Budget 2026: 75 साल पुरानी परंपरा... जानिए क्या होता है इकोनॉमिक सर्वे? बजट से एक दिन पहले होता है पेश

Economic Survey Of India: देश में हर साल 1 फरवरी के दिन आम बजट पेश किया जाता है और इससे एक दिन पहले संसद के पटल पर आर्थिक सर्वे रखा जाता है. ये परंपरा 75 साल पुरानी है.

Advertisement
बजट के एक दिन पहले संसद के पटल पर रखा जाता है इकोनॉमिक सर्वे (Photo: ITG) बजट के एक दिन पहले संसद के पटल पर रखा जाता है इकोनॉमिक सर्वे (Photo: ITG)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 20 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:30 AM IST

देश की पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार का आम बजट (Union Budgte 2026) आने वाला है और 1 फरवरी को इसे संसद में पेश किया जाएगा. खास बात ये है कि इस साल वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) द्वारा बजट रविवार के दिन पेश किया जाने वाला है. बजट से ठीक एक दिन पहले आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) आता है और ये बेहद जरूरी डॉक्यूमेंट होता है, जो देश की फाइनेंशियल हेल्थ का पूरा लेखा-जोखा पेश करने वाला होता है. इसे पेश करने की परंपरा 75 साल पुरानी है. आइए जानते हैं क्या होता है आर्थिक सर्वे और क्यों ये इतना खास है? 

Advertisement

तीन हिस्सों में बंटा होता है आर्थिक सर्वे
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी 2026 को बजट पेश करने से एक दिन पहले 31 जनवरी को संसद के पटल पर देश का आर्थिक सर्वे रखेंगी. इकोनॉमिक सर्वे एक फाइनेंशियल डॉक्यूमेंट होता है और इसके तीन पार्ट होते हैं. पहले पार्ट में बीते वित्त वर्ष की आर्थिक स्थिति की समीक्षा और भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) से जुड़ी जरूरी बातें शामिल होती हैं, जैसे इकोनॉमक ग्रोथ की उम्मीदें, इसमें आने वाली चुनौतियां और इसे रफ्तार देने के लिए सरकार के द्वारा  उठाए जाने वाले कदम. जबकि दूसरे पार्ट में अलग-अलग सेक्टर्स के प्रदर्शन से जुड़े आंकड़े दर्शाए जाते हैं. वहीं तीसरे पार्ट में जॉब, महंगाई, एक्सपोर्ट-इंपोर्ट, उत्पादन से संबंधित अहम बातें शामिल होती हैं. 

75 साल पुरानी इकोनॉमिक सर्वे की परंपरा
Budget से ठीक एक दिन पहले आर्थिक सर्वे पेश किया जाता है, लेकिन ये नियम 60 के दशक में बना था. वहीं आर्थिक सर्वे पेश किए जाने की परंपरा तो भारत में 75 साल पुरानी है, जी हां देश का पहला आर्थिक सर्वे 1950-51 में पेश किया गया था. इसके बाद 1964 से इसे बजट से एक दिन पहले संसद के पटल पर रखा जाने लगा और अब तक यही सिलसिला जारी है. सरकार इसके जरिए जनता को न सिर्फ अर्थव्यवस्था की सही स्थिति के बारे में बताती है, बल्कि इसमें मौजूदा चुनौतियों से भी रूबरू कराती है. 

Advertisement

इकोनॉमी की सेहत बताता है सर्वे?
पहले यह सर्वे बजट दस्तावेज का ही हिस्सा हुआ करता था, लेकिन फिर इसे अलग डॉक्युमेंट के रूप में पेश किया जाने लगा और इसे इकोनॉमी की सेहत की पूरी रिपोर्ट माना जाता है. देश का आर्थिक सर्वे बेहद अहम दस्तावेज होता है और इसे तैयार करने के बाद वित्त मंत्री (Finance Minister) की मंजूरी लेनी होती है और इसके बाद ही संसद में पेश किया जाता है. फिर इसके बाद मुख्य आर्थिक सलाहकार चालू वित्त वर्ष का ब्यौरा पेश करते हैं. 

निवेशकों की भी रहती है पैनी नजर
आर्थिक सर्वे से आम जनता को महंगाई, बेरोजगारी समेत तमाम आंकड़े तो मिलते ही हैं, बल्कि निवेश, बचत और खर्च करने का आइडिया भी मिल जाता है. ऐसे में निवेशकों की भी इस पर पैनी नजर होती है. इसे उदाहरण के तौर पर समझें, तो मान लीजिए सरकार का फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर या मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर ज्यादा है, तो फिर यह सेक्टर निवेशकों का अहम इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन बन सकता है. ये सर्वे न सिर्फ सरकार की नीतियों की जानकारी देता है, बल्कि भविष्य के इकोनॉमिक आउटलुक के बारे में भी संकेत देता है. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement