scorecardresearch
 

बेटी ने छिपकर जाने मां-बाप के सीक्रेट, बर्बाद हुई जिंदगी

लंदन की मशहूर लेखिका डेनिएला इसहाक ने अपनी जिंदगी के बारे में कुछ अहम खुलासे किए हैं. ब्रिटिश न्यूज पेपर द ऑब्जर्वर को दिए इंटरव्यू में डेनिएला ने बताया कि कैसे उन्हें बचपन में जासूसी का कीड़ा लगा था और इस सनक ने उनकी जिंदगी खराब कर दी.

 लेखिका डेनिएला इसहाक ने अपनी जिंदगी के बारे में कुछ अहम खुलासे किए हैं लेखिका डेनिएला इसहाक ने अपनी जिंदगी के बारे में कुछ अहम खुलासे किए हैं
स्टोरी हाइलाइट्स
  • राइटर ने बताई जासूस बनने की कहानी
  • एक आदत ने खराब की जिंदगी
  • मां से मिली बड़ी सीख

लंदन की मशहूर लेखिका डेनिएला इसहाक ने अपनी जिंदगी के बारे में कुछ अहम खुलासे किए हैं. ब्रिटिश न्यूज पेपर 'द ऑब्जर्वर' को दिए इंटरव्यू में डेनिएला ने बताया कि कैसे उन्हें बचपन में जासूसी का कीड़ा लगा था और इस सनक ने उनकी जिंदगी खराब कर दी.  डेनिएला ने बताया, 'बचपन से ही मैं देखती थी कि मेरी मां एक डायरी में कुछ ना कुछ लिखती रहती थी. मेरे मन में हमेशा जानने की इच्छा होती थी कि आखिर वो क्या लिखती हैं. 14 साल की उम्र में मैंने पहली बार मुझे मां की डायरी पढ़ने का मौका मिला. उस समय मां और पापा किसी काम से बाहर गए थे.'

'मैंने छिपकर मां की डायरी पढ़ी. इसके बाद तो ये मेरी आदत बन गई. डायरी से मुझे पता अपने माता-पिता के जिंदगी की कड़वी सच्चाई का पता चला. वो दोनों जिस तरह मेरे सामने एक अच्छे कपल होने का नाटक करते थे दरअसल सच्चाई कुछ और थी. दोनों की जिंदगी के बारे में जानने की मेरी उत्सुकता बढ़ती जा रही थी. छिपकर डायरी पढ़ने के अलावा मैं अब चुपके से उनके फोन कॉल्स भी सुनने लगी थी. मां-पापा दोनों के अपने अलग-अलग राज थे जो अब मुझे भी पता चल चुके थे. मैं उनकी शादीशुदा जिंदगी ठीक करना चाहती थी. मेरे दिमाग में बहुत कुछ चलने लगा था जो मैं अपने पेरेंट्स से शेयर नहीं करती थी. इसका असर मुझ पर मानसिक रूप से पड़ने लगा. डॉक्टर्स और थेरेपिस्ट के पास ले जाने के दौरान मेरे पेरेंट्स को पता चला कि मैं उनके सारे सीक्रेट्स जान चुकी हूं.'

'आखिरकार कुछ दिनों में दोनों ने तलाक का फैसला कर लिया. हालांकि, कुछ दिनों में ही दोनों एक बार फिर साथ आ गए और इसके बाद दोनों आज तक साथ हैं. मां-पापा ने अपनी शादीशुदा जिंदगी तो बेहतर कर ली लेकिन मेरे अंदर की जासूसी खत्म नहीं हुई. हर बात की सच्चाई तक जाना, हर रिश्ते के बारे में अलग तरीके से छिपकर पता करना मेरी फितरत बन चुकी थी. मैं हर रिश्ते में कुछ ना कुछ ढूंढती ही रहती थी. मेरी ये आदत मुझे अंदर से खोखला कर रही थी. मैं किसी पर भी ठीक से भरोसा नहीं कर पाती थी. 17 साल की उम्र में मैं पहली बार रिलेशनशिप में आई और एक बार फिर मेरे अंदर का जासूस जाग उठा.  मेरा पार्टनर मेरा बहुत ख्याल रखता था और हमारे रिश्ते को लेकर गंभीर भी था लेकिन फिर भी मैं हमेशा चौकस रहती थी.'

