टैरिफ का काउंटर, इंडस्ट्री को बूस्ट लेकिन मिडिल क्लास को निराशा... किसके लिए कैसा है ये बजट?

मोदी सरकार 3.0 के बजट 2026 में अमेरिकी टैरिफ के खिलाफ भारतीय निर्यात को मजबूती देने, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया. हालांकि, मिडिल क्लास की टैक्स राहत की उम्मीद पर पानी फिर गया.

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इस बजट में सरकार ने साफ किया है कि अब वह पैसा सोच-समझकर खर्च करेगी (Photo- ITG) इस बजट में सरकार ने साफ किया है कि अब वह पैसा सोच-समझकर खर्च करेगी (Photo- ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:02 PM IST

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में अपना नौवां केंद्रीय बजट पेश किया, जिसमें अमेरिकी टैरिफ के खिलाफ भारतीय निर्यात को मजबूती देने, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया. हालांकि, मिडिल क्लास की टैक्स राहत की उम्मीद पर पानी फिर गया. बजट 2026-27 में कुल 52.65 लाख करोड़ रुपये का खर्च प्रस्तावित किया गया है, जिसमें रिकॉर्ड 12.22 लाख करोड़ रुपये का कैपिटल एक्सपेंडिचर शामिल है.

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बजट की सबसे बड़ी ताकत फिस्कल डिसिप्लिन है. वित्त मंत्री ने अगले वित्त वर्ष के लिए फिस्कल डेफिसिट को जीडीपी के 4.3 फीसदी पर रखने का लक्ष्य रखा है, जो चालू वर्ष के 4.4 फीसदी से कम है. यह 2021-22 में दिए गए वादे को पूरा करते हुए 4.5 फीसदी से नीचे लाने का लक्ष्य हासिल करने के बाद की निरंतरता है. डेब्ट-टू-जीडीपी रेशियो भी घटकर 55.6 फीसदी पर आ गया है.

इस बजट में सरकार ने साफ किया है कि अब वह पैसा सोच-समझकर खर्च करेगी, कर्ज और घाटा धीरे-धीरे कम करेगी, लेकिन साथ ही सड़कों, शहरों, छोटे उद्योगों, स्वास्थ्य और रोजगार पर पूरा ध्यान देगी. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बजट पेश करते हुए कहा कि सरकार का मकसद आम लोगों की जरूरतें पूरी करना और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना है. बजट में 7 हाईस्पीड रेल कॉरिडोर और 3 आयुर्वेदिक एम्स बनाने का भी ऐलान किया गया है. 

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मिडिल क्लास को नहीं मिली कोई राहत

आम आदमी और मध्यम वर्ग की उम्मीदें इस बार टूटी हैं. लोगों को आयकर स्लैब में छूट या मानक कटौती (Standard Deduction) की सीमा बढ़ाने की उम्मीद थी, लेकिन इस पर कुछ भी नहीं कहा गया. हालांकि, जीवन शैली से जुड़ी कुछ चीजें सस्ती होंगी. कपड़े, लेदर आइटम, सिंथेटिक फुटवियर, चमड़े के उत्पाद, कैंसर-शुगर की 17 दवाएं ड्यूटी फ्री, बीड़ी, लिथियम आयन सेल, मोबाइल बैटरियां होंगी सस्ती, सोलर ग्लास होंगे सस्ते, मिक्स्ड गैस सीएनजी, ईवी, माइक्रोवेब ओवन, विमानों का ईंधन, विदेश यात्रा सस्ती होगी.

इसके अलावा जिन सेक्टर्स में कस्टम ड्यूटी में बढ़ोतरी की गई है, यानी जो चीजें महंगी होने वाली हैं. उनमें सबसे ऊपर शराब, स्क्रैप और खनिज शामिल हैं.  

