भागलपुर शूटआउट और एनकाउंटर: टारगेट, साजिश, टेंडर वॉर और 12 घंटे में 'इंसाफ' की पूरी इनसाइड स्टोरी

भागलपुर के सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय में हुए शूटआउट में कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण कुमार की मौत हो गई, जबकि चेयरमैन राजकुमार गुड्डू गंभीर रूप से घायल हैं. जांच में सामने आया कि हमला चेयरमैन को निशाना बनाकर किया गया था और कृष्ण भूषण उनकी जान बचाते हुए मारे गए. श्रावणी मेला टेंडर विवाद को घटना की वजह माना जा रहा है. मुख्य आरोपी रामधनी यादव पुलिस मुठभेड़ में मारा गया, जबकि कई अन्य हिरासत में हैं.

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हमलावरों को मीटिंग की जानकारी पहले से थी. Photo ITG हमलावरों को मीटिंग की जानकारी पहले से थी. Photo ITG

रोहित कुमार सिंह

  • भागलपुर,
  • 29 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 7:41 PM IST

बिहार के भागलपुर जिले के सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय में मंगलवार शाम को हुआ शूटआउट और फिर 12 घंटे के अंदर शूटआउट में शामिल अपराधियों का एनकाउंटर के बाद सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण कुमार जिनकी शूटआउट में मौत हुई थी, क्या वो अपराधियों के निशाने पर थे या फिर अपराधियों का टारगेट कोई और था?

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चैंबर में श्रावणी मेला टेंडर से जुड़ी बैठक चल रही थी
सुल्तानगंज शूटआउट के टाइमलाइन पर नजर डालें तो मंगलवार शाम करीब 4 बजे उस समय नगर परिषद के दफ्तर में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया, जब 3 से 4 की संख्या में हथियारबंद अपराधी अचानक कार्यालय परिसर में दाखिल हुए और सीधे चेयरमैन राजकुमार गुड्डू के चैंबर की ओर बढ़ गए, जहां उस समय श्रावणी मेला 2026 को लेकर टेंडर और व्यवस्थाओं से जुड़ी एक महत्वपूर्ण बैठक चल रही थी, जिसमें चेयरमैन के साथ जिला परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण कुमार समेत अन्य अधिकारी भी मौजूद थे.

निशाने पर थे चेयरमैन राजकुमार गुड्डू
अपराधियों ने बिना किसी चेतावनी के चैंबर में घुसते ही अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी और उनका पहला तथा मुख्य निशाना चेयरमैन राजकुमार गुड्डू थे, जिन्हें नजदीक से कई गोलियां मारी गईं, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़े, जबकि मौके पर मौजूद अन्य लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे और पूरे कार्यालय में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई.

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चेयरमैन को बचाने आगे आए कार्यपालक पदाधिकारी
इस दौरान कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण कुमार ने स्थिति को संभालने की कोशिश की और चेयरमैन को बचाने की इरादे से अपराधियों से भिड़ गए और उन्हें पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन इसी बीच अपराधियों ने उन पर भी गोली चला दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए, और बाद में अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

बीच-बचाव करने आए कृष्ण भूषण की चली गई जान
शूटआउट के इस घटना से स्पष्ट हो गया कि कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण कुमार भूषण अपराधियों के टारगेट पर नहीं थे, बल्कि राजकुमार गुड्डू अपराधियों के निशाने पर थे और कार्यपालक पदाधिकारी की जान चेयरमैन को बचाने के दौरान चली गई.

चेयरमैन की हालत नाजुक
घायल चेयरमैन राजकुमार गुड्डू को पहले भागलपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें पटना के एक निजी अस्पताल में रेफर कर दिया गया, जहां उनका इलाज जारी है और उनकी स्थिति नाजुक बताई जा रही है.

हमलावरों को मीटिंग की जानकारी थी
घटना के बाद सामने आए सीसीटीवी फुटेज में साफ देखा गया कि अपराधी पूरी तैयारी और सटीक जानकारी के साथ आए थे, क्योंकि वे सीधे चेयरमैन के चैंबर में पहुंचे और बिना समय गंवाए फायरिंग शुरू कर दी, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि हमले की पहले से योजना बनाई गई थी और हमलावरों को बैठक के समय और स्थान की पूरी जानकारी थी.

