पश्चिम एशिया में तनाव खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. इस बीच तेल, गैस सप्लाई को लेकर दुनिया भर में उहापोह की स्थिति बनी हुई है. लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर बने हुए खतरे के बीच भारत ने अपने एनर्जी स्ट्रेटजी में बड़ा बदलाव किया है. सरकार ने बताया है कि अब भारत अपने कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के अलावा दूसरे रास्तों से ला रहा है. पहले यह हिस्सा करीब 55 प्रतिशत था. इसके अलावा सरकार ने कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) पर भी बड़ा ऐलान किया है.
बुधवार को हुई मिनिस्ट्री की प्रेस ब्रीफिंग में अधिकारियों ने बताया कि नई लॉजिस्टिक्स स्कीम के तहत भारत ने कच्चे तेल की सप्लाई को और बेहतर करने की कोशिश की है. भारत को रोजाना करीब 55 लाख बैरल कच्चे तेल की जरूरत पड़ती है. इस नई व्यवस्था का मकसद साफ है कि, समुद्री मार्गों से देश में लाए जाने वाले कच्चे तेल की सप्लाई किसी भी तरह से प्रभावित न हो.
इस बीच भारतीय रिफाइनरियों ने रूस से कच्चे तेल की खरीद भी बढ़ा दी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका की ओर से 30 दिन की अस्थायी छूट मिलने के बाद भारत ने करीब 3 करोड़ बैरल रूसी तेल खरीदने का समझौता किया है. पिछले कुछ सालों में रूस भारत के लिए कच्चे तेल का बड़ा सोर्स बनकर उभरा है. एक्सपर्ट्स के अनुसार 2024 से 2026 के बीच भारत के कुल तेल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी करीब एक तिहाई रही है.
देश में पेट्रोल और डीजल की सप्लाई बनाए रखने के लिए रिफाइनरियों ने अपना प्रोडक्शन बढ़ा दिया है. कई रिफाइनरियां फिलहाल अपनी तय क्षमता से भी ज्यादा यानी 100 प्रतिशत से ऊपर पर काम कर रही हैं. अधिकारियों के मुताबिक कच्चे तेल और एलएनजी (LNG) के कई जहाज फिलहाल भारतीय बंदरगाहों की ओर आ रहे हैं, जिससे जल्द ही फ्यूल सप्लाई बहाल हो जाएगी.
सरकार ने आम लोगों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर को राहत देने के लिए जरूरी कदम भी उठाए हैं. 9 मार्च को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत नेचुरल गैस कंट्रोल ऑर्डर जारी किया गया है. इसके तहत सीएनजी और घरेलू पाइप गैस यानी पीएनजी की सप्लाई में किसी तरह की कटौती नहीं होगी और 100 प्रतिशत सप्लाई की जाएगी. इसके लिए रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल जैसे दूसरे इंडस्ट्री के लिए गैस डिस्ट्रीब्यूशन में करीब 35 प्रतिशत तक कटौती की जाएगी, ताकि आम लोगों की रसोई और डेली ट्रांसपोर्ट को प्राथमिकता दी जा सके.
सरकार ने यह भी साफ किया है कि देश के बंदरगाहों पर एक्सपोर्ट और इंपोर्ट का काम सामान्य रूप से चल रहा है. शिपिंग मिनिस्ट्री फारस की खाड़ी में चल रहे भारतीय जहाजों पर लगातार नजर रखे हुए है. फिलहाल वहां 28 भारतीय झंडे वाले जहाज काम कर रहे हैं, जिनमें से 24 जहाज स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के पश्चिम में और 4 पूर्व में हैं. जहाजों की आवाजाही और उनके कार्गो की स्थिति पर नजर रखने के लिए स्पेशल कंट्रोल रूम भी बनाए गए हैं.
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