वहीं शेयर बाजार में तेजी से निवेश करने वाले युवाओं और नौकरीपेशा लोगों के लिए STT बढ़ोतरी एक झटका है. शेयर बाजार के निवेशकों के लिए बुरी खबर है. स्टॉक ऑप्शन और फ्यूचर्स ट्रेडिंग पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) को 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत कर दिया गया है. इसका असर तुरंत बाजार पर देखने को मिला, जहां निवेशकों के 8 लाख करोड़ रुपये डूब गए. शराब, लक्जरी वस्तुओं (घड़ियां आदि) और स्क्रैप पर टैक्स बढ़ाया गया है, जिससे ये चीजें महंगी होंगी. आय की गलत रिपोर्टिंग पर जुर्माना भी बढ़ाकर 100 प्रतिशत कर दिया गया है.

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इंडस्ट्री जगत को मिला बड़ा बूस्ट

बजट में इंडस्ट्री को सबसे ज्यादा तवज्जो दी गई है. वैश्विक टैरिफ वॉर के काउंटर के रूप में घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने की कोशिश साफ दिखाई दी है. वित्त मंत्री सीतारमण ने अपने बजट भाषण के दौरान लघु एवं सूक्ष्म उद्योग को बढ़ावा देने के लिए बड़े फंड की घोषणा की. सरकार का उद्देश्य चैंपियन एमएसएसई तैयार करना है. सरकार ने 10,000 करोड़ MSMEs ग्रोथ फंड के लिए आवंटित किए हैं. यह फंड वैश्विक व्यापार व्यवधानों से जूझ रहे छोटे उद्योगों को आधुनिक बनाने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद करेगा. आत्मनिर्भर भारत कोष में अतिरिक्त 2000 करोड़ रुपये डाले जाएंगे.

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बजट भाषण में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर विशेष रूप से फोकस किया दिखा है. EMS यानी इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विस सेक्टर के लिए 40,000 करोड़ रुपये खर्च करने का ऐलान किया गया है. बीते साल के बजट में ये बजट 19,500 करोड़ रुपये था. PLI Scheme के लिए एलोकेशन डबल करने के कारण EMS कंपनियों के शेयर में जोरदार एक्शन दिख रहा है. 

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लॉजिस्टिक्स को भी बेहतर बनाने पर फोकस

शहरी क्षेत्रों के विकास के लिए सरकार 'सिटी इकोनॉमिक रीजन्स' (CERs) पर फोकस करेगी. टियर-2 और टियर-3 शहरों को मजबूत करने के लिए हर क्षेत्र के लिए पांच साल में 5,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है. इसके अलावा, लॉजिस्टिक्स को बेहतर बनाने के लिए 10,000 करोड़ रुपये की योजना कंटेनर निर्माण के पारिस्थितिक तंत्र को विकसित करने के लिए शुरू की जाएगी. 

जल मार्गों को बढ़ावा देने के लिए 20 नई राष्ट्रीय जलमार्गों को परिचालनिक किया जाएगा और वाराणसी व पटना में जहाज-मरम्मत पारिस्थितिक तंत्र स्थापित किया जाएगा. सरकार का लक्ष्य 2047 तक अंतर्देशीय जलमार्गों और तटीय शिपिंग की हिस्सेदारी को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत करना है.

बायोफार्मा और फार्मा सेक्टर में क्रांति

स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकार ने 'बायोफार्मा शक्ति' की घोषणा करते हुए 10,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है, ताकि भारत वैश्विक बायोफार्मा निर्माण का हब बन सके. इसमें तीन नए और सात मौजूदा राष्ट्रीय फार्मास्यूटिकल शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों (NIPER) को अपग्रेड किया जाएगा. कैंसर के मरीजों के लिए बड़ी राहत की खबर है कि 17 दवाओं पर बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) को पूरी तरह से हटा दिया गया है. 

इसके अलावा, 7 दुर्लभ बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं पर भी आयात शुल्क से छूट दी गई है. अब तक इन दुर्लभ बीमारियों के लिए आयात होने वाली दवाइयों पर भारी भरकम टैक्स लगता था.

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रक्षा बजट में रिकॉर्ड वृद्धि

इस बदट में राष्ट्रीय सुरक्षा को दृढ़ करने के लिए रक्षा मंत्रालय को 7.85 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड आवंटन किया गया है, जो कुल बजट का 14.68 प्रतिशत है. यह पिछले साल के 6.81 लाख करोड़ रुपये की तुलना में काफी अधिक है. इसमें सेना के आधुनिकीकरण पर सरकार का फोकस दिखा है. 

दरअसल, सेना के आधुनिकीकरण के लिए पूंजीगत व्यय 1.80 लाख करोड़ से बढ़ाकर 2.19 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है. इसका मतलब है कि भारत अपनी सेना को आधुनिक हथियार, ड्रोन और तकनीक से लैस करने के लिए प्रतिबद्ध है, खासकर वैश्विक और क्षेत्रीय चुनौतियों के मद्देनजर.

कृषि क्षेत्र के लिए नई उम्मीदें 

सरकार ने खाद (उर्वरक) पर दी जाने वाली सब्सिडी को भी थोड़ा कम किया है, लेकिन किसानों को खाद सस्ती मिलती रहेगी. अगले साल खाद पर 1.70 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे. सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद के दाम घटे हैं और देश में उत्पादन बढ़ा है, इसलिए खर्च कम हुआ है. 

पशुपालन, मछली पालन और नारियल, चंदन, काजू जैसी उच्च मूल्य फसलों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है, ताकि किसानों की आमदनी बढ़ाई जा सके. हाई-वैल्यू फसलों के समर्थन के लिए कोकोनट प्रोत्साहन योजना की मदद से 1 करोड़ किसानों और 3 करोड़ लोगों की मदद की जाएगी. लक्ष्य रखा है कि भारतीय काजू और कोको को 2030 तक प्रीमियम ग्लोबल ब्रांड बनाया जाएगा, जिससे भारत के कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिल सकेगी.

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इसके साथ ही कृषि क्षेत्र में 'भारत विस्तार AI' (Bharat Vistaar AI) की शुरुआत की गई है, जो किसानों को स्थानीय भाषा में फसल संबंधी जानकारी और मंडी भाव उपलब्ध कराएगा. ग्रामीण महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों के लिए सेल्फ हेल्प Entrepreneur (SHE) मार्ट्स शुरू किए जाएंगे, जो महिलाओं को उद्यमों की मालिक बनने में मदद करेंगे.

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विदेश में पढ़ाई और इलाज हुआ सस्ता

टैक्स स्लैब के मामले में सरकार ने चयनात्मक राहत और कड़ाई का मिश्रण अपनाया है. सरकार ने विदेश में शिक्षा और इलाज के लिए पैसे भेजने (LRS) वालों के लिए टीसीएस (TCS) की दर 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दी गई है. विदेशी टूर पैकेज पर भी अब एक समान 2 प्रतिशत TCS लगेगा. यानी विदेश में यदि इलाज, पढ़ाई या घूमने पर कोई भारतीय पैसा खर्च करता है तो उस पर अब कम टीसीएस देना होगा. 

इन बदलावों के लागू होने से अंतरराष्ट्रीय यात्रा अब कम खर्चीली होगी और पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा. शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विदेशी खर्च पर टैक्स कम होने से मध्यम वर्ग के परिवारों को अपनी वित्तीय योजना बनाने में आसानी होगी. साथ ही, कॉन्ट्रैक्टर भुगतान के नए टीडीएस नियमों से छोटे व्यवसायों के लिए नियमों का अनुपालन सरल होगा और विवादों में कमी आएगी. सरकार के इन कदमों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नागरिकों और व्यापारियों के लिए लेनदेन की कुल लागत में कमी आना तय है.

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बजट में मेंटल हेल्थ पर भी फोकस

आम बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सरकार की मंशा साफ कर दी है. बजट 2026 में मेंटल हेल्थ को लेकर ऐसे कदमों का ऐलान किया गया है, जो इलाज से लेकर काउंसलिंग तक देशभर में पहुंच आसान बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव ला सकते हैं. वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार राष्ट्रीय टेली-मेंटल हेल्थ प्रोग्राम शुरू करेगी, जिसके जरिए लोगों को फोन और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य परामर्श मिलेगा. इस पूरे प्रोग्राम को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की जिम्मेदारी IIT बेंगलुरु को दी जाएगी.

