बिहार में बर्ड फ्लू (Avian Influenza) का खतरा अब गंभीर रूप ले रहा है. चितकोहरा स्थित बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले मुख्य पोल्ट्री यूनिट में बर्ड फ्लू फैलने के कारण करीब 6 हजार बटेर और मुर्गियों को मौत के घाट दिया गया, इसके बाद दफनाकर ऊपर से नमक डाल दिया गया.
बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति, डॉ. इंद्रजीत सिंह ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली थी कि भागलपुर, मुजफ्फरपुर और राज्य के कुछ अन्य क्षेत्रों में कौओं की मौतें हो रही थीं. इसके बाद विश्वविद्यालय की टीम ने चितकोहरा स्थित कुकुट प्रशिक्षण संस्थान में स्थिति का जायजा लिया, जहां सामने आया कि वहां भी कुछ कौए और मुर्गियों की मौतें हो रही हैं.
तुरंत मुर्गियों और बटेरों के सैंपल लिए गए और जांच में पुष्टि हुई कि यह मौतें बर्ड फ्लू के कारण हुई हैं. इसके बाद बिहार सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कुकुट अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र चितकोहरा में सभी प्रभावित पक्षियों को मारकर दफनाने का निर्णय लिया. कुलपति डॉ. सिंह ने बताया कि दफनाई प्रक्रिया में अत्यधिक सावधानी बरती गई. सुरक्षा कर्मियों ने पीपी किट पहन रखी थी और चेहरे पर मास्क लगाया गया था. शवों को दफनाते समय किसी को भी पास नहीं जाने दिया गया.
इन्फेक्शन से बचने के लिए अपनाया गया ये तरीका
इस कार्रवाई के दौरान एक दस फीट गहरा गड्ढा खोदा गया और मृत पक्षियों पर नमक डाला गया, ताकि संक्रमण पूरी तरह से नष्ट हो सके. इसके अलावा, दफनाए जाने वाले स्थान से एक किलोमीटर के दायरे में मौजूद सभी अन्य पक्षियों और मुर्गियों को भी नष्ट किया जाएगा. यह कदम इस बात को ध्यान में रखते हुए उठाया गया कि बर्ड फ्लू पक्षियों में फैलने पर मानव शरीर में भी इन्फेक्शन फैल सकता है.
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हालांकि डॉ. सिंह ने यह स्पष्ट किया कि यह धारणा पूरी तरह से सही नहीं है. उन्होंने कहा कि बर्ड फ्लू पाए जाने वाले पक्षियों का मांस और अंडा यदि पूरी तरह से पकाया जाए, तो H5N1 (एवियन इन्फ्लुएंजा) वायरस समाप्त हो जाता है और यह मानव के लिए हानिकारक नहीं रहता. खतरनाक तब हो सकता है, जब कोई व्यक्ति बीमार पक्षियों का कच्चा मांस खा ले.
डॉ. सिंह ने यह भी बताया कि बर्ड फ्लू का टीका उपलब्ध है, लेकिन भारत में इस टीके पर प्रतिबंध है. यही कारण है कि जिस इलाके में बर्ड फ्लू फैलता है, वहां के सभी पालित पक्षियों और मुर्गियों को नष्ट कर दफनाने की प्रक्रिया अपनाई जाती है.
पटना के इस मुख्य पोल्ट्री फार्म में हुई इस कार्रवाई के दौरान सुरक्षा और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया गया. विश्वविद्यालय की टीम ने सुनिश्चित किया कि सभी कर्मचारी पीपी किट पहनें और इन्फेक्शन को फैलने से रोकने के लिए मास्क का उपयोग करें. यह अहम कदम है, क्योंकि बर्ड फ्लू तेजी से फैलने वाला रोग है. यदि समय पर नियंत्रित न किया जाए तो यह बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचा सकता है.
इस कदम से स्पष्ट है कि बिहार में बर्ड फ्लू का खतरा गंभीर हो गया है और राज्य सरकार, पशु विज्ञान विभाग और स्वास्थ्य विभाग मिलकर लगातार निगरानी कर रहे हैं. डॉ. सिंह ने कहा कि राज्य में जहां-जहां बर्ड फ्लू पाया जाता है, उन क्षेत्रों में इसी प्रकार की कठोर कार्रवाई की जाएगी. इससे न केवल संक्रमण को फैलने से रोका जा सकेगा, बल्कि संभावित मानव स्वास्थ्य संकट से भी बचाव किया जा सकेगा.
लोगों को सलाह- किसी भी मृत पक्षी को हाथ न लगाएं
विशेषज्ञों का कहना है कि बर्ड फ्लू के संक्रमण की रोकथाम के लिए समय पर कार्रवाई बेहद जरूरी है. मृत पक्षियों को सुरक्षित तरीके से दफनाया जाना, प्रभावित क्षेत्र की निगरानी और व्यापक जागरूकता अभियान महत्वपूर्ण पहलू हैं.
पटना और आसपास के क्षेत्रों में लोगों को यह सलाह दी गई है कि वे किसी भी मृत पक्षी को हाथ न लगाएं और प्रभावित क्षेत्रों में पालतू पक्षियों को बाहर न छोड़ें. इसके अलावा, यदि किसी व्यक्ति को बर्ड फ्लू के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें. सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत यह प्रक्रिया लगातार जारी रहेगी और प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी बढ़ा दी गई है.
राजेश कुमार झा