Budget 2026: आर्थिक विकास पर फोकस लेकिन बजट पेश होते ही गिरा शेयर मार्केट... जानें एक्सपर्ट ओपिनियन

बजट 2026-27 पेश होने के बाद शेयर बाजार में तेज गिरावट दर्ज की गई. प्रमोटर्स पर अतिरिक्त टैक्स और फ्यूचर्स ट्रेडिंग पर बढ़े टैक्स से निवेशकों की चिंता बढ़ी, जिससे निफ्टी सहित बाजार दबाव में आ गया.

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बजट पेश होने के बाद सिल्वर-गोल्ड क़ीमतों में भारी गिरावट (Photo: Pexels) बजट पेश होने के बाद सिल्वर-गोल्ड क़ीमतों में भारी गिरावट (Photo: Pexels)

मोहम्मद साक़िब मज़ीद

  • नई दिल्ली,
  • 01 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:07 PM IST

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में 2026-27 के लिए बजट पेश किया. बजट पेश किए जाने के बाद, शेयर बाजार में भारी गिरावट हुई है. सबसे बड़ी गिरावट मार्केट के निफ्टी में आई है. प्रमोटर्स को एडिशनल टैक्स देना पड़ेगा. फ्यूचर पर बेट पर भी टैक्स बढ़ाया गया है. ये चीजें शेयर मार्केट को पसंद नहीं आई है, इसीलिए मार्केट में भारी गिरावट आई है. 

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सरकार ने बजट 2026 में कमोडिटी फ्यूचर्स पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% करने का प्रस्ताव दिया है. इस कदम से कमोडिटी डेरिवेटिव्स के लिए ट्रेडिंग लागत बढ़ेगी और फ्यूचर्स सेगमेंट में टर्नओवर और ट्रेडिंग सेंटिमेंट पर असर पड़ने की संभावना है, क्योंकि ट्रेडर बढ़े हुए टैक्स के जवाब में अपनी पोजीशन एडजस्ट करेंगे.

वहीं, सरकार ने बजट में दो बड़े ऐलान किए हैं, जो अर्बन सेक्टर्स और रेलवे से संबंधित हैं. निर्मला सीतारमण ने सरकार द्वारा पर्यावरण के मुताबिक यात्री परिवहन प्रणालियों को बढ़ावा देने की कोशिश के तहत, बड़े शहरों के बीच ग्रोथ कनेक्टर के तौर पर काम करने वाले सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करने की योजनाओं का ऐलान किया है.

गोल्ड-सिल्वर में बड़ी गिरावट...

बजट सेशन के दौरान सोने और चांदी के ETF में गिरावट आई है, जो ग्लोबल कीमती धातुओं की कीमतों में तेज गिरावट की वजह से हुआ है. Geojit फाइनेंशियल सर्विसेज के सीनियर इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट श्रीराम बी के आर के मुताबिक, यह गिरावट 30 जनवरी को दर्ज किए गए इंटरनेशनल बेंचमार्क में गिरावट को दिखाती है, जो अब आज बाजार खुलने पर भारतीय ETF की कीमतों में भी दिख रही है.

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'हेल्थकेयर सेक्टर के लिए बड़ा कदम...'

हेल्थकेयर काउंसिल के चेयरमैन डॉ. नरेश त्रेहन कहते हैं, "सही दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है. भारत में बीमारियों का डबल बर्डन था. एक कम्युनिकेबल डिजीजेज, जिसमें धीरे-धीरे सुधार हो रहा है."

उन्होंने आगे कहा कि कैंसर जैसी नॉन-कम्युनिकेबल बीमारियां बड़ी तेजी बढ़ रही हैं. सवाल उठता है कि उस हिस्से को कैसे कंट्रोल किया जा सकता है. इसके लिए बायोफार्मा इंस्टीट्यूट्स में बड़े स्तर पर रिसर्च की जरूरत है. 

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'हम उम्मीद कर रहे थे कि...'

कंज्यूमर एक्सपर्ट बिजॉन मिश्रा ने आजतक से बातचीत में कहा, "हम अपेक्षा यह रख रहे थे कि यहीं पर कंज्यूमर को विश्वास पैदा हो कि हमको सही कीमत में सामना मिल रहा है, जो हम खरीदना चाह रहे हैं. अभी भी जब हम एमआरपी देखते हैं, तो कहीं 10, 40 और कहीं पर 60 फीसदी कम में मिल रहा है. हमें यह जानना है कि एक्चुअल एमआरपी क्या है."