मेंटल हेल्थ के क्षेत्र में एक और बड़ा फैसला लेते हुए वित्त मंत्री ने NIMHANS 2.0 की घोषणा की. उन्होंने बताया कि बेंगलुरु स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेज (NIMHANS) को अब नेशनल लेवल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में और मजबूत किया जाएगा. इसके तहत उत्तर भारत में NIMHANS 2.0 की स्थापना की जाएगी ताकि देश के बड़े हिस्से को बेहतर मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें.

गेमिंग और ई-स्पोर्ट्स सेक्टर पर फोकस

बजट का सबसे बड़ा धमाका रहा ABGC (Animation, Visual Effects, Gaming, and Comics) कंटेंट क्रिएटर लैब्स सेटअफ का ऐलान. सरकार ने साफ कर दिया है कि गेमिंग अब सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि एक बड़ी अर्थव्यवस्था है. इन लैब्स के जरिए अब छोटे शहरों के टैलेंटेड युवाओं को भी वे टूल्स और सॉफ्टवेयर मिल सकेंगे, जो पहले सिर्फ बड़े स्टूडियो के पास होते थे. इससे भारत में वर्ल्ड-क्लास गेम्स बनने का रास्ता साफ हो गया है. 

वित्त मंत्री ने ई-स्पोर्ट्स को एक प्रोफेशनल खेल के रूप में और मजबूती देने के संकेत दिए हैं. बजट में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ₹12.2 लाख करोड़ का आवंटन किया गया है. इसका सीधा मतलब है तेज़ 5G कनेक्टिविटी और कम 'लैग'. अब भारतीय ई-स्पोर्ट्स एथलीट्स बिना किसी टेक इंट्रप्शन के इंटरनेशनल टूर्नामेंट्स में मुकाबला कर सकेंगे.

बजट में देश के 15,000 सेकेंडरी स्कूलों और 500 कॉलेजों में AVGC (Animation, Visual Effects, Gaming and Comics) कंटेंट क्रिएटर लैब्स खोले जाने की भी घोषणा की गई है. इन लैब्स का मकसद है युवाओं को गेमिंग, एनीमेशन और डिजिटल कंटेंट तैयार करना सिखाना. सरकार ने AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) को गेमिंग का भविष्य बताया है. बजट में युवाओं को नई स्किल्स सिखाने के लिए जो फंड दिया गया है, उसका एक बड़ा हिस्सा गेमिंग और ग्राफिक्स डिजाइनिंग जैसे कोर्सेस पर खर्च होगा. यानी अब आपको गेमिंग सीखने के लिए महंगे प्राइवेट इंस्टिट्यूट के चक्कर नहीं काटने होंगे.

खिलाड़ियों के लिए क्या? 

सरकार ने स्पोर्ट्स सेक्टर का भी बजट में ध्यान रखा है और इसके तहत खेलो इंडिया मिशन को अगले 10 साल के लिए मजबूत करने के ऐलान किया है. इस मिशन के तहत ट्रेनिंग सेंटर्स बनेंगे, कोच और सपोर्ट स्टाफ को ट्रेनिंग मिलेगी, जकिदी जाएगी और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं व लीग आयोजित होंगी. इसके अलावा खेल के सामानों पर ड्यूटी कट करके उन्हों सस्ता किया गया है. 

बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने कहा, 'खेल क्षेत्र रोजगार, स्किलिंग और नौकरी के कई अवसर प्रदान करता है. खेलो इंडिया कार्यक्रम के जरिए खेल प्रतिभाओं को व्यवस्थित रूप से तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी. अब मैं अगले एक दशक में खेल क्षेत्र को बदलने के लिए खेलो इंडिया मिशन शुरू करने का प्रस्ताव रखती हूं.'

पर्यटन क्षेत्र को भी बढ़ावा

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हेरिटेज और कल्चर को बढ़ावा देने के लिए 14 आर्कियोलॉजिकल साइट्स को टूरिज्म के तौर पर डिवेलप करने की बात की. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नाम लेकर 15 पुरातात्विक स्थलों का जिक्र किया. इन जगहों को ऐतिहासिक तौर पर जाना जाता है, लेकिन इनके महत्व और इनके सांस्कृतिक योगदान की जानकारी लोगों को नहीं है. पूर्वोत्तर क्षेत्र में 4,000 ई-बसें चलाई जाएंगी और वहां 5 बौद्ध स्थलों को विकसित किया जाएगा.

