समृद्धि की देवी, आदिवासी अन्नपूर्णा माता... कौन हैं 'कंसारी देवी' जो गुजरात सरकार की बजट बुक पर नजर आईं

गुजरात सरकार ने इस बार के बजट में वारली पेंटिंग और आदिवासी देवी कंसारी देवी की छवि को शामिल कर आदिवासी संस्कृति को सम्मानित किया है. वारली पेंटिंग, जो दक्षिण गुजरात और महाराष्ट्र के आदिवासी क्षेत्रों की पारंपरिक कला है, को बजट कवर पर प्रदर्शित किया गया है.

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गुजरात सरकार की बजट बुक पर वारली पेंटिंग में कंसारी देवी की छवि बनाई गई है (फोटो- ITG) गुजरात सरकार की बजट बुक पर वारली पेंटिंग में कंसारी देवी की छवि बनाई गई है (फोटो- ITG)

ब्रिजेश दोशी

  • नई दिल्ली,
  • 18 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:26 PM IST

गुजरात सरकार ने बुधवार को अपना बजट पेश किया है. हालांकि इस बार बजट की चर्चा सिर्फ आर्थिक प्रावधानों तक सीमित नहीं है, बल्कि आकर्षण का केंद्र है बजट का कवर. इस साल बजट बुक को वारली पेंटिंग और आदिवासी देवी ‘कंसारी देवी’ की इमेज से सजाया गया है. इस तरह सरकार ने आदिवासी संस्कृति और परंपरा को सम्मान दिया है. 

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वारली जनजाति खास तौर से दक्षिण गुजरात के वलसाड क्षेत्र और महाराष्ट्र के ठाणे जिले के आसपास रहने वाली रही है. यह जनजाति अपनी खास पेंटिंग शैली के लिए दुनियाभर में जानी जाती है. वारली पेंटिंग की सबसे बड़ी खासियत इसकी सादगी और प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति है. विशेष रूप से महिलाएं त्योहार, विवाह, सगाई, फसल कटाई, जन्म जैसे शुभ अवसरों पर भीगे हुए चावल से तैयार सफेद रंग से घरों की दीवारों पर जो चित्र बनाती हैं, उनमें रोजमर्रा के जीवन की झलक होती है.

वारली पेंटिंग में जीवन की झलक

इन चित्रों में सुबह से शाम तक के कई रंग-रूप नजर आते हैं.  खेतों में काम करती महिलाएं, कुओं से पानी भरती महिलाएं, मजदूर, नृत्य करते लोग, जंगल, पहाड़, नदियां, जानवर, पक्षी, शिकार के सीन और देवी-देवताओं की पूजा. वारली पेंटिंग में त्रिभुज, सर्कल और स्क्वायर जैसी ज्यामितीय आकृतियों का उपयोग कर मानव और प्रकृति के संबंध को दर्शाया जाता है. इनकी रेखाएं सरल होती हैं, लेकिन उनमें जीवन की गहरी झलक दिखाई देती है.

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इस बार बजट बुक में 'कंसारी देवी' का चित्र विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र रहा. कंसारी देवी को आदिवासियों की समृद्धि की देवी माना जाता है. विवाह, नई फसल या किसी भी शुभ अवसर पर उनकी स्थापना और पूजा की जाती है. उन्हें अन्नपूर्णा माता के रूप में भी देखा जाता है, जिनकी कृपा से घर-परिवार में सुख और समृद्धि बनी रहती है. इस प्रतीक के माध्यम से सरकार ने समृद्धि और विकास का संदेश देने की कोशिश की है.

1200 साल पुरानी है वारली पेंटिंग
बताया जाता है कि वारली चित्रकला लगभग 1200 साल पुरानी है. आधुनिक जीवनशैली और बदलती परिस्थितियों के कारण यह पारंपरिक कला धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही है. ऐसे में गुजरात सरकार द्वारा बजट बुक में वारली कला को स्थान देना न केवल सांस्कृतिक सम्मान है, बल्कि इसे संरक्षित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. इस वर्ष भी कलाकार बीना हसमुख पटेल ने वारली शैली में बजट कवर की चित्रकारी की है. वे पिछले चार वर्षों से यह जिम्मेदारी निभा रही हैं. बजट की इस सांस्कृतिक प्रस्तुति ने आर्थिक दस्तावेज को भी कला और परंपरा से जोड़कर विशेष बना दिया है.

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