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ओडिशा सरकार ने क्यों कलाकारों को केवल इको-फ्रेंडली मूर्ति बनाने का दिया आदेश?

ओडिशा सरकार के वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग ने एक विज्ञप्ती जारी कर कलाकारों द्वारा मूर्तियों के निर्माण पर नियमों में बदलाव का निर्देश दिया है.

ओडिशा सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के मद्देनजर बनाया नया नियम. ओडिशा सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के मद्देनजर बनाया नया नियम.
स्टोरी हाइलाइट्स
  • नियमों के उल्लंघन पर मूर्ति कलाकारों के खिलाफ होगी कार्रवाई
  • पर्यावरण के मद्देनजर पटनायक सरकार ने जारी किया आदेश

ओडिशा सरकार ने पर्यावरण व जल प्रदूषण नियंत्रण के मद्देनजर कलाकारों द्वारा मूर्तियों के निर्माण पर एक विशेष नियम तैयार किया है. प्रदेश की सरकार ने त्योहारों के समय शहरों में बड़े पैमाने पर प्लास्टिक, थर्माकोल, प्लास्टर ऑफ पेरिस, सिंथेटिक डाई-आधारित पेंट एवं नॉन-बायोडिग्रेबल रासायनिक रंग द्वारा तैयार किया जाने वाले मूर्तियों पर पाबंदी लगाई है. साथ ही पूजा के बाद प्रसाद वितरण के दौरान इस्तेमाल होने वाले थर्माकोल प्लेट पर भी रोक लगाने का आदेश दिया है. मूर्तियों के निर्माण के दौरान नया नियमों को अनदेखा करने पर कालाकारों के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया गया है. 

ओडिशा सरकार के वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग ने एक विज्ञप्ती जारी कर कलाकारों द्वारा मूर्तियों के निर्मण पर नियमों में बदलाव का निर्देश दिया है. विभाग ने ओडिशा जल प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण (पूजा के बाद मूर्ति के विसर्जन की प्रक्रिया) नियम, 2021 का हवाला देते हुए कहा कि कलाकार मूर्तियों के निर्माण के लिए केवल प्रकृतिक, बायोडिग्रेबल (जल में मिलनसार) और इको-फ्रेंडली वस्तुओं/पदार्थ का इस्तेमाल कर सकते हैं.

विभाग ने विज्ञप्ति जारी कर कहा कि कलाकारों द्वारा मूर्तियों के निर्माण के दौरान प्लास्टिक, थर्माकोल, प्लास्टर ऑफ पेरिस, सिंथेटिक डाई-आधारित पेंट एवं गैर-बायोडिग्रेबल रासायनिक रंग का इस्तेमाल किया जा रहा है. जिसके कारण नदी व तलाब में विसर्जन के बाद मूर्ति पूरी तरह से पानी में नहीं मिल पाता है और वह प्रदूषण का कारण बनता है. विभाग ने बताया कि कलाकारों को केवल मूर्ति निर्माण के लिए प्रकृतिक, बायोडिग्रेबल (जल में मिलनसार) और इको-फ्रेंडली वस्तुओं/पदार्थ का इस्तेमाल करने का आदेश दिया गया है. साथ ही पूजा के कार्यों में इस्तेमाल होने वाला सिंगल यूज प्लास्टिक और प्रसाद के लिए थर्माकोल के स्थान पर बायोडिग्रेबल प्लेट, मिट्टी का बर्तन, पेपर कप या कांच का बर्तन इस्तेमाल करने का निर्देश दिया है. 

सरकार ने विज्ञप्ति के मुताबिक कहा कि प्रतिदिन 100 मूर्तियां तैयार करने वाले सभी कलाकारों को स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी से पंजीकरण करवाना होगा. पंजीकृत कलाकारों द्वारा नियमों को अनदेखा करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई होगी. साथ ही साथ त्योहार के दिनों में सभी पूजा कमेटी को केवल ईको-फ्रेंडली मूर्ति बनाने का आदेश दिया गया है.

आजतक संवाददाता से बातचीत में भुवनेश्वर नगर निगम के कमिश्नर संजय कुमार सिंह ने कहा कि जल प्रदूषण नियंत्रण करने के लिए शहर के कलाकारों को नियामों के आधारित मूर्ति तैयार करने का आदेश दिया गया है. हमने कई बार देखा है कि  विसर्जन के बाद नदी या तालाब में प्लास्टिक, थर्माकोल, प्लास्टर ऑफ पेरिस, सिंथेटिक कपड़ा से मिलकर बना मूर्ति जल को प्रदूषित करता है. जोकि हमारे पर्यावरण के लिए घातक साबित हो रहा है. शहर में इको-फ्रेंडली मूर्ति बना कर जल प्रदूषण को कम किया जा सकता है.

साथ ही कोरोना महामारी के मद्देनजर दुर्गा-पूजा के दौरान शहर में मूर्ति विसर्जन के लिए जगह-जगह पर प्लास्टिक का बनावटी तलाब तैयार किया गया है. यह नियम राष्ट्रीय हरित अधिकारण (एनजीटी) के निर्देशों के साथ केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा मूर्ति विसर्जन के संशोधित दिशा-निर्देशों और पश्चिम बंगाल जल प्रदूषण रोकथाम और नियंत्रण नियमों के मद्देनजर तैयार किया गया है.

 

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