछले वर्ष के 16.66 अरब अमेरिकी डॉलर से कम है. 

वहीं, चीन से आयात 11.52% बढ़कर 113.45 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया, जो 2023-24 के 101.73 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है. इसके परिणामस्वरूप व्यापार घाटा बढ़ गया, जो पिछले वर्ष के 85 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2024-25 में 99.2 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया।

वित्त वर्ष 2025-26 की अवधि में, चीन को भारत का निर्यात 38.37% बढ़कर 15.88 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जबकि आयात 13.82% बढ़कर 108.18 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया, जिससे व्यापार घाटा 92.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर पर उच्च बना रहा.

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