बिहार की सियासत में कैबिनेट विस्तार से पहले हलचल तेज हो गई है. जनता दल (यूनाइटेड) के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने साफ कहा है कि पार्टी नई सरकार में 16 मंत्री पद चाहती है. उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब एक दिन बाद राज्य मंत्रिमंडल के बड़े विस्तार की तैयारी है. लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल है कि क्या भाजपा इस मांग को मानती है या नहीं. सूत्रों के मुताबिक मंत्रिमंडल में ज्यादातर चेहरे पुराने रहेंगे.
बिहार में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में सरकार का गठन पिछले महीने हुआ था, जब नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर राज्यसभा का रुख किया. उनके बाद सम्राट चौधरी राज्य के मुख्यमंत्री बने, जो बिहार में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री हैं.
फिलहाल कैबिनेट में जदयू के केवल दो वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद शामिल हैं, जिन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया गया है. ऐसे में पार्टी अब मंत्रिमंडल विस्तार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के मूड में है.
16 मंत्री पद की मांग
पत्रकारों से बातचीत में उमेश कुशवाहा ने कहा, 'हमने स्पष्ट कर दिया है कि हमें 16 मंत्री पद चाहिए.' बिहार विधानसभा की कुल 243 सीटों के हिसाब से संविधान के प्रावधानों के तहत मंत्रिमंडल में अधिकतम 30 मंत्री हो सकते हैं.
शपथ ग्रहण समारोह में PM मोदी होंगे शामिल
सूत्रों के मुताबिक, गुरुवार को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत कई बड़े नेताओं के शामिल होने की संभावना है. एनडीए गठबंधन में जदयू और भाजपा के अलावा चिराग पासवान की एलजेपी (रामविलास), जीतन राम मांझी की हम पार्टी और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी भी शामिल है. पिछली सरकार में इन सहयोगी दलों को प्रतिनिधित्व मिला था और अब नई कैबिनेट में भी उनकी हिस्सेदारी को लेकर चर्चा जारी है.
इस बीच, नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को मंत्री बनाए जाने के सवाल पर भी कुशवाहा ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि पार्टी चाहती थी कि निशांत मंत्री बनें, लेकिन उन्होंने फिलहाल संगठन को मजबूत करने पर ध्यान देने का फैसला किया है.
निशांत कुमार की 'सद्भाव यात्रा'
निशांत कुमार ने हाल ही में 'सद्भाव यात्रा' की शुरुआत की है, जिसके जरिए वह जनता के बीच अपनी पहचान मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं. कुल मिलाकर, बिहार में कैबिनेट विस्तार से पहले राजनीतिक समीकरण तेजी से बनते-बिगड़ते नजर आ रहे हैं और अब सबकी नजर इस पर टिकी है कि जदयू को कितनी हिस्सेदारी मिलती है.
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