अक्सर देखा जाता है कि जो देश युद्ध में होता है, उसे भारी नुकसान होता है. लेकिन मौजूदा समय जो युद्ध चल रहा है, और इस युद्ध के केंद्र में अमेरिका है. अमेरिका इजरायल की तरफ से ईरान पर हमले कर रहा है.
युद्ध कब खत्म होगा? इसपर सभी का ध्यान है. लेकिन इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) का एक बयान चर्चा में है. उन्होंने कहा कि युद्ध की वजह से कच्चे तेल का सप्लाई चेन टूटा है, जिससे कीमतों में बढ़ी उछाल आई है. खुद ट्रंप मान रहे हैं कि कच्चे तेल के भाव बढ़ने से अमेरिका को आर्थिक फायदा भी हो सकता है.
दरअसल, युद्ध और तनाव की वजह से वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और फिलहाल ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है. जिसकी कीमत आज से करीब एक महीने पहले 75 डॉलर प्रति बैरल थी.
ट्रंप का कबूलनामा
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक है, इसलिए जब तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो देश को ज्यादा कमाई होती है. उन्होंने लिखा, 'जब तेल महंगा होता है तो हम बहुत पैसा कमाते हैं.' हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उनकी प्राथमिकता ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है. उनका मकसद पैसा कमाना है, विश्व शांति के लिए वे ईरान पर दबाव बना रहे हैं.
युद्ध के दौरान सप्लाई में बाधा और जहाजों की आवाजाही पर खतरे की वजह से तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ जाती है, जिससे कीमतें ऊपर जाती हैं, और फिर अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों को लाभ मिलता है.
इस युद्ध का असर केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है. तेल की कीमतें बढ़ने से दुनिया भर में पेट्रोल और डीजल महंगे हो रहे हैं. हालांकि अमेरिका में भी गैसोलीन की कीमतों में तेजी आई है और यह औसतन करीब 3.6 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है. इससे आम लोगों पर खर्च का दबाव बढ़ा है.
अपने बयान पर घिरे ट्रंप
ट्रंप के इस बयान की अमेरिकी राजनीति में भी आलोचना हो रही है. कुछ विपक्षी नेताओं का कहना है कि बढ़ती तेल कीमतों से आम लोगों पर बोझ बढ़ता है और महंगाई भी बढ़ती है. उनके मुताबिक युद्ध और तेल बाजार की उथल-पुथल से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ सकता है.
इस बीच विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल-ईस्ट में तनाव लंबे समय तक जारी रहा तो तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं. इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा, खासकर उन देशों पर जो बड़ी मात्रा में तेल आयात करते हैं.
ये सच भी है कि जब तेल महंगा होता है और इससे कुछ हद तक अमेरिका को फायदा मिलता है. क्योंकि फिलहाल अब Strait of Hormuz पर बंद है, दुनिया के करीब 20% तेल की सप्लाई जिस रास्ते से गुजरती है, तो फिर तेल की कीमतें बढ़नी तय है.
भारत समेत कई देशों के लिए संकट
फिर अमेरिका ज्यादा दाम पर तेल बेच सकता है. जिससे अमेरिकी एनर्जी कंपनियों को फायदा होने वाला है.
यूरोप और अन्य देशों को अमेरिकी तेल-गैस खरीदनी पड़ती है. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक है, ऐसे हालात में ज्यादा फायदा भी अमेरिका को ही होने वाला है.
लेकिन ट्रंप कह रहे हैं कि उनका मकसद सुरक्षा और शांति है, तेल से होने वाला फायदा छोटी बात है. लेकिन भारत जैसे देशों के लिए भारी संकट है, क्योंकि भारत करीब 85% तेल आयात करता है, और पिछले 15 दिन में कच्चे तेल की कीमत 30 फीसदी से ज्यादा बढ़ चुकी है. इसलिए तेल महंगा होने से महंगाई और आयात बिल दोनों बढ़ते हैं.
इस बीच तमाम एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि युद्ध से अमेरिका को फायदा होगा, ये बातें ट्रंप पहले से जानते हैं, क्योंकि मिडिल ईस्ट में तनाव से तेल सप्लाई पर असर पड़ेगा, और फिर अमेरिका उच्चे भाव पर अपना तेल बेचेगा, ये सभी को पहले ही अनुमान था. लेकिन अब खुद ट्रंप अमेरिकी फायदे की बात स्वीकार कर रहे हैं.
आजतक बिजनेस डेस्क