आज एक कद्दावर राजनेता के रूप में पहचाने जाने वाले नितिन नवीन बचपन में भी उतने ही विनम्र और मिलनसार थे। उनके पड़ोसी और पुराने मित्र नीरज कुमार सिन्हा ने बताया कि समय और पद बदलने के बावजूद उनके स्वभाव में रत्ती भर भी बदलाव नहीं आया है।
नीरज ने बचपन का एक दिलचस्प किस्सा सुनाया जो नितिन नवीन की रणनीतिक समझ को दर्शाता है.नितिन का घर और हमारा घर अगल-बगल रहा है. वह बचपन से ही विनम्र स्वभाव के हैं. साथ में हम लोग क्रिकेट खेलते थे.
एक बार जब उनके सीनियर खिलाड़ी छक्के मार रहे थे, तो नितिन ने एक चाल चली. उन्होंने नीरज से कहा, "मैं धीमी गेंद डालूंगा और जैसे ही वह छक्का मारने की कोशिश करेंगे, तुम्हें कैच पकड़ना है." दोस्त बताते हैं कि बचपन की यह 'स्ट्रेटजी' आज भी उनकी राजनीति और कार्यशैली में साफ झलकती है, वे हर काम को पूरी योजना के साथ अंजाम देते हैं,
बचपन में हम लोग कहीं भी रहते थे, लेकिन शाम में एक जगह इकट्ठे जरूर होते थे. क्रिकेट नितिन नबीन का पसंदीदा खेल था. कई बार हम लोग सड़क पर भी खेलते थे तो पड़ोस की आंटी भगा देती थी. हमारा अच्छा समय गुजरा है.
नीरज ने बताया, ''नितिन नबीन का स्वभाव में किसी भी तरीके का परिवर्तन नहीं आया है. आज वे मंत्री हैं, लेकिन दोस्तों का फोन एक बार में उठाते हैं. अगर व्यस्त हों, तो बैक-कॉल जरूर करते हैं.
कुछ दिन पहले जब मैं बिहार भवन में उनसे मिलने गया था, दूर से ही उन्होंने देखा और अचानक गले लगा लिया. हमें ऐसा लगा ही नहीं कि हम इतने दिन बाद दोस्त से मिल रहे हैं. जब भी मिलते हैं गर्म जोशी के साथ मिलते हैं.''
नीरज सिन्हा के अनुसार, नितिन नवीन की सबसे बड़ी ताकत उनकी सादगी है. यही वजह है कि बिहार का हर व्यक्ति उन्हें एक राजनेता के बजाय अपने घर का बेटा या भाई समझता है.
नीरज ने नितिन नवीन के अपने पिता के साथ जुड़ाव का एक भावुक और अनोखा किस्सा शेयर किया. उस समय मोबाइल नहीं होते थे. नितिन नवीन को अगर अपने पिताजी दिवंगत नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा को किसी काम की याद दिलानी होती थी, तो वे एक पर्ची लिखकर और उसे ईंट में बांधकर उनकी जेब में डाल देते थे. जैसे ही पिताजी की जेब में भारीपन महसूस होता या हाथ जाता, उन्हें पर्ची मिल जाती और काम याद आ जाता. यह उनकी अपनी खास शैली थी.
जितेंद्र बहादुर सिंह