हैदराबाद के आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) ने एक खास फैसले में आयकर अधिनियम की धारा 54F के तहत एक टैक्सपेयर को बड़ी राहत दी है. अब उसे 2.80 करोड़ रुपये की टैक्सेबल इनकम नहीं देनी पड़ेगी. (Photo: Pexel)
आइए जानते क्या आप ले सकते हैं ये लाभ और आयकर अधिनियम की धारा 54F क्या है, जिसके तहत इतनी बड़ी टैक्स छूट मिल सकती है? हालांकि, पहले इससे जुड़ा मामला समझ लेते हैं कि आखिर किस मामले के तहत इतनी बड़ी टैक्स छूट दी गई है. दरअसल, ये मामला एक NRI से जुड़ा हुआ है, जो ब्रिटेन में रहता है. (Photo: Pexel)
2.80 करोड़ पर 0 टैक्स: टैक्स सलाहकार प्लेटफॉर्म टैक्स बडी के अनुसार, ब्रिटेन में रहने वाले टैक्सपेयर रेवंत ने वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान पांच विला 5.26 करोड़ रुपये में बेचे. अधिग्रहण की लागत को ध्यान में रखते हुए, उन्होंने 3.41 करोड़ रुपये का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) दिखाया. इसके मुकाबले, उन्होंने धारा 54F के तहत 2.80 करोड़ रुपये की टैक्स छूट का दावा किया, जिसमें उन्होंने एक नई आवासीय संपत्ति में निवेश का दिखाया था. (Photo: Pexel)
क्या था पूरा विवाद: हालांकि, विवाद इसलिए पैदा हुआ, क्योंकि एक्वा स्पेस डेवलपर्स से खरीदी गई नई प्रॉपर्टी 10 अप्रैल, 2023 को उनकी बहन श्रेया के नाम पर रजिस्ट्रर्ड की गई थी.अधिकारी ने धारा 54F के तहत किए गए पूरे दावे को सख्त कानून के आधार पर खारिज कर दिया. जिसका तर्क था कि मकान रेवंत के नाम पर रजिस्टर्ड नहीं था. इसलिए, उन्हें कानूनी मालिक नहीं माना जा सकता था. धारा 54F के तहत दी गई छूट पूरी तरह से अस्वीकार कर दी गई. (Photo: Pexel)
रेवंत ने क्या दिया तर्क? : टैक्सपेयर के 3.41 करोड़ रुपये के पूरे LTCG को टैक्स के लायक समझा गया. रेवंत ने तर्क दिया कि प्रॉपर्टी का रजिस्ट्रेशन उनकी बहन के नाम पर केवल लॉजिस्टिकल संबधी समस्याओं के कारण किया गया था, क्योंकि वह विदेश में रह रहे थे और रजिस्ट्रेशन के समय भारत आने में असमर्थ थे. (Photo: Pixabay)
इसके बाद उन्होंने यह साबित करने के लिए कई दस्तावेज दिए. इसमें बिल्डर द्वारा जारी आवंटन पत्र उनके नाम पर था. 65 लाख रुपये की बुकिंग एडवांस अमाउंट सीधे उनके बैंक खाते से जमा की गई थी. 4.31 करोड़ रुपये की कुल खरीद अमाउंट उनके पिता के साथ संयुक्त बैंक खाते के माध्यम से भुगतान की गई थी. उनकी बहन ने लिखित पुष्टि दी कि वह संपत्ति की वास्तविक मालिक नहीं हैं. (Photo: Pixabay)
कोर्ट ने सुनाया खास फैसला: इन सभी दस्तावेजों के पेश करने के बाद हैदराबाद के आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) ने माना कि न्यायिक मिसालें आम तौर पर धारा 54एफ के तहत आती हैं, जब संपत्तियां पति या पत्नी या अविवाहित बच्चों के नाम पर खरीदी जाती हैं. इसके बाद रेवंत के हक में फैसला आया है और उनका 2.80 करोड़ टैक्सेबल इनकम शून्य हो गया. (Photo: Pixabay)
धारा 54एफ क्या है?
आयकर अधिनियम की धारा 54F के तहत व्यक्ति और अविभाजित परिवार (HUF) गैर-आवासीय संपत्तियों जैसे शेयर या सोना की बिक्री से मिले लॉन्गटर्म कैपिटल गेन पर छूट का दावा कर सकते हैं, बशर्ते बिक्री से मिला नेट अमाउंट को भारत में किसी एक आवासीय संपत्ति में फिर से निवेश किया जाए. निवेश तय समय सीमा के भीतर किया जाना चाहिए. खरीद बिक्री से एक साल पहले या दो वर्ष बाद, या निर्माण तीन वर्ष के भीतर होना चाहिए. छूट की अधिकतम सीमा ₹10 करोड़ है. (Photo: Representative/ITG)