छोटी-बड़ी, सस्ती या लग्जरी! कारों के मामले में A, B और C सेगमेंट क्या होता है?

ऑटोमोबाइल की दुनिया में भी कई ऐसे टेक्निकल टर्म होते हैं, जिन्हें हम डेली लाइफ में बोलते या सुनते रहते हैं. लेकिन कई बार इन टर्म और शब्दों के पीछे की असल वजह से वाकिफ नहीं होते हैं. आज हम आपको कारों की एक ऐसी ही 'A, B, C, D' से रूबरू कराएंगे.

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कारों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले अंग्रेजी के इन अक्षरों के पीछे गहरा रहस्य छिपा होता है. Photo: ITG कारों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले अंग्रेजी के इन अक्षरों के पीछे गहरा रहस्य छिपा होता है. Photo: ITG

अश्विन सत्यदेव

  • नई दिल्ली,
  • 17 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:13 PM IST

Cars Segment Explained: कभी-कभी दो एक्सपर्ट लोग कारों के बारे में बातचीत करते हैं तो अचानक उनके बीच अंग्रेजी के अक्षरों जैसे A, B या C जैसे सेगमेंट को लेकर चर्चा होती है. क्या आपने कभी सोचा है कि, ऑटो एक्सपर्ट कारों को A, B, C जैसे कैटेगरी में क्यों बांटते हैं. आखिर इसके पीछे क्या कारण है कि, कुछ कारों को 'A' सेगमेंट को कुछ को 'B' या 'C' सेगमेंट की कार का जाता है. 

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तो जवाब बहुत आसान है. जैसे कपड़े स्मॉल, मीडियम या लार्ज (S, M, L और XL) साइज में आते हैं, वैसे ही कारें भी अलग-अलग साइज में आती हैं. इसी साइज के आधार पर कारों को अलग-अलग सेगमेंट में रखा जाता है. इससे खरीदार को अपनी जरूरत के हिसाब से सही कार चुनने में आसानी होती है. भारत जैसे बड़े बाजार में A से लेकर D+ तक कई सेगमेंट मौजूद हैं. तो आइये जानें किस सेगमेंट में कौन सी कार आती है.

A-सेगमेंट की कारें

A-सेगमेंट की कारें सबसे छोटी और सबसे किफायती होती हैं. जैसे वर्णमाला की शुरुआत A से होती है, वैसे ही पहली कार के लिए यह सेगमेंट भी एंट्री लेवल ही माना जाता है. ये कारें शहर में चलाने के लिए आसान होती हैं और पार्किंग में भी कम जगह लेती हैं. इस सेगमेंट की कारों की लंबाई 3,699 मिमी तक होती है. इनमें आमतौर पर 800 सीसी से 1.0 लीटर तक के छोटे इंजन मिलते हैं. ये कारें कम कीमत, बेहतर माइलेज और लो-मेंटनेंस के लिए जानी जाती हैं.

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Maruti Baleno इंडियन मार्केट में B सेगमेंट में आती है. Photo: Globalsuzuki.com

B-सेगमेंट की कारें

B-सेगमेंट की कारें साइज के मामले में A-सेगमेंट से थोड़ी बड़ी और ज्यादा फीचर रिच होती हैं. इनमें बेहतर परफॉर्मेंस और कम्फर्ट मिलता है. ये कारें सिटी राइड के साथ-साथ कभी-कभार हाईवे पर चलाने के लिए भी ठीक मानी जाती हैं. इस सेगमेंट की कारों की लंबाई 3,700 मिमी से 3,849 मिमी के बीच होती है. इसे दो कैटेगरी (B1 और B2) में बांटा गया है. इसमें B1 छोटे हैचबैक और माइक्रो एसयूवी आती हैं, जबकि B2 में सब-4 मीटर वाली सेडान और एसयूवी शामिल होती हैं.

C सेगमेंट की कारें

आज के समय में C-सेगमेंट सबसे ज्यादा चर्चा में है. इस सेगमेंट में स्पेस ज्यादा मिलता है. इसके अलावा इन कारों में पावरफुल इंजन और ज्यादा प्रीमियम फीचर्स मिलते हैं. बड़ी फैमिली, लांग ट्रिप और कम्फर्टेबल राइड्स के लिए इस सेगमेंट की कारों को सबसे मुफीद माना जाता है. C-सेगमेंट की कारें 4 मीटर से लंबी होती हैं, इसलिए इन पर टैक्स भी ज्यादा लगता है. इनकी लंबाई 4,000 मिमी से 4,599 मिमी तक होती है. इस सेगमेंट में हैचबैक नहीं मिलती. C1 में मिड-साइज एसयूवी आती हैं, जबकि C2 में 7-सीटर एमपीवी और कुछ सेडान शामिल होती हैं.

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D सेगमेंट की कारें

D-सेगमेंट में कदम रखते ही कार की साइज सबसे ज्यादा बढ़ जाती है. इस सेगमेंट में उन कारों को शामिल किया जाता है जो न केवल साइज में बड़ी होती हैं बल्कि लग्ज़री फीचर्स से लैस होती हैं. इनमें बड़ा पावरफुल इंजन, एडवांस कंपर्टेबल फीचर्स और सीट्स मिलते हैं. बड़े व्हीलबेस के चलते इन कारों के केबिन में भरपूर स्पेस मिलता है.

Toyota Fortuner भारतीय बाजार में D सेगमेंट कैटेगरी में आती है. Photo: toyotabharat.com

इस सेगमेंट की कारों की लंबाई 4,600 मिमी से 4,799 मिमी तक होती है. ज्यादा लंबाई की वजह से इनकी कीमत भी ज्यादा होती है. D-सेगमेंट को D1 और D2 में बांटा गया है. D1 में प्रीमियम एसयूवी, सेडान और एमपीवी आती हैं, जबकि D2 में बड़ी और दमदार एसयूवी शामिल होती हैं.

D+ सेगमेंट की एंट्री

पहले D-सेगमेंट को सबसे बड़ा माना जाता था, लेकिन अब बाजार में D+ सेगमेंट की एंट्री हो चुकी है. इस सेगमेंट की कारें 5 मीटर से भी लंबी होती हैं. हाल ही में इस नए सेगमेंट में एक नई एसयूवी पेश की गई है. अभी इसकी टेस्टिंग बाकी है, लेकिन आने वाले समय में यह सेगमेंट और चर्चा में रहेगा.
 

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