देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित परीक्षाओं में मानी जाने वाली संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा के नाम पर झूठा दावा कर सुर्खियां बटोरने वाले बिहार के रंजीत यादव को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. शेखपुरा जिले के माहुली थाना क्षेत्र के फतेहपुर गांव का रहने वाला रंजीत खुद को UPSC परीक्षा में 440वीं रैंक प्राप्त करने वाला अभ्यर्थी बताकर न केवल इलाके में सम्मानित हो रहा था, बल्कि युवाओं के बीच प्रेरक वक्ता के रूप में भी चर्चा में आ गया था. लेकिन जब रिजल्ट की जांच हुई तो उसकी पूरी कहानी फर्जी निकली. इसके बाद मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया.
झूठे दावे से शुरू हुआ सम्मान का सिलसिला
जानकारी के अनुसार, हाल ही में घोषित UPSC परिणाम के बाद रंजीत कुमार यादव ने खुद को सफल अभ्यर्थी बताते हुए दावा किया कि उसे 440वीं रैंक मिली है. यह खबर धीरे-धीरे इलाके में फैलने लगी. देखते ही देखते रंजीत यादव को सम्मानित करने का सिलसिला शुरू हो गया. गांव और आसपास के इलाकों में कई जगहों पर कार्यक्रम आयोजित किए गए. स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने उसे मंच पर बुलाकर माला पहनाई, शॉल ओढ़ाई और युवाओं के लिए प्रेरणा बताया. इस दौरान उसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से फैलने लगे. सम्मान समारोहों में रंजीत यादव सिर्फ पुरस्कार लेने तक सीमित नहीं रहा. वह मंच से युवाओं को प्रेरित करने वाले भाषण भी देने लगा. अपने भाषणों में वह संघर्ष, मेहनत और लक्ष्य के महत्व पर जोर देता था. वह कहता था कि जीवन का सफर लंबा होता है और सफलता पाने के लिए लक्ष्य स्पष्ट होना चाहिए.
उसके एक भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ, जिसमें वह कह रहा था- अगर तुम्हें अपना लक्ष्य साफ दिखाई देता है तो मंजिल तक पहुंचना आसान हो जाता है. लेकिन अगर लक्ष्य ही नजर नहीं आ रहा तो मेहनत करने के बाद भी सफलता नहीं मिलेगी. ऐसी बातें सुनकर कई छात्र उससे प्रभावित होने लगे. कुछ युवाओं ने उसे अपना आदर्श भी मानना शुरू कर दिया था. रंजीत अक्सर यह भी कहता था कि इंसान को इतनी मेहनत करनी चाहिए कि एक दिन किस्मत भी मान जाए कि सफलता उसी की थी.
नेताओं और पुलिस ने भी किया सम्मान
रंजीत के कथित चयन की खबर इतनी तेजी से फैली कि स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधि भी उससे प्रभावित हो गए. बताया जाता है कि इलाके के पूर्व विधायक विजय यादव, स्थानीय मुखिया और अन्य सामाजिक नेताओं ने उसे सार्वजनिक मंचों पर सम्मानित किया. यहां तक कि माहुली थाना क्षेत्र के कुछ पुलिसकर्मियों ने भी उसे बधाई दी और युवाओं के लिए प्रेरणा बताया. एक कार्यक्रम में तो बाकायदा मंच सजाकर उसका अभिनंदन किया गया. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग जुटे और उसे माला पहनाकर सम्मानित किया गया. इन आयोजनों में हजारों रुपये खर्च किए गए और पूरे क्षेत्र में यह संदेश फैल गया कि गांव का एक युवक UPSC जैसी कठिन परीक्षा पास कर गया है.
असली रिजल्ट ने खोली पूरी पोल
लेकिन यह खुशी ज्यादा दिनों तक नहीं टिक सकी. कुछ लोगों को इस दावे पर संदेह हुआ. उन्होंने UPSC की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर परिणाम की सूची देखनी शुरू की. जब सूची में 440वीं रैंक वाले उम्मीदवार का नाम देखा गया तो मामला संदिग्ध लगने लगा. जांच में सामने आया कि 440वीं रैंक जिस उम्मीदवार को मिली है, वह कर्नाटक का रंजीथ नाम का अभ्यर्थी है. यह जानकारी सामने आते ही लोगों को शक हो गया कि शेखपुरा का रंजीत कुमार यादव झूठा दावा कर रहा है. इसके बाद जब और जानकारी जुटाई गई तो स्पष्ट हो गया कि उसने UPSC में चयन होने का फर्जी दावा किया था.
पुलिस ने दर्ज की प्राथमिकी
मामले के वायरल होने के बाद पुलिस भी सक्रिय हो गई. शेखपुरा पुलिस ने रंजीत कुमार यादव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की और उसकी तलाश शुरू कर दी. कई स्थानों पर छापेमारी की गई और आखिरकार पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. इस संबंध में शेखपुरा के अवर पुलिस अधीक्षक डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और पूरे मामले की जांच की जा रही है. उन्होंने कहा कि यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस मामले में किसी और व्यक्ति की भी भूमिका रही है या नहीं.
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
UPSC जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा के नाम पर झूठा दावा करने का यह पहला मामला नहीं है. इससे पहले भी बिहार में इसी तरह की घटना सामने आ चुकी है. कुछ समय पहले आकांक्षा सिंह नाम की एक युवती ने भी खुद को UPSC में सफल बताकर चर्चा बटोरी थी. बाद में पता चला कि वास्तविक चयन उत्तर प्रदेश के गाजीपुर की आकांक्षा सिंह का हुआ था, जिन्हें 301वीं रैंक मिली थी. उस समय स्थिति इतनी भ्रमित हो गई थी कि UPSC को खुद प्रेस विज्ञप्ति जारी कर स्पष्ट करना पड़ा था कि असली चयन किस उम्मीदवार का हुआ है.
(रिपोर्ट:अरुण कुमार)
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