DGCA ने बदला नियम... फ्लाइट टिकट कैंसिल पर मिलेगा पूरा पैसा, लेकिन होगी ये शर्त!

फ्लाइट टिकट को लेकर नया नियम जारी किया गया है. डीजीसीए ने अपने गाइडलाइन में कहा है कि अगर टिकट बुक करने के 48 घंटे के भीतर टिकट को कैंसिल या बदलाव किया जाता है तो टिकट का पूरा पैसा वापस किया जाएगा.

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डीजीसीए का फ्लाइट टिकट को लेकर नया नियम. (Photo: File/ITG) डीजीसीए का फ्लाइट टिकट को लेकर नया नियम. (Photo: File/ITG)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्‍ली,
  • 26 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:31 PM IST

एयर यात्रियों को बड़ी राहत देते हुए विमानन नियामक नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने टिकट रिफंड के नियम में बदलाव किया है. अब हवाई यात्रियों को 48 घंटे के भीतर बिना किसी जुर्माने के टिकट रद्द करने और उसमें बदलाव करने की सुविधा होगी. 

 24 फरवरी को जारी किए गए संशोधित नागरिक उड्डयन नियम (CAR) का उद्देश्य विलंबित वापसी को लेकर बढ़ती शिकायतों के मद्देनजर एयरलाइन नीतियों को अधिक पारदर्शी और यात्रियों को राहत देना है. DGCA ने कहा कि नए नियम के तहत एयरलाइंस को बुकिंग के समय से 48 घंटे का समय देना होगा, जिसके तहत यात्री बिना किसी अतिरिक्त शुल्‍क के अपने टिकट कैंसिल या संशोधन कर सकते हैं. हालांकि, यदि कोई यात्री किसी अन्य उड़ान में यात्रा करना चाहता है, तो किराए का मौजूदा अंतर लागू होगा.   

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हालांकि, इस सुविधा के साथ कुछ शर्तें भी जुड़ी हैं. घरेलू उड़ानों के लिए निर्धारित प्रस्थान तिथि से सात दिन के भीतर या अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए 15 दिन के भीतर होने पर, एयरलाइन की वेबसाइटों से सीधे बुक किए गए टिकटों पर 48 घंटे की छूट लागू नहीं होगी. 48 घंटे की समय सीमा समाप्त होने के बाद, एयरलाइन के सामान्य कैंसिलेशन और संशोधन शुल्क लागू होंगे.

अतिरिक्त शुल्क वसूलना
अन्‍य खास बदलावों में DGCA ने एयरलाइंस को यात्री के नाम में सुधार के लिए अतिरिक्त शुल्क लेने से रोक दिया है. बशर्ते गलत बुकिंग के 24 घंटों के भीतर सूचित की जाए और टिकट सीधे एयरलाइन की वेबसाइट से खरीदा गया हो. इस कदम से यात्रियों द्वारा नाम में मामूली गलतियों के कारण लगने वाले अतिरिक्त शुल्कों की लगातार शिकायतों का समाधान होने की उम्मीद है.

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इसके अलावा,  नियामक ने उन मामलों में जवाबदेही स्पष्ट कर दी है जहां टिकट ट्रैवल एजेंटों या ऑनलाइन पोर्टलों के माध्यम से बुक किए जाते हैं. भले ही बुकिंग थर्ड-पार्टी प्लेटफॉर्म के माध्यम से की गई हो, एयरलाइंस रिफंड की प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार रहेंगी, क्योंकि एजेंट उनके रजिस्‍टर्ड प्रतिनिधि के रूप में काम करते हैं.एयरलाइंस को 14 वर्क डे के भीतर रिफंड प्रॉसेस पूरा करने के लिए कहा गया है. 

संशोधित मानदंड
संशोधित नियमों में मेडिकल इमरजेंसी के कारण रद्द होने के संबंध में भी स्पष्टता दी गई है. अगर यात्रा अवधि के दौरान यात्री या उसी PNR में लिस्‍टेड फैमिली के किसी सदस्य को अस्पताल में भर्ती कराया जाता है, तो एयरलाइन या तो पूरा पैसा वापसी की पेशकश कर सकती है या भविष्य की यात्रा के लिए क्रेडिट जारी कर सकती है. अन्य मेडिकल मामलों में, एयरलाइन द्वारा नियुक्त या DGCA द्वारा सूचीबद्ध एयरोस्पेस मेडिसिन विशेषज्ञ द्वारा फिटनेस मूल्यांकन के बाद धनवापसी की प्रक्रिया की जाएगी. 

गौरतलब है कि रिफंड में देरी से संबंधित बढ़ती शिकायतों के मद्देनजर ये बदलाव किए गए हैं. दिसंबर 2025 में इंडिगो से जुड़ी उड़ान व्यवधानों के दौरान यह मुद्दा प्रमुखता से सामने आया, जिसके बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयरलाइन को लंबित रिफंड दावों को शीघ्रता से निपटाने का निर्देश दिया.

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डीजीसीए के आंकड़ों से पता चलता है कि दिसंबर 2025 में ही अनुसूचित एयरलाइनों को यात्रियों से संबंधित 29,212 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 7.5% शिकायतें रिफंड से संबंधित थीं. इसी महीने के दौरान, घरेलू एयरलाइनों ने 1.43 करोड़ से अधिक यात्रियों को परिवहन सेवाएं प्रदान कीं.

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