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पैसे के लेन-देन और प्रभाव को लेकर तनाव
जांच के दौरान सामने आया कि इस पूरे घटनाक्रम की जड़ में श्रावणी मेले से जुड़े ठेके और टेंडर को लेकर चल रहा विवाद था, क्योंकि 30 जुलाई से शुरू होने वाले इस बड़े धार्मिक आयोजन में करोड़ों रुपये के ठेके जारी होते हैं, और इन्हीं ठेकों के बंटवारे को लेकर नगर परिषद के चेयरमैन राजकुमार गुड्डू और डिप्टी चेयरमैन नीलम देवी के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था, जिसमें पैसों के लेन-देन और प्रभाव को लेकर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा था.

ठेके को लेकर विवाद
बताया जाता है कि रामधनी यादव और चेयरमैन राजकुमार गुड्डू का ठेके को लेकर हमेशा विवाद रहता था. रामधनी यादव चाहता था कि इलाके में जो भी ठेके दिए जाए वह उसके मुताबिक हो जिसका विरोध राजकुमार गुड्डू किया करता था.

आरोप है कि इसी विवाद के चलते डिप्टी चेयरमैन नीलम देवी के पति रामधनी यादव ने चेयरमैन को रास्ते से हटाने की साजिश रची और इस साजिश को अंजाम देने के लिए अपने दामाद और साले को भी साथ लिया, जिसके बाद तीनों ने मिलकर मंगलवार शाम इस हमले को अंजाम दिया.

क्या बोले भागलपुर SSP?
भागलपुर SSP प्रमोद कुमार यादव ने कहा, "इस हत्याकांड में रामधनी यादव और उसका पूरा परिवार साजिश में शामिल था. इस मामले में रामधारी यादव एनकाउंटर में मारा गया है और उसके परिवार के तीन लोग समेत कुल 5 लोग हिरासत में हैं. बहुत पहले रामधनी यादव ने एक शख्स का सर धड़ से अलग कर दिया था. रामधनी यादव का पुराना आपराधिक रिकार्ड है और उसके खिलाफ दर्जनों हत्या के और अन्य मामले दर्ज है."

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रामधनी यादव कुख्यात अपराधी
रामधनी यादव एक कुख्यात अपराधी था और पिछले कई वर्षों से सुल्तानगंज और आसपास के इलाकों में उसके नाम का दहशत था. बताया जाता है कि 2005 में उसने एक व्यक्ति का सर धड़ से अलग कर दिया था और फिर उसका सर लेकर थाने पहुंच गया था.

इस मामले में रामधनी यादव की पत्नी नीलम देवी फिलहाल फरार चल रही है और पुलिस उसकी हिरासत में देने के लिए छापेमारी कर रही है.

रामधनी यादव के दो सहयोगी गिरफ्तार
घटना के तुरंत बाद भागलपुर पुलिस ने तेजी से कार्रवाई शुरू की और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर मुख्य आरोपी रामधनी यादव की पहचान करते हुए उसकी तलाश में कई टीमों को लगा दिया, जिसके बाद देर रात नाकाबंदी के दौरान पुलिस ने रामधनी यादव और उसके दो सहयोगियों को गिरफ्तार कर लिया.

रामधनी यादव से हुई मुठभेड़
पुलिस के अनुसार गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को उस स्थान पर ले जाया गया, जहां घटना में इस्तेमाल किए गए हथियार छुपाए गए थे, लेकिन वहीं पर रामधनी यादव ने अचानक पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी, जिसके जवाब में पुलिस ने भी गोली चलाई और इसी मुठभेड़ के दौरान रामधनी यादव को गोली लग गई, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई, जबकि इस दौरान एक डीएसपी समेत दो अन्य पुलिसकर्मी भी घायल हो गए, जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है.

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तेजस्वी यादव ने उठाए सवाल
इस पूरी घटना ने राज्य की राजनीति में भी हलचल मचा दी है, क्योंकि बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इसे सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती मानते हुए मृतक कार्यपालक पदाधिकारी के परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है, जबकि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कुछ तस्वीरें जारी की हैं और दावा किया है कि मुख्य आरोपी रामधनी यादव के सत्ताधारी गठबंधन के नेताओं से संबंध थे, जिन तस्वीरों में वह बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के साथ नजर आ रहा है.

बीपीएससी 59वें बच के अधिकारी थे कार्यपालक पदाधिकारी
मृतक कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण कुमार भूषण को लेकर जो जानकारी सामने आ रही है वह यह कि वह बीपीएससी 59वें बच के अधिकारी थे और मूल रूप से मधुबनी जिले के रहने वाले थे. जानकारी के मुताबिक 3 साल पहले उनकी शादी हुई थी. उनकी 6 महीने की एक बेटी भी है. पिछले साल 30 जुलाई को कृष्ण भूषण कुमार ने सुल्तानगंज नगर परिषद पालक पदाधिकारी पदभार संभाला था.

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