अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल़्ड ट्रंप पाकिस्तान के फाइनेंस में लगातार घुसपैठ कर रहे हैं. पाकिस्तान ने हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की फैमिली से जुड़ी क्रिप्टो कंपनी के साथ एक बिजनेस डील साइन किया है. पाकिस्तान के अनुसार इसका उद्देश्य क्रॉस बॉर्डर पेमेंट को आसान बनाना है. इस डील पर 14 जनवरी को हस्ताक्षर किया गया. इस डील की अहमियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस पर साइन करने के दौरान प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर भी मौजूद थे.
वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल (WTF) अमेरिका की एक कंपनी है. ये कंपनी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के परिवार का मेन क्रिप्टो बिजनेस चलाती है. इसी कंपनी की सहयोगी SC फाइनेंशियल टेक्नॉलजीज के साथ पाकिस्तान सरकार की कंपनी पाकिस्तान वर्चुअल एसेट रेगुलटेरी अथॉरिटी के साथ एक मेमोरैंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) साइन किया है.
इस डील के बारे में डॉन ने रिपोर्ट करते हुए कहा है कि यह घोषणा वर्ल्ड लिबर्टी (WTF) जो सितंबर 2024 में लॉन्च हुआ एक क्रिप्टो-बेस्ड फाइनेंस प्लेटफॉर्म है और एक संप्रभु देश के बीच पहला सार्वजनिक रूप से घोषित समझौता है.
दोनों देशों के बीच ये समझौता तब हुआ है जब अमेरिका और पाकिस्तान के संबंधों में सुधार हो रहे हैं.
ट्रंप की फैमिली कंपनी अमेरिका में क्या करेगी?
इस एग्रीमेंट के तहत SC फाइनेंशियल टेक्नोलॉजीज पाकिस्तान के सेंट्रल बैंक के साथ मिलकर अपने USD1 स्टेबलकॉइन को एक रेगुलेटेड डिजिटल पेमेंट स्ट्रक्चर में शामिल करेगी. जिससे यह टोकन पाकिस्तान के अपने डिजिटल करेंसी इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ काम कर सकेगा.
अब समझिए की WTF करती क्या है और USD1 स्टेबलकॉइन है क्या?
वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल (WLF) ट्रंप फैमिली का मुख्य क्रिप्टो बिजनेस है. यह एक डिसेंट्रलाइज्ड फाइनेंशियल प्लेटफॉर्म है जो स्टेबलकॉइन्स और अन्य डिजिटल एसेट्स पर काम करता है.
अब सवाल उठता है कि USD1 स्टेबलकॉइन्स क्या है?
सबसे पहले ये समझें कि स्टेबलकॉइन्स एक तरह की क्रिप्टो करेंसी है, जिसकी वैल्यू स्थिर रहती है. USD1 एक डॉलर-लिंक्ड स्टेबलकॉइन है, जो अमेरिकी डॉलर के वैल्यू से जुड़ा होता है. इसका मतलब है कि यह क्रिप्टो करेंसी की तरह वोलेटाइल नहीं है और पारंपरिक करेंसी की तरह स्टेबल रहता है, यह क्रॉस-बॉर्डर ट्रांजेक्शन्स के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, जहां ट्रेडिशनल बैंकिंग सिस्टम से कम फीस और तेज स्पीड मिलती है.
हाल के सालों में स्टेबलकॉइन्स की वैल्यू में ज़बरदस्त बढ़ोतरी हुई है. ट्रंप के समय में यूनाइटेड स्टेट्स ने ऐसे नियम पेश किए हैं जिन्हें आम तौर पर इस सेक्टर के लिए फायदेमंद माना जाता है, निश्चित रूप से ये हितों का टकराव है. एक तरफ ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति हैं और दूसरी ओर वे ऐसे कानून बना रहे हैं जिससे उनकी कंपनी को फायदा पहुंच रहा है. ट्रंप की कोशिशों के बाद दुनिया भर के देश पेमेंट और फाइनेंशियल सिस्टम में स्टेबलकॉइन्स की संभावित भूमिका पर विचार करना शुरू कर रहा है.
ट्रंप का पाकिस्तान जैसे फटेहाल देश में क्यों रुचि है?
