पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की पटना पुलिस द्वारा गिरफ्तारी के बाद बिहार की सियासत गरमा गई है. रविवार शाम सुपौल जिले के छातापुर ब्लॉक चौक पर उनके समर्थकों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. गिरफ्तारी को राजनीतिक प्रतिशोध बताते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का पुतला दहन किया गया. इस दौरान बिहार सरकार और पटना पुलिस के खिलाफ नारेबाजी हुई और कार्रवाई को लोकतांत्रिक आवाज दबाने की कोशिश बताया गया.
प्रदर्शन का नेतृत्व जन अधिकार पार्टी (जाप) के पूर्व जिला उपाध्यक्ष सुभाष कुमार यादव ने किया. समर्थकों का कहना था कि पप्पू यादव की गिरफ्तारी कोई सामान्य कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि सोची-समझी राजनीतिक साजिश है. आरोप लगाया गया कि सरकार की नाकामियों को उजागर करने की कीमत सांसद को चुकानी पड़ी है.
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नीट छात्रा मामले से जोड़ी गिरफ्तारी
जाप नेताओं ने गिरफ्तारी को सीधे जहानाबाद की नीट छात्रा के रेप और संदिग्ध मौत के मामले से जोड़ा. सुभाष कुमार यादव ने कहा कि पप्पू यादव लगातार इस मामले में पीड़िता को न्याय दिलाने की आवाज उठा रहे थे. उन्होंने प्रशासन और सरकार की भूमिका पर सवाल खड़े किए थे, जिससे नाराज होकर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई.
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जिस मामले में सांसद को गिरफ्तार किया गया, उसमें उनका बेल बॉन्ड जुलाई 2025 में ही समाप्त हो चुका था. इसके बावजूद न तो उन्हें कोई नोटिस भेजा गया और न ही समन जारी किया गया. सवाल उठाया गया कि महीनों तक पुलिस क्यों चुप रही, जबकि सांसद का पटना आना-जाना प्रशासन के संज्ञान में था.
पूर्व नियोजित कार्रवाई का आरोप
समर्थकों ने दावा किया कि गिरफ्तारी से दो दिन पहले ही जदयू के एक प्रवक्ता ने सार्वजनिक मंच से कानूनी कार्रवाई के संकेत दिए थे. इसे पूरे घटनाक्रम का सबूत बताते हुए कहा गया कि यह कार्रवाई पहले से तय थी. प्रदर्शन के दौरान मांग की गई कि सांसद पप्पू यादव को तत्काल रिहा किया जाए, नीट छात्रा मामले में दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और पुलिस की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए.
राम चन्द्र मेहता