वित्तमंत्री ने अपने भाषण में राखीगढ़ी, लोथल, सारनाथ, हस्तिनापुर, धोलावीरा जैसे स्थलों का जिक्र किया. यहां अलग-अलग समय पर कई बार खुदाई हो चुकी हैं. सरकार का लक्ष्य इन साइट्स को सिर्फ देखने की जगह नहीं, बल्कि वाइब्रेंट एक्सपीरिएंशियल कल्चरल डेस्टिनेशन बनाना है. इससे इन क्षेत्रों में टूरिज्म, स्थानीय रोजगार और अंतरराष्ट्रीय पहचान को नई मजबूती मिलेगी.

अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में बौद्ध सर्किट के विकास की योजना भारत को ग्लोबल स्पिरिचुअल टूरिज्म हब बना सकती है. इन पहलों से साफ है कि मोदी सरकार की रणनीति विरासत को बोझ नहीं, बल्कि भविष्य की ताकत बनाने की है. देश की ये 15 आर्किटेक्चर साइट्स अब सिर्फ अतीत की कहानी नहीं, बल्कि विकसित भारत की नई पहचान बनने जा रही हैं.

बजट में अल्पसंख्यक मंत्रालय को कितना पैसा मिला?

केंद्रीय वित्त मंत्री ने अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के बजट किसी तरह की कोई कटौती नहीं की, बल्कि उसमें इजाफा ही किया है.  मोदी सरकार ने केंद्रीय बजट में इस बार अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के लिए कुल 3400 करोड़ रुपये के आवंटन किया है जबकि 2025 में 3395.62 करोड़ रुपये मिले थे. इस तरह पिछली बार की तुलनी में 4.38 करोड़ रुपये अधिक इस बार मिला है. 

मोदी सरकार ने अल्पसंख्यक मंत्रालय के दिए गए 3400 करोड़ के बजट में केंद्रीय क्षेत्र की योजनाएं/परियोजनाओं के लिए 184.45 करोड़ रुपये दिए हैं जबकि 2025 में 180.07 करोड़ रुपये दिए गए थे. इस बार उसमें 4.38 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की गई है.

बांग्लादेश की कपड़ा इंडस्ट्री पर 'सर्जिकल स्ट्राइक

बजट 2026-27 में टेक्सटाइल्स इंडस्ट्री के लिए तगड़ी घोषणाएं की है. बांग्लादेश के बरक्श भारत की कपड़ा इंडस्ट्री का कॉम्पिटिटिवनेस बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने सिल्क प्रोडक्शन, मशीनरी सपोर्ट, हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट प्रोग्राम और टेक्सटाइल्स सेक्टर में स्किल डेवलपमेंट की घोषणा की है. 

इस बजट में लेबर-इंटेंसिव टेक्सटाइल सेक्टर के लिए एक मज़बूत पॉलिसी पर ज़ोर दिया गया है, जिसका मकसद आत्मनिर्भरता, रोज़गार, इनोवेशन और ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस को बढ़ावा देना है. सरकार के उपायों का फोकस समावेशी विकास, ग्रामीण विकास और एक्सपोर्ट प्रमोशन पर है, जिससे टेक्सटाइल भारत के आर्थिक और सामाजिक एजेंडे का एक मुख्य ड्राइवर बन गया है. 

भारत सरकार का बजट 2026-27 बांग्लादेश की तुलना में भारत के कपड़ा बाजार ज्यादा आकर्षक बनाने की रणनीति का ऐलान है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार चैलेंज मोड में मेगा टेक्सटाइल पार्क स्थापित करने जा रही है. ये मेगा टेक्सटाइल पार्क टेक्निकल टेक्सटाइल में भी वैल्यू एडिशन लाने पर भी ध्यान दे सकते हैं. 

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