'जब भी मुझे लगता था कि मैं अपने साथी से ज्यादा प्यार करने लगी हूं तभी मेरे अंदर से एक आवाज आती थी कि मुझे उस पर पूरी तरह भरोसा नहीं करना चाहिए. क्या पता वो मुझसे झूठ बोल रहा हो. मैंने उसकी जासूसी शुरू कर दी. उसके कॉलेज में एक लड़की थी जिस पर मुझे हमेशा शक होता था. एक दिन जब मेरे ब्वॉयफ्रेंड नहा रहा था तो मैंने चुपके से उसके मैसेजेस पढ़ लिए. उस लड़की ने मेरे ब्वॉयफ्रेंड को कई सारे मैसेज किए थे. बस इसके बाद मैंने अपने पार्टनर पर सवालों की बौछार कर दी. धीरे-धीरे मैं अपने उसी पुराने आदत में वापस जाने लगी. उस पर नजर रखना और छिप-छिप कर उसके बारे में पता करना और मोबाइल चेक करते रहना. समस्याओं पर बात करने की बजाय मैं उसे दिल के कोने में बिठाने लगी. इससे मेरे अंदर असुरक्षा की भावना आ गई. आखिरकार हमारा ब्रेकअप हो गया.'

'जासूसी की आदत से मेरे अंदर जलन की भावना भी आ चुकी थी जो मेरे हर रिश्ते को खराब कर रही थी. इसके अलावा, मेरी और भी कई ऐसी आदते थीं जिसकी वजह से मैं अपनी जिंदगी खराब कर चुकी थी. मैं पूरा घर साफ किए बिना नहीं सो पाती थी. मेरी अलमारियां हमेशा पूरी तरह बंद रहती थीं. कपड़े अच्छे से तह रहते थे. सोने से पहले मैं बिस्तर के नीचे और हर एक कोना चेक करती थी. ये एक तरह की OCD थी. मेरी इन सब आदतों से परेशान होकर मां ने मुझ पर दबाव बनाया कि मैं अलमारियों के दरवाजे खुले रखकर सोऊं. मैंने उनकी बात मानी. ये मेरे लिए मुश्किल भरा काम था, मैं बेचैनी महसूस कर रही थी लेकिन जब तक मैं सो नहीं गई मेरी मां मेरे पास ही रही. हैरानी की बात ये ही अगले दिन मैं काफी हल्का महसूस कर रही थी. ऐसा लग रहा था कि रातों रात मेरे दिमाग से कुछ भारी चीज हट गई है.

'ब्रेकअप के बाद मैं कई सालों तक अकेली रही. कुछ सालों बाद मैं एक ऐसी व्यक्ति से मिली जिसके साथ मैं एक बार फिर से खुलकर हंसने लगी थी. उस पर भरोसा करना मेरे लिए मुश्किल था लेकिन इस बार मैंने अपने आपको पूरा मौका दिया लेकिन अपनी जासूसी की आदत से निपटने के लिए इस बार मैंने एक तरीका निकाला. मैंने उसे ओपन रिलेशनशिप की मंजूरी दे दी. मैं चाहती थी कि जो कुछ भी हो उसकी जानकारी मुझे पहले से रहे. इस तरह मैं खुद की भावनाओं को बेहतर तरीके से समझ सकूंगी. पार्टनर को किसी और के साथ कल्पना करने में तकलीफ तो हुई लेकिन मैंने खुद को शांत रखा और जलन की भावना से बाहर निकलने की कोशिश की. मैंने खुद को समझाया कि इसमें कुछ भी सीक्रेट नहीं है और सब मेरी मंजूरी से हो रहा है.' 

'मेरा पार्टनर अब पूरी तरह मेरे साथ है और मैं भी अब पूरी तरह बदल चुकी हैं. अब मैं अपने रिश्तों की सीमाओं पर खुलकर बात करती हूं. अब मुझमें ये स्वीकार करने की क्षमता है कि मैं जिसके भी साथ हूं उसकी सेक्सुएलिटी मेरे लिए नहीं है और ना हीं मैं ये चाहती हूं. मैं अब केवल खुलकर सांस लेना चाहती हूं, आजाद रहना चाहती हूं, मैं रिश्ते में सुरक्षित महसूस करना चाहती हूं और भरोसा अपने आप हो जाएगा. एक दिन मां ने मुझे समझाते हुए कहा कि किसी भी रिश्ते में आप एक-दूसरे को दुखी ना करने का वादा नहीं कर सकते. बल्कि एक-दूसरे के साथ रहकर आप उनकी इज्जत करना सीख जाते हो.' मां की ये बातें मेरे मन में घर कर गईं.

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

A post shared by Daniella Isaacs (@daniellaisaacs)

'मां-पिता की शादी ठीक करने के चक्कर में मैं कब जासूस बन गई थी मुझे पता भी नहीं चला. मुझे लगा कि मेरे अंदर सब कुछ ठीक करने की क्षमता है और मैं चीजों को लेकर हमेशा स्पष्ट और सुरक्षित रहूंगी. ये सब मेरा भ्रम था. जीवन के इस मोड़ पर खुद को इतना दर्द देने के बाद मैं समझ चुकी हूं कि कुछ भी आपके वश में नहीं होता है. अब मैंने कुछ भी सोचना बंद कर दिया है और अनिश्चितता वाली जिंदगी जीने लगी हूं क्योंकि वास्तव में हमारे पास बस इतना ही है.'

 

 

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें