मिडिल ईस्ट में युद्ध (Middle East War) तेज होने और होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट (Hormuz Strait Close) के चलते जहां तेल-गैस संकट गहरा गया है, तो इसका दूसरे सेक्टर्स पर भी बुरा असर पड़ने लगा है. एलपीजी क्राइसिस (LPG Crisis) के साथ अब एलएनजी की ग्लोबल सप्लाई बाधित होने से भारत में यूरिया की किल्लत नजर आने लगी है. रिपोर्ट्स की मानें तो Hormuz Tension के चलते देश के यूरिया प्लांट्स में प्रोडक्शन में लगभग 50% की कटौती की गई है.
यूरिया का प्रोडक्टशन आधा घटा
पीटीआई की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि होर्मुज स्ट्रेट के माध्यम से एलएनजी आपूर्ति में रुकावट आई है और इसके कारण ईंधन की उपलब्धता कम होने से भारत के यूरिया प्लांटों ने अपने उत्पादन में लगभग आधी कटौती कर दी है. Hormuz से माल ढुलाई बाधित हुई है, जिससे सप्लायर्स ने फोर्स मेज्योर का हवाला दिया और इसके चलते पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड को भी अपने रिसीविंग टर्मिनल पर ऐसा ही कदम उठाना पड़ा है.
इसका सीधा और तेज असर सप्लाई चेन पर देखने को मिला. GAIL India लिमिटेड, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने रासगैस कॉन्ट्रैक्ट के तहत संचालित फर्टिलाइजर्स यूनिट्स को गैस की सप्लाई कम कर दी.
कम उत्पादन और तगड़ा घाटा
इस बिजनेस सेक्टर से जुड़े एक सीनियर अधिकारी ने बताया है कि गैस की सप्लाई सामान्य स्तर के करीब 60-65 फीसदी तक कम कर दी गई है. ईंधन की आपूर्ति कम होने के कारण प्लांटों ने यूरिया उत्पादन में भी लगभग 50 फीसदी की कटौती की है. यही नहीं वे कम प्रोडक्शन के लिए अधिक एनर्जी का इस्तेमाल कर रहे हैं.
एक प्लांट मैनेजर ने कहा कि इन परिस्थितियों में काम करने का मतलब है कि आप कम यूरिया उत्पादन के लिए अधिक ऊर्जा खर्च कर रहे हैं और यह सीधा फाइनेंशियल नुकसान हो रहा है. उद्योग जगत के एक्सपर्ट का कहना है कि अचानक लोड परिवर्तन बड़े पैमाने पर चलने वाले अमोनिया-यूरिया संयंत्रों के लिए संभव नहीं हैं. इनसे उपकरण खराब होने, प्लांट ठप होने और सबसे महत्वपूर्ण परिचालन से जुड़े कर्मियों की सुरक्षा को खतरा रहता है.
भारत के पार कितना यूरिया रिजर्व?
भारत दुनिया के सबसे बड़े यूरिया उपभोक्ताओं में से एक है और लंबे समय तक इस तरह का व्यवधान रहने से खरीफ की बुवाई के मौसम से पहले यूरिया की देश में आपूर्ति प्रभावित हो सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक, 19 मार्च 2026 तक देश के पास 61.14 लाख टन यूरिया का भंडार मौजूद था, जबकि एक साल पहले यह 55.22 लाख टन था. ऐसे में ये आंकड़ा फिलहाल कुछ हद तक राहत देने वाला है.
आजतक बिजनेस डेस्क