'धर्म पर टिप्पणी करने वालों के खिलाफ बने कानून', मंत्री जमा खान ने मंच से की नीतीश कुमार से डिमांड

जेडीयू कोटे से मंत्री जमा खान (Zama Khan) का अब बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने अपनी ही सरकार से मांग की है कि आस्था पर टिप्पणी करने वालों के खिलाफ कानून बनना चाहिए ताकि उन्हें सजा मिल सके. जमा खान ने कुछ लोग देश की छवि बिगाड़ना चाहते हैं.

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जमा खान जमा खान

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 जनवरी 2024,
  • अपडेटेड 8:58 AM IST

देश में इन दिनों धार्मिक मामलों, देवी देवताओं पर लगातार बयानबाजी की जा रही है. भगवान राम से लेकर, रामचरितमानस, मां सरस्वती पर नेताओं द्वारा की जा रही बयानबाजी से सियासी पारा चढ़ा हुआ है. इन सबके बीच बिहार के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री जमा खान ने बड़ा बयान देते हुए अपनी सरकार से मांग की है कि  धर्म के मामले पर बोलने वालों के लिए कानून बने जिससे उन्हें सजा मिल सके.

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जमा खान ने नीतीश से की मांग

जमा खान ने कहा, 'मेरी व्यक्तिगत राय है और मैं डिमांड करूंगा और अपने नेता से भी कहूंगा एक कानून बन जाए कि धर्म की बात जो भी मंच से करता है किसी भी पार्टी से संबंधित हो उसका तुरंत निष्कासन होना चाहिए .. धर्म की बातें खुले मंच से नहीं होना चाहिए .. यह आस्था का विषय है .. अगर कोई धर्म की बात करता है तो किसी न किसी को इससे ठेस पहुंचता है जो सही नहीं है .. जैसे बिहार में शराबबंदी का कठोर कानून बना , वैसे कानून बन जाए कि जो धर्म की बातें मंच पर करेगा या किसी के आस्था पर बोलेगा तो उसका तुरंत निष्कासन होना चाहिए.'

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आरजेडी नेता दे रहे हैं विवादित बयान

दरअसल बिहार सरकार में शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर और फतेहबहादुर सिंह लगातार हिंदू देवी देवताओं को लेकर विवादित बयान देते रहे हैं. राम मंदिर को लेकर भी दोनों नेताओं ने इस तरह के बयान दिए हैं जिससे बवाल मचा हुआ है. इस तरह के बयानों पर जेडीयू कोटे से मंत्री जमा खान ने कहा था, 'ये देश हम सबका है. हम भी राम मंदिर जाएंगे. कुछ चंद लोग इसको बिगाड़ना चाहते हैं. मेरा उनसे अनुरोध है कि इसको ना बिगाड़ें. किसी भी धर्म या आस्था के विषय पर किसी भी व्यक्ति को बयान नहीं देना चाहिए.'

RJD विधायक ने लगवाया था पोस्टर

इससे पहले फतेह बहादुर ने पटना में एक पोस्टर आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव और राबड़ी देवी के आवास के सामने लगवाया था, जिसमें लिखा था कि मंदिर का मतलब मानसिक गुलामी का मार्ग और स्कूल का मतलब होता है जीवन में प्रकाश का रास्ता. जब मंदिर की घंटी बजती है तो हमें संदेश भी देती है कि हम अंधविश्वास, पाखंड मूर्खता और अज्ञानता की ओर बढ़ रहे हैं, जबकि स्कूल की घंटी बजती है तो यह संदेश मिलता है कि हम तर्कपूर्ण ज्ञान और वैज्ञानिकता और प्रकाश की ओर बढ़ रहे हैं. अब तय करना है कि आपको  किस और जाना चाहिए? इतन ही नहीं फतेह बहादुर सिंह ने कहा था ये सब लोग कह रहे हैं कि 22 जनवरी को पत्थर में प्राण डाला जाएगा तो इतने दिनों से क्या राम बिना प्राण के थे?

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