जेडीयू में बदलाव के संकेत! नीतीश के बेटे निशांत कुमार को संगठन में मिल सकती बड़ी ज़िम्मेदारी

बिहार की राजनीति और जेडीयू संगठन में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं. सीएम नीतीश कुमार के उत्तराधिकारी को लेकर जारी चर्चाओं के बीच उनके बेटे निशांत कुमार को पार्टी में सक्रिय भूमिका देने की तैयारी है.

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सक्रिय राजनीति में एंट्री ले सकते हैं निशांत कुमार (File Photo: ITG) सक्रिय राजनीति में एंट्री ले सकते हैं निशांत कुमार (File Photo: ITG)

हिमांशु मिश्रा

  • पटना,
  • 08 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:53 PM IST

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की उम्र और स्वास्थ्य को लेकर लग रही अटकलों के बीच जनता दल यूनाइटेड (JDU) में उनके बेटे निशांत कुमार को एक्टिव करने की मांग तेज हो गई है. जेडीयू सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के अंदर एक बड़ा तबका निशांत को नीतीश कुमार की विरासत संभालने के लिए 'जरूरी और मजबूरी' दोनों मान रहा है. इसी सिलसिले में मार्च में दिल्ली में होने वाली पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में निशांत कुमार को संगठन में महत्वपूर्ण पद देने की चर्चा चल रही है. 

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निशांत को राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सदस्य बनाने या महासचिव बनाकर पूरे बिहार का दौरा कराने के विकल्पों पर मंथन जारी है. 

हालांकि, नीतीश कुमार हमेशा परिवारवाद के खिलाफ रहे हैं और उन्होंने 2025 चुनाव में निशांत को चुनाव लड़ाने से मना कर दिया था, लेकिन पार्टी को एकजुट रखने के लिए अब उनके उत्तराधिकारी के रूप में निशांत का नाम सबसे आगे है.

कार्यकर्ताओं की मांग 

निशांत कुमार को लेकर बिहार के युवाओं और जेडीयू कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है. पटना की सड़कों पर 'नीतीश सेवक, मांगे निशांत' जैसे पोस्टर और बैनर इस बात की गवाही दे रहे हैं. जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने भी स्वीकार किया है कि कार्यकर्ता निशांत को पार्टी में देखना चाहते हैं. पिछले साल नीतीश कुमार के शपथ ग्रहण समारोह में निशांत की अग्रिम पंक्ति में उपस्थिति ने उनके सक्रिय राजनीति में आने के संकेतों को और मजबूत कर दिया है.

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यह भी पढ़ें: नीतीश कुमार की दिल्ली में मोदी-शाह से मुलाकात

'उत्तराधिकार जरूरी...'

जेडीयू नेताओं का मानना है कि नीतीश कुमार के बाद पार्टी को टूटने से बचाने के लिए परिवार से किसी चेहरे का सामने आना जरूरी है. इससे पहले आरसीपी सिंह को उत्तराधिकारी के तौर पर देखा गया था, लेकिन वे भरोसे पर खरे नहीं उतरे. 

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, पहले की परिस्थितियों और आज के हालात में बड़ा अंतर है. पार्टी को बिखरने से रोकने के लिए कार्यकर्ता निशांत कुमार को ही नीतीश कुमार के स्वाभाविक उत्तराधिकारी के रूप में स्वीकार करने को तैयार हैं.

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