ससुर जीतनराम मांझी के पैर छूकर लिया आशीर्वाद, नामांकन के बाद सास से लिपट गईं बहू दीपा

गया की इमामगंज सीट से केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी की बहू दीपा मांझी ने एनडीए प्रत्याशी के तौर पर नामांकन कर दिया है. इस दौरान दीपा मांझी अपने ससुर जीतनराम के पैर छूकर आशीर्वाद लिए और अपनी सास से लिपटकर भावुक हो गईं.

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जीतनराम मांझी की बहू ने किया नामांकन (फोटो- X अकाउंट) जीतनराम मांझी की बहू ने किया नामांकन (फोटो- X अकाउंट)

शशि भूषण कुमार

  • गया,
  • 24 अक्टूबर 2024,
  • अपडेटेड 2:47 PM IST

बिहार में विधानसभा उपचुनाव की प्रक्रिया चल रही है, जिन सीटों पर उपचुनाव हो रहा है उनमें इमामगंज सीट भी शामिल है. इस विधानसभा सीट से पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी विधायक हुआ करते थे, लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव में वो गया सीट से चुनाव जीतकर संसद पहुंच गए, जहां उन्हें केंद्र सरकार में मंत्री बनाया गया है और उनके सांसद बनने के बाद इमामगंज सीट पर उपचुनाव हो रहा है. इस सीट पर उनके परिवार की नई सदस्य चुनावी मैदान में उतरी हैं. मांझी की बहू और HAM के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष कुमार सुमन की पत्नी दीपा मांझी इस सीट पर एनडीए की उम्मीदवार हैं.  

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इमामगंज सीट के लिए आज दीपा मांझी ने अपना नामांकन दाखिल कर दिया. नामांकन दाखिल करने से पहले दीपा मांझी ने अपने ससुर जीतनराम मांझी के पैर छूकर आशीर्वाद लिया. दीपा मांझी के नामांकन के मौके पर जीतनराम मांझी का पूरा परिवार गया में मौजूद था. नामांकन के बाद दीपा मांझी जब वापस लौटी तो अपनी सास शांति देवी के गले से लिपट गईं. सास–बहू दोनों उस वक्त काफी भावुक नजर आ रही थीं. 

मांझी की पत्नी रहती हैं राजनीति से दूर  

जीतनराम मांझी की भले ही लंबे वक्त से राजनीति में हों, वे बिहार के मुख्यमंत्री भी रहे हैं, लेकिन उनकी पत्नी शांति देवी राजनीति से हमेशा दूर रही हैं. राजनीतिक सवालों पर भी शांति देवी बहुत कुछ नहीं बोलतीं, जीतनराम मांझी के रिश्ते जब नीतीश कुमार से खट्टे हुए तब भी शांति देवी ने इस पर ऐतराज जताया था. खुद मांझी इस बात का खुलासा कर चुके हैं. शांति देवी ने अपनी बहू दीपा मांझी को जीत का आशीर्वाद दिया है. उन्हें भरोसा है कि जैसे जीतनराम इमामगंज से चुनाव जीतते रहे, इसी तरह उनकी बहू भी चुनाव में जीत हासिल कर बिहार विधानसभा जाएगी. 

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जब बहू को बनाया उम्मीदवार तो उठे सवाल 

हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा ने जब दीपा मांझी को उम्मीदवार बनाने का फैसला किया, तब परिवारवाद के आरोपों के साथ जीतनराम मांझी के ऊपर सवाल दागे गए. उनकी बहू दीपा मांझी को जब सवालों के कटघरे में खड़ा किया गया तो मांझी खुलकर बचाव के लिए सामने आ गए थे. उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया था कि बहू दीपा मांझी पहले से समाज सेवा करती रही हैं और वह जिला परिषद का चुनाव भी लड़ चुकी हैं. इमामगंज सीट पर भले ही मांझी परिवार का चेहरा हो, लेकिन उपचुनाव में चुनौती कितनी बड़ी है, इसका अंदाजा जीतनराम मांझी को भी है. शायद इसीलिए वह खुद गया और इमामगंज में कैंप कर रहे हैं.

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