गया: प्रिंसिपल हुए सेवानिवृत्त तो विदाई समारोह में लिपटकर रोने लगीं छात्राएं, VIDEO कर देगा भावुक

बिहार के गया जिले से एक भावुक कर देने वाला मामला सामने आया है. जहां एक प्राचार्य की विदाई के दौरान छात्राएं लिपटकर रोने लगीं. जिसका वीडियो भी सामने आया है.

Advertisement

aajtak.in

  • गया,
  • 02 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:00 PM IST

गया जिले के अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र डुमरिया प्रखंड क्षेत्र के मध्य विद्यालय बसडीहा से एक ऐसा दृश्य सामने आया है जिसने हर किसी के दिल को छू लिया है. यहां डुमरिया प्रखंड क्षेत्र के मध्य विद्यालय बसडीहा के प्राचार्य राजेंद्र प्रसाद विद्यालय में लम्बे समय तक सेवा देने के बाद 31 जनवरी 2026 को सेवानिवृत्ति हो गए.

कॉलेज में उनके लिए विदाई समारोह का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में छात्राएं उनसे लिपटकर फूट-फूटकर रोने लगीं. जिससे कॉलेज के अन्य स्टाफ और ग्रामीणों की भी आंखें नम हो गईं. जिसका एक वीडियो भी सामने आया है. 

Advertisement

यह भी पढ़ें: फेक सर्टिफिकेट पर टीचर बने तो खैर नहीं! इलाहाबाद हाईकोर्ट का सख्त आदेश- नपेंगे अधिकारी, होगी सैलरी रिकवरी

वीडियो में देखा जा सकता है कि जैसे ही स्कूल के सेवानिवृत्ति प्राचार्य राजेंद्र प्रसाद को स्कूल से विदा करने लगे, तभी स्कूल की सभी छात्राएं प्राचार्य राजेंद्र प्रसाद को रोक कर जोर -जोर से रोने लगीं. साथ ही छात्राएं प्राचार्य राजेंद्र प्रसाद को स्कूल परिसर से बाहर भी नहीं निकलने नहीं दे रही थीं. यह दृश्य इतना मार्मिक था कि खुद राजेंद्र प्रसाद भी अपने आंसुओं को रोक नहीं सकें, वह भी बच्चों को गले लगाकर रोते नजर आए.

पढ़ाई के सरल तरीके और अच्छे व्यवहार के लिए प्रसिद्ध थे राजेंन्द्र प्रसाद

राजेंद्र प्रसाद लंबे समय से मध्य विद्यालय बसडीहा में अपनी सेवाएं दे रहे थे. उनकी सादगी, सरल स्वभाव और कार्यकुशलता से पूरा विद्यालय परिवार प्रभावित था. पढ़ाने का उनका तरीका बेहद सहज था. वह छात्रों को अपने बच्चों की तरह मानते थे. वह छात्राओं को कभी डांट-फटकार नहीं, बल्कि गलती होने पर भी प्यार से समझाते थे.

Advertisement

वहीं होमवर्क न करने पर भी वह बच्चों को डांटने के बजाय समझाते और प्रोत्साहित करते थे. यही वजह थी कि उनकी विदाई के समय छात्राएं खुद को संभाल नहीं पाईं. राजेंद्र प्रसाद बच्चों के सिर पर प्यार से हाथ फेरते हुए उन्हें चुप कराने की कोशिश करते रहे. लेकिन माहौल इतना भावुक था कि हर आंख नम हो गई. यह दृश्य इस बात का प्रमाण है कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होती, बल्कि बच्चों के दिलों में जगह बनाना ही सच्ची शिक्षा है.

(पंकज कुमार)

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement