देश का आम बजट (Union Budget 2026) आज 1 फरवरी को पेश होने वाला है और पहली बार ये रविवार के दिन पेश होने जा रहा है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) सुबह 11 बजे इसे संसद में पेश करेंगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार जब से आई है, तब से अब तक भारत के आम बजट का स्वरूप काफी बदल चुका है. इससे जुड़ी परंपराओं में भी चेंज देखने को मिला है. हम आपको बजट से जुड़ी ऐसे ही एक नियम के बारे में बता रहे हैं, जिसे Modi Govt ने 92 साल बाद अचानक बदल दिया. जी हां, ये रेल बजट से जुड़ी परंपरा था.
2017 में बदली रेल बजट की परंपरा
अगर बजट के इतिहास पर नजर डालें, तो मोदी सरकार के दौरान इसमें काफी बदलाव आया है. इसका बड़ा उदाहरण है भारत का रेल बजट (Indian Rail Budget), जिससे जुड़ी परंपरा साल 2017 में बदली गई. इससे पहले भारतीय रेलवे (Indian Railways) के लिए अलग से रेल बजट पेश किया जाता था. देश में मोदी सरकार के आने के बाद नीति आयोग की ओर से भी सरकार को दशकों पुरानी इस परंपरा को खत्म करने की सलाह दी गई थी और तमाम विचार-विमर्श के बाद अचानक इसे खत्म कर दिया गया.
पहले अलग से पेश होता था रेल बजट
बता दें कि मोदी सरकार द्वारा आम बजट में Rail Budget को मिलाने से पहले इसे अलग से पेश किए जाने की परंपरा था और ये ब्रिटिश शासन काल में 1924 से लेकर 2016 तक जारी थी यानी आजादी से पहले से जारी इस परंपरा पर ब्रेक लगाया गया.
आम बजट पेश किए जाने से ठीक एक दिन पहले रेल बजट पेश किया जाता था. नरेंद्र मोदी सरकार (Narendra Modi Govt) ने 92 साल से चली आ रही इस परंपरा तो खत्म करते हुए आम बजट (Union Budget) और रेल बजट (Rail Budget) को एक साथ पेश करना शुरू कर दिया और अब तक ये कायम है.
पहली बार किसने पेश किया कंबाइड बजट
मोदी सरकार में बदली गई इस परंपरा के बाद जब साल 2017 का आम बजट आया, तो तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली (Arun Jetaly) ने रेल बजट को आम बजट के साथ ही पहली बार पेश किया था. इसके बाद 2019 से अब तक वित्त मंत्री के रूप में निर्मला सीतारमण इसे पेश करती आ रही हैं. बता दें कि Budget 2026 उनका मोदी कार्यकाल में लगातार 9वां बजट होगा. इस बार का बजट टैरिफ और ट्रेड वॉर से जुड़ी ग्लोबल अनिश्चितताओं के बीच पेश किया जा रहा है.
आजतक बिजनेस डेस्क