दरभंगा जिले की अलीनगर विधानसभा से विधायक मैथिली ठाकुर ने बिहार विधानसभा में अपने क्षेत्र के कुरसो नदियामि गांव स्थित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की बदहाली का मुद्दा उठाया. उन्होंने सदन में कहा कि सरकार के जवाब से वे पूर्णतः संतुष्ट नहीं हैं.
दरअसल, सरकार की ओर से बताया गया कि अस्पताल में एक आयुष डॉक्टर तैनात हैं और भवन सही है, सिर्फ रिपेयरिंग की जरूरत है. लेकिन विधायक मैथिली ठाकुर ने सदन में कहा कि वे खुद अस्पताल का निरीक्षण कर चुकी हैं. पहले यहां दो-दो MBBS डॉक्टर पदस्थापित थे, लेकिन फिलहाल एक भी MBBS डॉक्टर नहीं है. भवन पूरी तरह जर्जर है. उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय से दोबारा सही अवलोकन कराने की मांग की.
आजतक की ग्राउंड रिपोर्ट में खुली परतें
वीडियो वायरल होने के बाद आजतक की टीम कुरसो नदियामि हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पहुंची. नए भवन, पुराने भवन और जर्जर सरकारी क्वार्टर... तीनों की जो तस्वीर सामने आई, वह चौंकाने वाली थी.
नया भवन: सीमित सुविधा, सीमित समय
अस्पताल सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक ही संचालित होता है. दो बजे के बाद अस्पताल में ताला लटक जाता है. अस्पताल पांच बेड का है. एक कमरा दवा भंडार, एक इंजेक्शन कॉर्नर, एक OPD, और एक OT कमरा है, जो वर्षों से बंद पड़ा है. यहां पहले प्रसव और परिवार नियोजन के ऑपरेशन होते थे, लेकिन नर्स और MBBS डॉक्टर नहीं होने से सब बंद है. जांच के नाम पर सिर्फ ब्लड शुगर की जांच होती है. कोई लैब, कोई टेक्नीशियन नहीं है.
'दो MBBS पोस्ट खाली'
अस्पताल में तैनात आयुष डॉक्टर त्रिवेश गोईत ने कहा कि पहले यहां दो MBBS डॉक्टर की पोस्ट थी, जो आज भी स्वीकृत है. फिलहाल, एक भी MBBS डॉक्टर पदस्थापित नहीं है. दो आयुष डॉक्टर की पोस्ट है, लेकिन सिर्फ वे अकेले कार्यरत हैं. यहां रोजाना 50 से 60 मरीज आते हैं. नर्स की कमी है. जांच की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है. डॉक्टर और कर्मियों के लिए आवास जर्जर हालत में है. उन्होंने विधायक द्वारा सदन में मुद्दा उठाने पर धन्यवाद भी दिया.
पुराना भवन... खंडहर, मलबा और पशु चारा
पुराने अस्पताल भवन की हालत बद से बदतर मिली. छत से प्लास्टर गिर चुका है. सरिया जंग खा चुका है और बाहर दिख रहा है. एक कमरे में ग्रामीणों ने पशु चारा और भूसा रखा है. दूसरे कमरे में मलबे का अंबार है. दीवारों पर पेड़-पौधों की जड़ें उग आई हैं. परिसर में ग्रामीण ताश खेलते दिखे. कभी जहां मरीजों का इलाज होता था, आज वह जगह पशु चारागाह जैसी दिखी.
सरकारी क्वार्टर... बिना दरवाजे-खिड़की के खंडहर
अस्पताल परिसर में बने डॉक्टर और कर्मचारियों के सरकारी आवास पूरी तरह जर्जर हैं. दरवाजे-खिड़कियां गायब है. दीवारें टूटी हुई हैं. छतों से प्लास्टर और कहीं पूरी छत ही ध्वस्त है. कोई भी चारों तरफ से अंदर जा सकता है. एक महिला कर्मचारी मजबूरी में एक जर्जर क्वार्टर में रह रही है. हालांकि वो कैमरे पर आने से मना कर गईं. लेकिन हालात स्पष्ट तौर पर खतरनाक हैं.
'20 गांव की उम्मीद, एक आयुष डॉक्टर के भरोसे'
स्थानीय निवासी पुण्यानंद चौधरी कहते हैं कि करीब 20 गांव के लोग यहां इलाज कराने आते हैं. पहले दो MBBS डॉक्टर थे. एक डॉक्टर की मृत्यु हो गई. जबकि दूसरे का ट्रांसफर हो गया. उसके बाद अस्पताल बदहाल होता गया. विधायक द्वारा मुद्दा उठाने पर उन्होंने आभार जताया.
महिला दाई इंद्रा देवी कहती हैं कि डिलीवरी की सुविधा बहाल हो. डॉक्टर और नर्स की नियुक्ति हो. महिलाओं को बाहर भटकना पड़ता है. मरीज पुष्पा कुमारी ने कहा, पहली बार इलाज के लिए आईं हूं. ज्यादा जानकारी नहीं है.
स्थानीय निवासी रविंद्र झा ने कहा, 1990 के आसपास अस्पताल में सभी सुविधाएं थीं. MBBS डॉक्टर, नर्स, कंपाउंडर तैनात थे. अब सब खत्म हो गया है. आरोप लगाया कि पूर्व विधायक के समय विवाद के बाद अस्पताल गिरावट में गया.
देवेंद्र कामत कहते हैं कि अस्पताल खंडहर बन चुका है. गंभीर हालत में मरीजों को दरभंगा ले जाना पड़ता है. कई बार रास्ते में ही मरीज दम तोड़ देता है. मनटुन राम ने कहा, अस्पताल की स्थिति खराब है. जगह खाली है इसलिए ग्रामीण उपयोग कर रहे हैं.
आजतक की ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि एक आयुष डॉक्टर तैनात होने की बात सही है. यहां MBBS डॉक्टर का पद खाली है. प्रसव और ऑपरेशन बंद हैं. पुराने भवन और क्वार्टर जर्जर हैं. सीमित समय तक ही इलाज मिल रहा है. कई मामलों में विधायक के दावे जमीन पर सही साबित होते दिखे.
प्रह्लाद कुमार