भारत के एक बैंक का कंट्रोल अब दुबई के एक बैंक के हाथों में जा रहा है. वित्त मंत्रालय ने भी इस बैंक में मैज्योरिटी स्टेक हासिल करने की मंजूरी दे दी है. भारत सरकार ने दुबई स्थित एमिरेट्स NBD को आरबीएल बैंक में नियंत्रक हिस्सेदारी हासिल करने के लिए एक महत्वपूर्ण नियामक मंजूरी दी है, जो भारत के फाइनेंशियल सर्विस सेक्टर के इतिहास में सबसे बड़ा डायरेक्ट फॉरेन इन्वेस्टमेंट (FDI) है.
15 मई, 2026 को स्टॉक एक्सचेंज को दी गई एक अधिसूचना में, आरबीएल बैंक ने कहा कि वित्त मंत्रालय ने बैंक की कुल चुकता इक्विटी शेयर पूंजी के 49% और 74% के बीच हिस्सेदारी रखने के निवेशक के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है.
यह डील करीब 3 अरब डॉलर (26,850 करोड़ रुपये) में होने जा रही है. इस सौदे की शुरुआत सबसे पहले 18 अक्टूबर, 2025 को एक निवेश समझौते के माध्यम से हुई थी. इस ट्रांजेक्शन के तहत एमिरेट्स एनबीडी को बोर्ड पर कंट्रोल और भारत के तेजी से बढ़ते प्राइवेट बैंकिंग क्षेत्र में एक रणनीतिक मजबूत स्थिति प्राप्त हो सकती है.
इस डील की खास बातें
भारत में एनबीडी की आरबीएल में होगा मर्जर
इस डील के तहत भारत में एमिरेट्स एनबीडी की मौजूदा ब्रांचेज का आरबीएल बैंक में प्रस्तावित विलय होगा, जिससे एक यूनिफाइड और अधिक मजबूत बैलेंस शीट तैयार होगी. साल 2025 के अंत तक, आरबीएल बैंक 564 शाखाओं के नेटवर्क का संचालन कर रहा था और 1.5 करोड़ से अधिक ग्राहकों को सेवा प्रदान कर रहा था. 3 अरब डॉलर के इस पूंजी निवेश से बैंक के टियर-1 पूंजी अनुपात में अच्छी ग्रोथ होने और डिजिटल, कॉर्पोरेट लोन और फंड मैनेजमेंट सर्विस के विस्तार के लिए आवश्यक लॉन्गटर्म डेवलपमेंट कैपिटल उपलब्ध होने की उम्मीद है.
अब आरबीआई के मंजूरी का इंतजार
वित्त मंत्रालय की मंजूरी एक महत्वपूर्ण बाधा रही है, लेकिन अब मंजूरी मिल गई है और यह लेनदेन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से अंतिम मंजूरी और सामान्य समापन शर्तों के पूरा होने पर निर्भर है. आरबीएल बैंक के शेयरधारकों ने पहले ही इस कदम के लिए भारी समर्थन जताया था, नवंबर 2025 में हुई एक असाधारण आम बैठक में 99.9% ने विलय के पक्ष में और 98.8% ने तरजीही इश्यू को मंजूरी दी थी.
आजतक बिजनेस डेस्क