मिर्च की खेती के लिए किसान प्लास्टिक मल्चिंग (प्लास्टिक शीट बिछाने) की तकनीक अपना सकते हैं. यह तरीका बहुत आसान है और इससे खर्च कम होता है, जबकि पैदावार 30 से 60 प्रतिशत तक बढ़ जाती है. प्लास्टिक मल्चिंग विधि से मिर्च की खेती करने पर कम लागत में बढ़िया कमाई हो सकती है. किसान कम पानी, कम मजदूरी और कम कीटनाशक के प्रयोग से अच्छी क्वालिटी की मिर्च का उत्पादन कर सकते हैं.
प्लास्टिक मल्चिंग क्या है?
प्लास्टिक मल्चिंग में खेत की मिट्टी पर पतली प्लास्टिक शीट (मल्च फिल्म) बिछाई जाती है. यह शीट 20-50 माइक्रोन मोटी होती है. जो काली, सफेद-काली, सिल्वर-काली जैसे रंगों में आती है. इससे मिट्टी ढक जाती है और पौधे इसके ऊपर बने छेदों से उगते हैं.
इस तकनीक के क्या फायदे हैं?
खरपतवार पर 90-95% नियंत्रण: शीट बिछने से खरपतवार नहीं उग पाते. निराई-गुड़ाई की जरूरत लगभग खत्म हो जाती है. जिससे मजदूरी का बड़ा खर्च बचता है.
पानी की 40-50% बचत: प्लास्टिक से मिट्टी में नमी लंबे समय तक रहती है. भाप बनकर पानी नहीं उड़ता. ड्रिप सिंचाई के साथ इस्तेमाल करने पर और ज्यादा फायदा होता है.
पैदावार में जबरदस्त बढ़ोतरी: मिर्च के पौधे तेजी से बढ़ते हैं. मिर्च की गुणवत्ता भी बेहतर होती है, बाजार में अच्छी कीमत मिलती है.
मिट्टी का तापमान सही रहता है: दिन में गर्मी और रात में ठंडक बनी रहती है. जड़ें मजबूत होती हैं. सर्दी-गर्मी दोनों में फसल अच्छी रहती है.
कीट-रोग से बचाव: सिल्वर-ब्लैक या सफेद-काली शीट से चूसने वाले कीट (जैसे थ्रिप्स) कम आते हैं. जिससे दवाइयों का खर्च 30-40% तक कम हो जाता है.
खाद का सही इस्तेमाल: खाद और पोषक तत्व पौधों तक सीधे पहुंचते हैं. साथ ही मिट्टी भी भुरभुरी रहती है.
मिर्च की खेती में प्लास्टिक मल्चिंग कैसे करें?
यह तकनीक छोटे-बड़े सभी किसानों के लिए बहुत उपयोगी है. मिर्च, टमाटर, बैंगन, शिमला मिर्च जैसी सब्जियों में यह विधि बहुत सफल साबित हो रही है. अगर आप भी मिर्च की खेती करते हैं तो इस बार प्लास्टिक मल्चिंग जरूर आजमाएं.
आजतक एग्रीकल्चर डेस्क