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'सुप्रीम कोर्ट को सवारी का साधन मान लिया है', महराष्ट्र सरकार को SC ने लगाई फटकार

मुंबई की आरे कॉलोनी में पेड़ काटने के मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट महाराष्ट्र सरकार पर नाराज हो गया. अदालत ने महाराष्ट्र सरकार से कहा कि हमने आपको 84 पेड़ काटने की इजाजत दी. इसके बाद भी मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (MMRC) ने वृक्ष प्राधिकरण के पास जाकर कोर्ट की अवमानना की.

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सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महाराष्ट्र सरकार को फटकार लगाई. अदालत ने यह तक कह दिया कि आपने (महाराष्ट्र सरकार) सुप्रीम कोर्ट को सवारी का साधन मान लिया है. SC ने मुंबई की आरे कॉलोनी में पेड़ काटने की अनुमति पर सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के चलते महाराष्ट्र सरकार पर नाराजगी जाहिर की.

सर्वोच्च अदालत ने कहा कि कि जब 84 पेड़ काटने की इजाजत दे दी गई तो आप (महाराष्ट्र सरकार) 185 पेड़ काटने की नीयत के साथ वृक्ष प्राधिकरण (Tree Authority) के पास चले गए. इस काम को करने के बाद मुंबई मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (MMRC) ने कोर्ट की अवमानना की है. अब अथॉरिटी को कोर्ट के सामने पेश होना होगा. उनका ये तौर तरीका ठीक नहीं है.

सीधे प्राधिकरण के पास क्यों गए?

नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने कहा कि आपको जब जरूरत हुई हमने इजाजत दी. लेकिन आप और ज्यादा पेड़ काटने के लिए सीधे वृक्ष प्राधिकरण के पास चले गए. कोर्ट का रुख देखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बिना शर्त उस कदम के लिए माफी मांग ली और हलफनामा दाखिल करने की बात भी कही.

...तो हमारे पास ही आना था

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सुनवाई के दौरान सीजेआई जस्टिस चंद्रचूड ने कहा कि हमने 84 पेड़ काटने की इजाजत दी थी. अगर आपको और पेड़ काटने थे तो उचित वजह और उपाय सुझाते हुए हमारे पास ही आना था, न कि वृक्ष प्राधिकरण के पास जाना चाहिए था. कोर्ट ने नाराज होते हुए कहा  कि इस काम के लिए MMRC के जिम्मेदार अधिकारियों को जेल भेजा जा सकता है. ये अवमानना का गंभीर मामला है. 

53 पेड़ों को किया जाएगा ट्रांसप्लांट!

कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल से कहा कि जिन पेड़ों को काटने की बात हो रही है, उनमें से कितने ट्रांसप्लांट किए जा सकते हैं? इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने कहा की 53 पेड़ों को ट्रांसप्लांट करने और 1533 नए पौधे फिर से रोपने की योजना है.

सरकार की तरफ से पेश हुए SG

इससे पहले नवंबर 2022 में मुंबई के आरे फॉरेस्ट इलाके में मेट्रो कार शेड के निर्माण के लिए हरी झंडी मिल गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने आरे फॉरेस्ट में मेट्रो कार शेड के निर्माण के लिए 84 पेड़ काटे जाने की योजना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था. याचिका पर सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार की तरफ से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए थे. 

23 हजार करोड़ रु. का प्रोजेक्ट

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एसजी तुषार मेहता ने मेट्रो कार शेड प्रोजेक्ट का नक्शा सुप्रीम कोर्ट में पेश करते हुए 84 पेड़ काटने की इजाजत मांगी थी. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इस परियोजना की अनुमानित लागत 23 हजार करोड़ रुपये थी. पहले ही 22 हजार करोड़ रुपये इस परियोजना में निवेश किए जा चुके हैं. सॉलिसीटर जनरल ने कहा था कि मुकदमेबाजी की वजह से हुई देरी के कारण लागत बढ़कर अब 37 हजार करोड़ रुपये हो गई है. उन्होंने कोर्ट को ये भी बताया था कि आरे मेट्रो कार शेड का निर्माण पूरा हो जाने के बाद कार्बन उत्सर्जन कम होगा और इससे भी बहुत प्रभाव पड़ेगा.

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