पाकिस्तान की इकोनॉमी भले ही वर्ल्ड बैंक के बेलआउट पर आधारित हो, लेकिन दुनिया भर में फैले पाकिस्तानी करोड़ों डॉलर हर साल पाकिस्तान भेजते हैं. पाकिस्तान दुनिया के उन देशों में शामिल है जो सबसे ज्यादा पैसा रिसीव करता है. 2025 में पाकिस्तान ने 30 मिलियन डॉलर से ज्यादा पैसा रिसीव किया.
विशेषज्ञों का कहना है कि स्टेबलकॉइन्स से ये ट्रांसफर्स सस्ते और तेज हो सकते हैं.
पाकिस्तान में ट्रंप के रुचि लेने की एक वजह यह भी है. इससे WLF को ग्लोबल मार्केट में एक्सपैंड करने का मौका मिलेगा और ट्रंप फैमिली को कमाई बढ़ाने का जरिया.
बता दें कि पाकिस्तान ने मार्च 2025 में पाकिस्तान क्रिप्टो काउंसिल (PCC) की लॉन्चिंग की है. इसकी लॉन्चिंग में ट्रंप की सपोर्ट अहम रही. वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब की अध्यक्षता में गठित PCC का मकसद नीतियां बनाना, इनोवेशन को बढ़ावा देना और पाकिस्तान में क्रिप्टो को अपनाने के लिए एक सुरक्षित और दूरदर्शी तरीका सुनिश्चित करना है.
पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय का दावा है कि मुल्क में 40 मिलियन से ज़्यादा क्रिप्टो यूज़र्स हैं, और सालाना क्रिप्टो ट्रेडिंग वॉल्यूम 300 बिलियन अमेरिकी डॉलर से ज़्यादा होने का अनुमान है.
क्रिप्टो डिप्लोमेसी
ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन में US-पाकिस्तान संबंध बेहतर हो रहे हैं, और यह डील उसका हिस्सा है. पाकिस्तान ने क्रिप्टो इकोसिस्टम को इस्तेमाल करके ट्रंप से फेवर हासिल किया है. ट्रंप जैसे दबंग और शक्तिशाली ब्रांड का इस्तेमाल कर पाकिस्तान खुद को 'ग्लोबल इनोवेशन हब' के रूप में रीब्रैंड करने की कोशिश रहा है, यह ट्रंप की क्रिप्टो-पुश पॉलिसी से मैच करता है.
मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग का तरीका
कुछ एक्सपर्ट्स और X यूजर्स का कहना है कि इससे पाकिस्तानी रुपये पर असर पड़ सकता है, कैपिटल फ्लो को ट्रैक करना मुश्किल हो सकता है, या यह मनी लॉन्ड्रिंग का रास्ता खोल सकता है. अहम बात यह है कि इसमें FATF का दखल नहीं है. इससे मनी लॉन्ड्रिंग का रास्ता खुल सकता है.
पाकिस्तान में जहां भ्रष्टाचार और टेरर फाइनेंसिंग आम है वहां ये डील खतरों के कई दरवाजे को खोलता है.
पाकिस्तान के एक यूजर ने लिखा है कि पाकिस्तान की मिलिट्री सरकार ने ट्रम्प-विटकॉफ परिवार द्वारा चलाई जा रही वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल के साथ क्रिप्टो पेमेंट और ट्रांसफर को बढ़ाने के लिए एक MoU साइन किया, ताकि FATF की दखल के बिना पाकिस्तान में पैसे का लेन-देन किया जा सके.
WLF से मोटा कमा रही है ट्रंप फैमिली
जब WLFI टोकन बेचता है, तो ट्रंप परिवार को नेट कमाई का 75% हिस्सा मिलता है, साथ ही स्टेबलकॉइन मुनाफे में भी हिस्सा मिलता है. दिसंबर 2025 तक ट्रंप परिवार ने इस कमाई से $1 बिलियन का मुनाफ़ा कमाया था जबकि उनके पास $3 बिलियन के बिना बिके टोकन थे.
इस मेमोरेंडम की घोषणा अमेरिकी स्पेशल एनवॉय स्टीव विटकॉफ के बेटे और वर्ल्ड लिबर्टी के को-फाउंडर और चीफ एग्जीक्यूटिव ज़ैक विटकॉफ के पाकिस्तान दौरे के दौरान हुई है. ज़ैक विटकॉफ SC फाइनेंशियल टेक्नोलॉजीज के CEO भी हैं.
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