Hormuz Tension: होर्मुज को लेकर टेंशन में दुनिया... भारत पर संकट नहीं, प्लान-B करेगा काम!

Hormuz Strait Tension: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध का सीधा असर क्रूड की कीमतों पर दिख रहा है. इस बीच होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से दुनिया की टेंशन बढ़ गई है, लेकिन भारत का प्लान-बी घरेलू डिमांड को सुचारू रखने में कामयाब होता दिख रहा है.

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होर्मुज में रुकावट से क्रूड की सप्लाई को लेकर बढ़ी दुनिया की टेंशन. (Photo: Reuters) होर्मुज में रुकावट से क्रूड की सप्लाई को लेकर बढ़ी दुनिया की टेंशन. (Photo: Reuters)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 02 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 6:53 AM IST

अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान के युद्ध (US-Israel Iran War) का सबसे बड़ा असर क्रूड ऑयल (Crude Oil) पर पड़ता नजर आ रहा है. इसकी बड़ी वजह ये है कि संघर्ष के बीच हॉर्मुज स्ट्रेट बंद हो गया है और इससे दुनिया के तमाम देशों में ऑयल सप्लाई में रुकावट आ सकती है. इसे लेकर दुनिया टेंशन में है, लेकिन भारत के लिहाज से देखें, तो तत्काल किसी भी तरह का कोई संकट नजर नहीं आ रहा है. ग्लोबल टेंशन के बीच भी अधिकारियों का कहना है कि Hormuz Strait लंबे समय के लिए बंद होने की स्थिति में भी भारत अपनी घरेलू डिमांड को पूरा करने के लिए वैकल्पिक बाजारों की अपनी क्षमता बरकरार रखे हुए है. 

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सरकार का Plan-B आएगा काम
बीते कुछ समय में ट्रंप टैरिफ टेंशन हो, या फिर तमाम संघर्ष, जिनके चलते अक्सर विशेष रूप से होर्मुज स्ट्रेट बंद होने का खतरा बढ़ा है. लेकिन, इन हालातों में मोदी सरकार ने घरेलू आपूर्ति को सुचारु रखने के लिए निर्यात डेस्टिनेशंस बढ़ाने का काम किया और सरकार का प्लान बी माना जाने वाला ये विविधीकरण वर्तमान में उपजे तेल संकट में कारगर साबित होता दिख रहा है.

सप्लाई चेन में विविधिकरण की वजह से भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने और Hormuz Strait में रुकावट के बावजूद भारत के लिए तत्काल ऊर्जा आपूर्ति संकट की कोई आशंका नहीं दिख रही है. 

दुनिया में चिंता, लेकिन भारत की तैयारी पक्की
बिजनेस टुडे पर छपी रिपोर्ट में सरकारी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि भारत के पास फिलहाल शॉर्ट टर्म व्यवधानों से निपटने के लिए पर्याप्त बफर भंडार मौजूद हैं. ये स्ट्रेटिजिक रिजर्व एलपीजी (LPG) और एलएनजी (LNG) की मांग को लगभग 15 दिनों तक पूरा कर सकते हैं, जबकि कच्चे तेल के भंडार (Crude Oil Reserve), इसकी सप्लाई में किसी भी व्यवधान की स्थिति में 45 दिनों तक चलने का अनुमान है. भारत की तैयारी ऐसे समय में काम आएगी, जबकि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंताएं बढ़ रही हैं.

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Crude Oil की कीमतों पर असर 
भारत के लिए हालांकि शॉर्ट टर्म में आपूर्ति में व्यवधान की संभावना कम दिखती है, लेकिन एनर्जी मार्केट्स ने US-Israel Iran War से भू-राजनीतिक अनिश्चितता पर प्रतिक्रियाएं देना शुरू कर दिया है. ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़कर लगभग 73 डॉलर प्रति बैरल के 7 महीने के हाई पर पहुंच चुकी हैं. महंगाई और भारत के चालू खाता संतुलन पर इसके संभावित प्रभाव के लिए कीमतों में इस वृद्धि पर बारीकी से नजर रखी जा रही है. वहीं भारत की रणनीतिक भंडारों का उपयोग करने और सोर्सिंग रूट को पुनर्व्यवस्थित करने की क्षमता अस्थिरता के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच प्रदान देने वाली है. 

क्यों खास है Hormuz Strait? 
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल रूट्स में एक है, जिससे ग्लोबल ऑयल का लगभग 20% और एलएनजी शिपमेंट का भी लगभग उतना ही हिस्सा गुजरता है. इसलिए, इस क्षेत्र में लंबे समय तक किसी भी प्रकार की बाधा वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर व्यापक प्रभाव डाल सकती है.

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