गोपालगंज से पूर्वी चंपारण के लिए विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग की भव्य यात्रा शुरू हो गई है. तमिलनाडु के महाबलीपुरम से तैयार होकर आया यह विशाल शिवलिंग विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद गोपालगंज से अपने अंतिम गंतव्य, पूर्वी चंपारण के केसरिया स्थित विराट रामायण मंदिर के लिए रवाना हुआ. इस अवसर पर बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी और बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद के सचिव सायन कुणाल ने शिवलिंग की विधिवत पूजा की.
केसरिया के लिए शिवलिंग रवाना
करीब 210 मीट्रिक टन वजनी यह शिवलिंग पूरी तरह ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित है और इसे विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग माना जा रहा है. शिवलिंग की ऊंचाई और लंबाई 33 फुट है. इसे महाबलीपुरम में विशेष तकनीक और शिल्पकला के जरिए तैयार किया गया. लगभग 30 दिनों में 2178 किलोमीटर की लंबी यात्रा तय कर शिवलिंग गोपालगंज पहुंचा, जहां इसके स्वागत के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. स्वागत के दौरान जेसीबी मशीन से शिवलिंग पर पुष्प वर्षा भी की गई.
शिवलिंग के दर्शन और पूजा के लिए रास्ते भर श्रद्धालुओं का उत्साह देखने को मिला. जगह-जगह लोग हाथ जोड़कर खड़े नजर आए और जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया. गोपालगंज में आम लोगों के साथ-साथ कई संत और श्रद्धालु भी शिवलिंग के स्वागत में पहुंचे. उत्तर प्रदेश के हनुमानगढ़ी से जुड़े संत और श्रद्धालु भी गोपालगंज बॉर्डर तक शिवलिंग के स्वागत के लिए पहुंचे थे.
210 टन वजनी शिवलिंग के दर्शन को उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब
बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि यह शिवलिंग केवल पत्थर की एक आकृति नहीं, बल्कि एक महान संकल्प और आस्था का प्रतीक है. उन्होंने बताया कि स्वर्गीय किशोर कुणाल जी का सपना था कि ऐसा शिवलिंग बने, जिसके दर्शन और जलाभिषेक से 1008 शिवलिंग के पूजन का पुण्य प्राप्त हो. आज वह सपना साकार हो रहा है. यह शिवलिंग महावीर मंदिर ट्रस्ट द्वारा बनवाया गया है और ट्रस्ट की टीम पूरे प्रोजेक्ट की लगातार निगरानी कर रही है.
बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद के सचिव सायन कुणाल ने बताया कि शिवलिंग 10 से 12 जनवरी के बीच केसरिया पहुंचेगा और 17 जनवरी को माघ कृष्ण चतुर्दशी के पावन अवसर पर इसकी विधिवत स्थापना की जाएगी. उन्होंने कहा कि विराट रामायण मंदिर का निर्माण कार्य साल 2030 तक पूरा कर लिया जाएगा, जिसके बाद यह भव्य मंदिर श्रद्धालुओं के लिए पूरी तरह खोल दिया जाएगा.
aajtak.in