Global Economy Crisis: 'बेहद नाजुक हालात... ' IMF ने क्‍यों जताया बड़े संकट का खतरा?

ग्‍लोबल मीटिंग से पहले ही आईएमएफ की बड़ी चेतावनी आई है. आईएमएफ का कहना है कि दुनिया की अर्थव्‍यवस्‍था बेहद नाजुक स्थिति में प्रवेश कर रही है. इस चेतावनी के साथ तीन बड़े कारणों के बारे में भी बताया है.

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आईएमएफ की बड़ी चेतावनी. (Photo: AP) आईएमएफ की बड़ी चेतावनी. (Photo: AP)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्‍ली,
  • 10 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 11:40 AM IST

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने दुनिया के लिए बड़ी चेतावनी दी है और कहा है कि आने वाला समय काफी चुनौतियों भरा होगा. आगामी IMF विश्‍व बैंक की बसंतकालीन बैठकों से पहले आईएमएफ की हेड  क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने चेतावनी दी कि ग्‍लोबल इकोनॉमी बेहद नाजुक दौर से गुजर रही है. बहुत पॉजिटिव और आशावादी होने पर भी यह इसमें गिरावट की संभावनाएं दिख रही हैं. 

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अपने बयानों में जॉर्जीवा ने कहा कि विश्‍व की अर्थव्‍यवस्‍था, जो टेक्‍नोलॉजी और फाइेंशियल कंडीशन के कारण काफी मजबूती से चल रही थी, अब मिडिल ईस्‍ट तनाव के कारण नए संकट से जूझ रही है. उन्‍होंने कहा कि हमारे सबसे आशावादी नजरिए में भी, हमें रेटिंग में गिरावट का सामना करना पड़ेगा. 

उन्‍होंने कहा कि होर्मुज रास्‍ते में बाधा आने, आपूर्ति प्रभावित होने और कमजोर विश्‍वास से होने वाला नुकसान पहले से हमारे नजरिए में शामिल है. इस रुकावट का मुख्‍य कारण एनर्जी सेक्‍टर में आया बड़ा संकट है. उन्‍होंने कहा कि तेल और गैस की सप्‍लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे कीमतें बढ़ गई हैं और आपूर्ति  पर दबाव बढ़ गया है. 

भुखमरी की ओर धकेल रहा ये जंग
जंग छिड़ने के तुरंत बाद ब्रेंट कच्‍चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया. हालांकि अपने रिकॉर्ड हाई से ये कुछ हद तक कम हुए हैं, फिर भी ये इतनी ज्‍यादा बनी हुई हैं कि अलग-अलग अर्थव्‍यवस्‍थाओं में महंगाई का दबाव बना हुआ है. इसका असर सभी सेक्‍टर में दिखाई दे रहा है. डीजल और जेट ईंधन जैसे रिफाइनरियां ईंधनों की कमी से परिवहन और व्यापार प्रभावित हो रहा है, जबकि उर्वरक और रसद की बढ़ती लागत वैश्विक खाद्य असुरक्षा को और भी बदतर बना रही है. IMF का अनुमान है कि लाखों और लोग भुखमरी की ओर धकेले जा रहे हैं, जिससे पहले से ही नाजुक वैश्विक स्थिति और भी बिगड़ रही है.

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इन तीन वजहों से फैल रहा संकट
जॉर्जीवा ने उन तीन चीजों के बारे में बताया, जिससे यह आर्थिक संकट फैल रहा है. इसमें उच्च इनपुट लागत और आपूर्ति की कमी, बढ़ती मुद्रास्फीति की आशंकाएं और वित्तीय स्थितियों में सख्ती शामिल है. हालांकि लॉन्‍गटर्म महंगाई दर की आशंकाएं फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं, उन्होंने चेतावनी दी कि केंद्रीय बैंकों को ज्‍यादा लंबे समय के लिए स्थिति को संभालने पर फोकस रखना चाहिए. 

उन्‍होंने कहा कि तेल आयात करने वाली अर्थव्यवस्थाओं, विशेष रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में, सबसे ज्‍यादा दबाव का सामना करने की उम्मीद है, जबकि ऊर्जा निर्यातक भी व्यापक वैश्विक प्रभावों के प्रति संवेदनशील बने रहेंगे. नीति निर्माताओं के वाशिंगटन में बैठक की तैयारी के बीच, जॉर्जीवा ने अनुशासन के साथ फैसला लेने पर जोर दिया. 

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