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पाकिस्तान ने तालिबान के दबाव में भारत को दी इजाजत लेकिन दिखाई ये चालाकी

अफगानिस्तान को मानवीय तौर पर मदद पहुंचाने को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद अब भी थमता नजर नहीं आ रहा है. पिछले हफ्ते पाकिस्तान ने भारत को बुरे हालातों से जूझते अफगानिस्तान में गेहूं और अन्य जरूरी सामानों को ले जाने की अनुमति देने का फैसला किया था लेकिन अब भी दोनों देश इस काम के लिए एक साझा रणनीति नहीं बना पाए हैं.

वाघा बॉर्डर फोटो क्रेडिट: रॉयटर्स वाघा बॉर्डर फोटो क्रेडिट: रॉयटर्स
स्टोरी हाइलाइट्स
  • भारत-पाकिस्तान में अब ट्रकों को लेकर हुआ विवाद
  • अफगानिस्तान में मदद पहुंचाना चाहता है भारत

अफगानिस्तान को इंसानियत के नाते मदद पहुंचाने को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद अब भी थमता नजर नहीं आ रहा है. पिछले हफ्ते पाकिस्तान ने तालिबान के आग्रह के बाद भारत को अफगानिस्तान में गेहूं और अन्य जरूरी सामानों को भेजने की अनुमति देने का फैसला किया था लेकिन अब पाकिस्तान इस काम में नया रोड़ा अटकाता नजर आ रहा है. एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत-पाकिस्तान के बीच अब ट्रकों की आवाजाही को लेकर नया विवाद शुरू गया है. 

दरअसल, पिछले हफ्ते पाकिस्तान ने भारत को वाघा बॉर्डर के रास्ते 50 हजार मीट्रिक टन गेहूं अफगानिस्तान में पहुंचाने के लिए भारत को अनुमति दी थी. पाकिस्तान ने कहा था कि अफगानिस्तान के बुरे हालातों और मानवीय संकट को देखते हुए ये असाधारण फैसला लिया जा रहा है. पाकिस्तान ने हालांकि इसे लेकर एक प्रस्ताव भी रखा है. इस प्रस्ताव के अनुसार, वाघा बॉर्डर पहुंचने के बाद संयुक्त राष्ट्र द्वारा संचालित किए जा रहे पाकिस्तान के ट्रकों में ही गेंहू को ले जाया जाए. ये ट्रक वाघा बॉर्डर पर गेहूं लादकर अफगानिस्तान ले कर जाएंगे. 

भारत ने नहीं माना पाकिस्तान का प्रस्ताव

एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के इस प्रस्ताव के तहत भारत को शिपमेंट शुल्क का भुगतान करना होगा. भारत को पहली शिपमेंट के 30 दिनों के अंदर ये प्रक्रिया पूरी करनी होगी. गौरतलब है कि 50 हजार मीट्रिक टन गेहूं के लिए 1200 ट्रकों की जरूरत पड़ेगी. राजनयिक सूत्रों के अनुसार, भारत ने पाकिस्तान के इस प्रस्ताव को मानने से इनकार कर दिया है. भारत ने आपत्ति जताते हुए कहा है कि मानवीय सहायता के साथ किसी तरह की शर्त को नहीं जोड़ा जाना चाहिए. 

पाकिस्तान के प्रस्ताव के विपरीत, भारत ने सुझाव दिया है कि गेहूं को भारतीय या अफगानिस्तान के ट्रकों में ले जाया जाना चाहिए. लेकिन पाकिस्तान ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि भारत को खाद्यान्न और अन्य जरूरी सामान संयुक्त राष्ट्र के बैनर तले पाकिस्तानी ट्रकों द्वारा भेजना चाहिए. बीते गुरुवार को एक ब्रीफिंग में, भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने भी जोर देकर कहा था कि मानवीय सहायता को लेकर भेजी जा रही शिपमेंट के लिए पाकिस्तान द्वारा कोई शर्त नहीं जोड़ी जानी चाहिए. 

अरिंदम बागची ने कहा कि 'ये 50,000 मीट्रिक टन गेहूं और जीवन रक्षक दवाओं की डिलीवरी अफगानिस्तान में मानवीय सहायता के तौर पर पहुंचाई जा रही है. हम पाकिस्तान सरकार की प्रतिक्रिया पर सोच-विचार कर रहे हैं. हम इस मुद्दे पर पाकिस्तानी पक्ष के साथ काम करना चाहते हैं लेकिन हमारा मानना ​​है कि मानवीय सहायता को शर्तों के अधीन नहीं होना चाहिए.'
 

 

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