IAS की चार्टर्ड प्लेन में यात्रा... RJD ने घेरी सरकार, मंत्री का पलटवार- दलित अफसर चढ़ गया तो दर्द क्यों?

Bihar Chartered Plane Controversy: बिहार की सियासत में इन दिनों एक चार्टर्ड विमान की उड़ान ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है. 'विमान के किराए' से शुरू हुई यह बहस अब 'जातीय पहचान' और 'प्रशासनिक ईमानदारी' के इर्द-गिर्द सिमट गई है. राजद और सरकार के बीच छिड़ा यह वाकयुद्ध अब सदन से लेकर सड़क तक चर्चा का विषय है.

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बिहार के IAS अफसर निलेश कुमार देवरे.(Photo:x\nildeoreIAS) बिहार के IAS अफसर निलेश कुमार देवरे.(Photo:x\nildeoreIAS)

रोहित कुमार सिंह

  • पटना,
  • 18 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:51 AM IST

बिहार में चार्टर्ड विमान उपयोग को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. पूरा मामला तब राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो गया जब राजद विधायक राहुल शर्मा ने विधानसभा में सीनियर IAS अफसर निलेश कुमार देवरे के खिलाफ 'चार्टर्ड प्लेन का निजी इस्तेमाल' करने का आरोप लगाया.

इसके तुरंत बाद बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने देवरे का बचाव करते हुए कहा कि अधिकारी को दलित समाज से आने के कारण टारगेट किया जा रहा है. यह पूरा विवाद राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक तीनों स्तरों पर चर्चाओं में है.

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सरकारी प्लेन को निजी संसाधन की तरह उपयोग: राहुल शर्मा 
राजद विधायक राहुल शर्मा ने सदन में इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि पिछले साल जून में Dassault Falcon 2000 चार्टर्ड विमान में सीनियर IAS अधिकारी अपने परिवार सहित दिल्ली से पटना की यात्रा करते दिखे.

उन्होंने कहा “पिछले साल जून में कौन से अधिकारी Dassault Aviation चार्टर्ड प्लेन में आए थे और क्या बिहार सरकार के IAS अधिकारी चार्टर्ड प्लेन में घूमने की क्षमता रखते हैं? सरकार को इसकी जांच करनी चाहिए.

बता दें कि Falcon 2000 को एक प्रीमियम चार्टर्ड विमान के तौर पर देखा जाता है और जानकारी के मुताबिक दिल्ली से पटना की एक तरफ की यात्रा का किराया तकरीबन 20 लाख रुपए है. वहीं, दूसरी तरफ अगर पटना से दिल्ली या फिर दिल्ली से पटना में किसी भी आम हवाई जहाज में कोई यात्रा करता है तो उसका किराया कम से कम 5000 रुपए से शुरू होता है.

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दलित-पिछड़ा होने की वजह से निशाना: अशोक चौधरी 
राजद विधायक के आरोपों के बाद मंत्री अशोक चौधरी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि आईएएस निलेश देवरे को जातीय पहचान की वजह से टारगेट किया जा रहा है.

चौधरी ने कहा, IAS को उन्हें इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वो दलित समाज से आते हैं. क्या दलित और बैकवर्ड समाज को हवाई जहाज पर चढ़ने का अधिकार नहीं है? कौन सा अपराध कर दिया उन्होंने? प्लेन तो खाली आता, अगर कोई अधिकारी परिवार के साथ आ गया तो इसमें क्या समस्या है?''

मंत्री अशोक चौधरी ने यह भी स्पष्ट किया, ''जिस घटना का जिक्र है, वह जुलाई 2025 की है. मैं खुद माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी के साथ उस विमान में मौजूद था. घटना में कोई अनियमितता नहीं थी. इसे अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग दिया जा रहा है.''

अशोक चौधरी ने कहा कि पूर्व में देवरे ने स्वास्थ्य विभाग में 25 सप्लायर्स को ब्लैकलिस्ट किया. यही वजह है कि उनका विरोध हो रहा है. मंत्री चौधरी ने आगे कहा कि आरोप लगाने वालों का उद्देश्य सवाल उठाने के पीछे प्रशासनिक कार्रवाई से असंतोष है.

मंत्री ने दावा किया, ''नीलेश देवरे जब स्वास्थ्य विभाग में आए, तो उन्होंने दवा सप्लाई में गड़बड़ी करने वाले 25 लोगों को ब्लैकलिस्ट किया. यही लोग आज सवाल खड़े कर रहे हैं. जिनके हित प्रभावित हुए, वही इस मुद्दे को हवा दे रहे हैं. सरकार ऐसे अधिकारियों के साथ है जो कठोर प्रशासनिक कार्रवाई करते हैं.''

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विवाद का केंद्र जाति व प्रशासनिक कार्रवाई?
चार्टर्ड प्लेन विवाद अब सिर्फ सरकारी संसाधनों के उपयोग तक सीमित नहीं दिख रहा. एक ओर विपक्ष इसे सिस्टम की पारदर्शिता का सवाल बता रहा है. तो दूसरी ओर सरकार इसे जातीय पूर्वाग्रह और प्रशासनिक सख्ती से जोड़े जाने की कोशिश कर रही है.

आईएएस देवरे की ब्लैकलिस्टिंग कार्रवाई और दवा सप्लाई कंपनियों पर कार्रवाई ने पहले से ही कई समूहों को असहज किया था. अब चार्टर्ड प्लेन विवाद ने इसे राजनीतिक मंच पर ला दिया है.

सरकार बनाम विपक्ष 
राहुल शर्मा ने सदन में कहा कि वे इस मुद्दे को लेकर सरकार से लिखित जवाब मांगेंगे और चार्टर्ड फ्लाइट उपयोग का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग करेंगे.

वहीं, मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि सरकार पूर्वाग्रह और झूठ पर आधारित आरोपों का जवाब देगी और अधिकारी के सम्मान की रक्षा करेगी.

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