पी चिदंबरम द्वारा लाए गए 'आय की स्वैच्छिक घोषणा योजना (Voluntary Disclosure of Income Scheme)' की सफलता और मौजूदा बजट को जोड़कर पूछे गए सवाल पर टैक्स एक्सपर्ट गोपाल केडिया ने कहते हैं, "पीएम मोदी का जो टार्गेट है कि बाहर से हमें पैसे लाने हैं या प्रॉपर डिस्क्लोजर हमारे पास है, क्योंकि भारत के इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की कई देशों के साथ ट्रीटी हुई है और वहां से हमारे पास इन्फॉर्मेशन आ रही है और उसके प्रोसेस करने में काफी समय लगता है. इन सूचनाओं में डीमेट अकाउंट, बैंक अकाउंट और ख़रीदी गई प्रॉपर्टी जैसी चीजें हैं. सरकार चाह रही है कि लोग आएं और उसको डिस्क्लोज करें और उस पर टैक्स दें."

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बजट साइज बढ़ने के बाद भी क्यों नहीं बढ़ रहा एलोकेशन?

डिफेंस बजट में सरकार ने बढ़ोतरी की है, जो 6.8 लाख करोड़ से 7.8 लाख करोड़ कर दिया गया है. राजनीतिक विश्लेषक आशुतोष, आजतक से बातचीत में कहते हैं, "जब भारत लगातार पाकिस्तान और चीन को फेस कर रहा है, ऐसे में अगर बजट एलोकेशन का सिर्फ 1.89 फीसदी डिफेंस के हिस्से जाता है, तो कम से कम यह रियलाइजेशन हो गया कि हमको इस बजट को बढ़ाना होगा."

उन्होंने आगे कहा कि अगर आप दुनिया में तुलना करते हैं, तो यूएसए 997 मिलियन डॉलर, चीन 3.14 बिलियन डॉलर, जर्मनी 8.89 बिलियन डॉलर खर्च कर रहा है. मेरा कहना है कि जो आपने 2021 में बजट का 2.5 फीसदी एलोकेट कर रहे थे, तो अगर बजट का साइज बढ़ रहा है, तो एलोकेशन भी बढ़ना चाहिए.

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'सबसे अच्छी बात यह...'

अर्थशास्त्री अश्विनी महाजन ने कहा, "सबसे अच्छी बात तो यह हुई है कि रेयर अर्थ और मैन्युफैक्चरिंग में अच्छा पुश दिया गया है. वहीं, हम डर रहे थे कि कहीं ऐसा न हो कि कैपिटल एक्सपेंडिचर कम न हो जाए, या उसी पर रहे.. इसमें भी बढ़ोतरी दिखाई दे रही है."

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उन्होंने आगे कहा कि हमें इस बात से नहीं घबराना चाहिए कि सेंसेक्स क्या कह रहा है क्योंकि यह कभी भी इकोनॉमी का पैरामीटर नहीं होता है. इकोनॉमी आगे बढ़ रही है. मैन्युफैक्चरिंग और टूरिज्म की तरफ हम आगे बढ़ रहे हैं. बीमारियों के हम तरह-तरह के प्रावधान कर रहे हैं. 

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अश्विनी महाजन ने कहा, "मुझे लगता है कि बायोफार्मा सेक्टर में बड़ा रिफॉर्म हुआ है. आज अगर हम स्टेज थ्री कैंसर से बच सकते हैं, तो वो बायोसिमिलर्स के जरिए ही बच सकते हैं."

एक ईश्वर की सीईओ समृद्धि बजाज कहती हैं, "नॉर्थ ईस्ट में जो बुद्धिस्ट सर्किट का विकास हो रहा है, इसके लिए एक ईश्वर में बहुत सहायता आ रही है. एन्सिएंट मंदिर से वर्चुअल पूजा करवा सकते हैं. बजट में एआई पर भी हुई कि इसमें इन्वेस्टमेंट्स हो रहे हैं."

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