'वक्त से दिन और रात, वक्त से कल और आज...' 1965 की फिल्म वक्त का यह मशहूर गीत जैसे ही सभागार में गूंजा, दर्शक भावनाओं की उस दुनिया में पहुंच गए जहां संघर्ष, संवेदनाएं और जीवन के उतार-चढ़ाव एक साथ दिखाई देते हैं. कुछ ऐसा ही माहौल दिल्ली के त्रिवेणी कला संगम में देखने को मिला, जहां हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता रहे बलराज साहनी की आत्मकथा पर आधारित संगीतमय प्रस्तुति 'मेरी फिल्मी आत्मकथा' को प्रस्तुति का विषय बनाया गया.
थ्री आर्ट्स क्लब, और कात्यायनी थिएटर ग्रुप के जरिये राजधानी दिल्ली में इस कार्यक्रम का आयोजन बलराज साहनी की 113वीं जयंती की पूर्व संध्या पर हुआ. उनका जन्म 1 मई 1913 को हुआ था. प्रस्तुति में कलाकार निधिकान्त पाण्डेय ने बलराज साहनी की भूमिका निभाई और अपने प्रभावशाली अभिनय से उनके संघर्ष, संवेदनाओं और फिल्मी सफर को जीवंत कर दिया. उन्होंने पटकथा को नाटकीय रूप देने के साथ लगभग 25 गीतों का चयन भी किया, जो कहानी के भावों को आगे बढ़ाते रहे.
गायन की जिम्मेदारी आकाशवाणी के ‘ए ग्रेड’ गायक देवानंद झा ने संभाली. उनकी मधुर आवाज ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. वहीं बुरहान कुरैशी ने बलराज साहनी के जीवन से जुड़े 22 अलग-अलग किरदारों को मंच पर जीवंत किया. संगीत में की-बोर्ड पर जीतू और तबले पर अधीर ने बेहतरीन संगत दी, जबकि प्रकाश व्यवस्था आर्यन मधोक ने संभाली.
कार्यक्रम की शुरुआत ‘आओ झूमें गाएं’ गीत से हुई और फिर एक के बाद एक गीतों और संवादों के जरिए बलराज साहनी की भावनात्मक कहानी आगे बढ़ती रही. अंतिम चरण में जब सदाबहार गीत ‘ऐ मेरी ज़ोहराजबीं’ प्रस्तुत किया गया तो पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा. कई दर्शक सीटों पर बैठे-बैठे ही झूमते नजर आए. अंतिम संवाद के बाद दर्शकों ने खड़े होकर पूरी टीम का जोरदार स्वागत किया. कार्यक्रम की निर्माता अनुराधा दर और निर्देशक सोहेला कपूर ने बताया कि अब हर महीने के चौथे गुरुवार को ऐसी संगीतमय प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी. आगामी दिनों में 'दास्तान-ए-देव आनंद' की प्रस्तुति दी जाएगी.
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