Economic Survey: दो पार्ट में पेश होता है आर्थिक सर्वेक्षण... जानिए पहली बार देश में कब हुआ था पेश

History Of Economic Survey: कल 23 जुलाई 2024 को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश करेंगी और इससे पहले आज संसद में मोदी 3.0 सरकार की ओर से इकोनॉमिक सर्वे पेश किया जाएगा. यह ऐसा डॉक्युमेंट होता है, तो बजट की पूरी तस्वीर पेश करता है.

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आज संसद के पटल पर रखा जाएगा देश का इकोनॉमिक सर्वे आज संसद के पटल पर रखा जाएगा देश का इकोनॉमिक सर्वे

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 2:11 PM IST

कल देश का बजट (Budget 2024) पेश किया जाएगा. ये मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का पहला बजट होगा. इस साल संपन्न हुए लोकसभा चुनावों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के नेतृत्व में लगातार तीसरी बार बनी सरकार के बजट से लोगों को इस बार खासी उम्मीदें हैं. देश की पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री के रूप में निर्मला सीतारमण अपने कार्यकाल का ये लगातार सातवां बजट करते हुए इतिहास रचने जा रही हैं. संसद में बजट पेश किए जाने से एक दिन पहले आर्थिक सर्वेक्षण रखा जाता है. आइए जानते हैं ये क्या है और क्यों खास है, इसके साथ ही इसकी शुरुआत कैसे हुई थी?  

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क्या होता है Economic Survey?
हर साल देश का बजट (Budget) पेश किए जाने से पहले सरकार की ओर से संसद के पटल पर आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) रखा जाता है. ये आर्थिक सर्वेक्षण बजट का मुख्य आधार होता है, और इसमें इकोनॉमी की पूरी तस्वीर सामने आती है और इसे पिछले वित्तीय वर्ष की समीक्षा के आधार पर तैयार किया जाता है. इसके जरिए सरकार देश की अर्थव्यवस्था (Indian Economy) की ताजा फाइनेंशियल हालत के बारे में बताती है. इसमें साल भर में डेवलपमेंट ट्रेंड, किस सेक्टर से कितनी कमाई हुई, किस सेक्टर में कैन सी योजनाएं किस तरह लागू हुईं, इन सबकी जानकारी शामिल होती है.

दो पार्ट में पेश होता है आर्थिक सर्वेक्षण
Economic Survey को बजट का मुख्य आधार माना जाता है. लेकिन, ऐसा जरूरी नहीं है कि इसकी सिफारिशों को सरकार लागू ही करे. आर्थिक सर्वेक्षण में सरकारी नीतियों, प्रमुख आर्थिक आंकड़े और क्षेत्रवार आर्थिक रूझानों के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाती है. इस सर्वे से आम जनता को महंगाई, बेरोजगारी के आंकड़े तो मिलते ही हैं. इसके साथ ही निवेश, बचत और खर्च करने का आइडिया मिल जाता है.

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आर्थिक सर्वेक्षण को दो हिस्सों में पेश किया जाता है, जिसके पहले हिस्से में देश की इकोनॉमी (Indian Economy) की ताजा हालत के बारे में जानकारी शेयर की जाती है. वहीं दूसरे हिस्से में विभिन्न सेक्टर्स के प्रमुख आंकड़े प्रदर्शित किए जाते हैं. आर्थिक मामलों के विभाग Chief Economic Advisor के मार्गदर्शन में ये दस्तावेज तैयार किया जाता है.

1950-51 में पेश हुआ था पहला आर्थिक सर्वे
Budget से ऐन पहले पेश किया जाने वाला इकोनॉमिक सर्वे बेहद खास माना जाता है. बता दें कि मुख्य आर्थिक सलाहकार के मार्गदर्शन में तैयार किए गए इस दस्तावेज को अंतिम रूप देने के बाद वित्त मंत्री द्वारा अनुमोदित दिया जाता है. गौरतलब है कि आर्थिक सर्वेक्षण पेश करने का सिलसिला 1950 से जारी है. वित्त वर्ष 1950-51 में पहली बार देश का इकोनॉमिक सर्वे पेश किया गया था, शुरुआ में ये बॉट वाले दिन ही पेश होता था, लेकिन 1964 से इसे बजट से एक दिन पहले पेश किया जाने लगा और तब से ये परंपरा जारी है. 

ये बड़े ऐलान कर सकती है सरकार
फाइनेंस मिनिस्‍टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) द्वारा 23 जुलाई को पेश किए जाने वाले केंद्रीय बजट 2024 से वेतनभोगी वर्ग को बड़ी उम्‍मीदें है. माना जा रहा है कि सरकार टैक्‍स छूट से लेकर टैक्‍स स्‍लैब में बदलाव पर फोकस कर सकती है. साथ ही कटौती और टैक्‍सेशन प्रॉसेस को आसान और अनुकूल बनाने पर जोर दे सकती है.

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कर्मचारियों को उम्‍मीद है कि सरकार इस बार के बजट में बड़ा ऐलान करते हुए आयकर अधिनियम की धारा 80सी के तहत कटौती सीमा को बढ़ाने के प्रस्ताव पर विचार-विमर्श करेगी. वित्त वर्ष 2014-15 से 1.5 लाख रुपये पर स्थिर बनी हुई ये कटौती इस बार के बजट 2 लाख रुपये तक हो सकती है. इससे मिडिल क्‍लास को बड़ी राहत मिलेगी.

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